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श्रीगंगानगर में ‘स्मॉग’ का कहर: ‘सीवियर’ श्रेणी में पहुंचा AQI, सांसों पर मंडराया संकट

श्रीगंगानगर, 10 फरवरी 2026: राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में आज सुबह एक डरावनी स्थिति देखने को मिली। शहर की हवा में जहर इस कदर घुल गया है कि वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘सीवियर’ यानी ‘गंभीर’ श्रेणी को पार कर गया है। आज सुबह शहर का नजारा किसी पहाड़ी इलाके के धुंध जैसा नहीं, बल्कि जहरीले धुएं (स्मॉग) जैसा था, जिसने आम जनजीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है।

आंकड़ों की जुबानी: कितनी जहरीली है हवा?

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, आज श्रीगंगानगर में वायु प्रदूषण के स्तर ने पिछले कई हफ्तों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों की मात्रा खतरे के निशान से कहीं ऊपर है:

  • PM 2.5 का स्तर: 192 दर्ज किया गया।

  • PM 10 का स्तर: 237 तक पहुंच गया।

वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो PM 2.5 वे कण होते हैं जो हमारे फेफड़ों के सबसे गहरे हिस्सों तक पहुंचकर सीधे रक्त प्रवाह में मिल सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में श्रीगंगानगर की हवा में सांस लेना एक दिन में 8 से 9 सिगरेट पीने जितना घातक है। यह तुलना इस बात को स्पष्ट करती है कि यह समस्या केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी बन चुकी है।

प्रदूषण के मुख्य कारण

श्रीगंगानगर में इस गंभीर स्थिति के पीछे कई स्थानीय और भौगोलिक कारण बताए जा रहे हैं:

  1. तापमान में गिरावट: सर्दी के मौसम में भारी हवा और ‘इनवर्जन’ की स्थिति के कारण प्रदूषक तत्व सतह के पास ही जम जाते हैं, जिससे हवा साफ नहीं हो पाती।

  2. कृषि गतिविधियां: सीमावर्ती इलाका होने के कारण आसपास के क्षेत्रों में कृषि अवशेषों को जलाने की घटनाएं हवा को और अधिक दूषित कर रही हैं।

  3. निर्माण कार्य और धूल: शहर के भीतर चल रहे निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल भी PM 10 के स्तर को बढ़ा रही है।

स्वास्थ्य विभाग की चेतावनी और गाइडलाइन

बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है। जिला अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, पिछले दो दिनों में सांस की तकलीफ, आंखों में जलन और गले में संक्रमण के मरीजों की संख्या में 30% की बढ़ोतरी हुई है।

विभाग द्वारा जारी सलाह:

  • बुजुर्ग और बच्चे: फेफड़ों और हृदय रोगों से ग्रस्त लोग, बुजुर्ग और बच्चे पूरी तरह से घर के अंदर ही रहें।

  • आउटडोर एक्टिविटी: सुबह की सैर और बाहर व्यायाम करने से बचें, क्योंकि शारीरिक मेहनत के दौरान हम अधिक मात्रा में जहरीली हवा अंदर लेते हैं।

  • मास्क का अनिवार्य उपयोग: यदि बाहर निकलना बहुत जरूरी हो, तो साधारण मास्क के बजाय N-95 या N-99 मास्क का ही उपयोग करें।

  • खान-पान: शरीर को हाइड्रेटेड रखें और विटामिन-सी युक्त फलों का सेवन करें ताकि रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे।

प्रशासनिक कदम और भविष्य की चुनौती

नगर परिषद और जिला प्रशासन ने सड़कों पर पानी का छिड़काव करने के निर्देश दिए हैं ताकि उड़ती धूल को नियंत्रित किया जा सके। हालांकि, शहरवासियों का कहना है कि ये उपाय नाकाफी हैं। आने वाले दिनों में यदि हवा की गति नहीं बढ़ी, तो स्थिति और भी चिंताजनक हो सकती है।

यह ‘सीवियर’ AQI हमारे लिए एक वेक-अप कॉल है कि पर्यावरण संरक्षण अब केवल चर्चा का विषय नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व के लिए अनिवार्य शर्त बन गया है।

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