
कोलंबो, श्रीलंका — क्रिकेट के मैदान पर जब भी भारतीय युवाओं की बात आती है, तो दुनिया उम्मीद करती है कि कोई नया सितारा चमकेगा। लेकिन साल 2026 के अंडर-19 विश्व कप के फाइनल में जो हुआ, उसने न केवल इतिहास रचा बल्कि क्रिकेट की परिभाषा ही बदल दी। भारत की अंडर-19 टीम ने फाइनल मुकाबले में इंग्लैंड को 100 रनों के विशाल अंतर से हराकर छठी बार विश्व विजेता का ताज अपने सिर सजाया है। इस ऐतिहासिक जीत के निर्विवाद नायक रहे 14 वर्षीय बल्लेबाजी सनसनी, वैभव सूर्यवंशी।
फाइनल का रोमांच: टॉस और शुरुआत
श्रीलंका के सिंहली स्पोर्ट्स क्लब मैदान पर खेले गए इस फाइनल मुकाबले में भारतीय कप्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। शुरुआती कुछ ओवरों में गेंद स्विंग हो रही थी, लेकिन वैभव सूर्यवंशी के इरादे कुछ और ही थे। उन्होंने पहले ही ओवर से इंग्लिश गेंदबाजों पर प्रहार करना शुरू कर दिया। उनके फुटवर्क और टाइमिंग को देखकर ऐसा लग ही नहीं रहा था कि मैदान पर कोई 14 साल का बच्चा खेल रहा है; बल्कि ऐसा लग रहा था जैसे कोई अनुभवी दिग्गज वर्षों से इस पिच पर राज कर रहा हो।
वैभव सूर्यवंशी की ‘तूफानी’ पारी
वैभव ने मात्र 80 गेंदों पर 175 रनों की एक ऐसी पारी खेली, जिसे आने वाले दशकों तक याद रखा जाएगा। उनकी बल्लेबाजी में पावर और नजाकत का अद्भुत मिश्रण था।
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तेज शुरुआत: उन्होंने अपना अर्धशतक मात्र 18 गेंदों में पूरा किया।
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छक्कों की बरसात: अपनी पारी के दौरान उन्होंने 12 गगनचुंबी छक्के और 18 चौके जड़े।
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दबाव का अंत: वैभव ने इंग्लैंड के सबसे प्रमुख स्पिनर के एक ही ओवर में 28 रन बटोरकर विपक्षी टीम का मनोबल पूरी तरह तोड़ दिया।
उनकी इस पारी की बदौलत भारत ने निर्धारित 50 ओवरों में 4 विकेट खोकर 385 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। वैभव जब आउट होकर पवेलियन लौटे, तो पूरा स्टेडियम खड़ा होकर उनके सम्मान में तालियां बजा रहा था।
गेंदबाजों का दबदबा और इंग्लैंड की हार
386 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम शुरुआत से ही दबाव में दिखी। भारतीय तेज गेंदबाजों ने वैभव द्वारा पैदा किए गए मनोवैज्ञानिक दबाव का पूरा फायदा उठाया। पावरप्ले के भीतर ही इंग्लैंड ने अपने तीन शीर्ष विकेट गंवा दिए। हालांकि, मध्यक्रम में कुछ छोटी साझेदारियां हुईं, लेकिन भारतीय स्पिनरों ने शिकंजा ढीला नहीं होने दिया। इंग्लैंड की पूरी टीम 44वें ओवर में 285 रनों पर सिमट गई और भारत ने 100 रनों से मैच जीतकर खिताब अपने नाम किया।
दिग्गजों की राय और भविष्य का ‘सुपरस्टार’
वैभव सूर्यवंशी की तुलना अभी से महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर और ब्रायन लारा से की जाने लगी है। क्रिकेट पंडितों का मानना है कि इतनी कम उम्र में ऐसी परिपक्वता और तकनीक अविश्वसनीय है। सोशल मीडिया पर ‘वैभव सूर्यवंशी’ नाम ट्रेंड कर रहा है और भारतीय फैंस उन्हें भविष्य का ‘रन मशीन’ मान रहे हैं।
मुख्य आकर्षण:
भारत अब 6 अंडर-19 विश्व कप खिताबों के साथ दुनिया की सबसे सफल टीम है।
वैभव सूर्यवंशी अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में सबसे कम उम्र में शतक बनाने वाले खिलाड़ी बने।
भारत के गेंदबाजों ने पूरे टूर्नामेंट में एक बार भी विरोधी टीम को 300 का आंकड़ा पार नहीं करने दिया।
यह जीत केवल एक ट्रॉफी नहीं है, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि भारत की क्रिकेट फैक्ट्री निरंतर ऐसे हीरे तराश रही है जो विश्व क्रिकेट पर राज करने के लिए तैयार हैं।