
नई दिल्ली। स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ और किफायती बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे लाखों परिवारों को बड़ी वित्तीय राहत देते हुए वित्त मंत्री ने कैंसर के उपचार में प्रयुक्त होने वाली 17 प्रमुख जीवन रक्षक दवाओं पर से ‘सीमा शुल्क’ (Customs Duty) को पूरी तरह हटाने की घोषणा की है। इस कदम से न केवल इलाज की लागत में भारी कमी आएगी, बल्कि उन्नत चिकित्सा तक आम आदमी की पहुंच भी सुनिश्चित होगी।
दवाओं के दाम में आएगी भारी गिरावट
अब तक विदेशों से आयात की जाने वाली कई कैंसर रोधी दवाएं अत्यधिक सीमा शुल्क के कारण आम जनता की पहुंच से बाहर थीं। सरकार ने विशेष रूप से Ribociclib, Brigatinib और Trastuzumab जैसी दवाओं को कर मुक्त किया है, जिनका उपयोग स्तन कैंसर और फेफड़ों के कैंसर के इलाज में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस छूट के बाद इन विशिष्ट दवाओं की कीमतों में 15% से 25% तक की गिरावट आ सकती है। कैंसर का इलाज अक्सर महीनों या वर्षों तक चलता है, ऐसे में यह कटौती मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए ‘संजीवनी’ से कम नहीं है।
दुर्लभ बीमारियों और एक्स-रे उपकरणों पर भी ध्यान
कैंसर के अलावा, सरकार ने ‘दुर्लभ बीमारियों’ (Rare Diseases) के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली विशिष्ट दवाओं और चिकित्सा सामग्रियों पर भी शुल्क कम किया है। इसके साथ ही, चिकित्सा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए देश में एक्स-रे ट्यूब और फ्लैट पैनल डिटेक्टरों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पर भी सीमा शुल्क में बदलाव किया गया है। इससे डायग्नोस्टिक सेवाएं (जांच) सस्ती होंगी।
जिला अस्पतालों का कायाकल्प: आधुनिक ट्रॉमा सेंटर
बजट 2026 केवल दवाओं को सस्ता करने तक सीमित नहीं है, बल्कि बुनियादी ढांचे के विकास पर भी केंद्रित है। सरकार का लक्ष्य है कि देश के प्रत्येक जिला अस्पताल में:
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आधुनिक ट्रॉमा सेंटर: सड़क दुर्घटनाओं या आपातकालीन स्थितियों में तुरंत उपचार के लिए अत्याधुनिक ट्रॉमा यूनिट्स स्थापित की जाएंगी।
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आपातकालीन सेवाएं: प्रत्येक जिले में 24/7 सक्रिय आपातकालीन वार्डों को अपग्रेड किया जाएगा ताकि गंभीर मरीजों को बड़े शहरों की ओर न भागना पड़े।
प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र का विस्तार
महंगी दवाओं पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने घोषणा की है कि प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों की संख्या को और बढ़ाया जाएगा। इन केंद्रों पर अब कैंसर रोधी जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता को भी अनिवार्य किया जा रहा है, जिससे गरीब मरीजों को ब्रांडेड दवाओं के महंगे विकल्प की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
निष्कर्ष: ‘स्वास्थ्य ही धन है’ का मंत्र
वित्त मंत्री ने अपने भाषण में जोर दिया कि “स्वास्थ्य देखभाल पर होने वाला खर्च किसी भी परिवार को गरीबी की रेखा के नीचे धकेलने का कारण नहीं बनना चाहिए।” बजट 2026 के ये प्रावधान दर्शाते हैं कि सरकार अब केवल अस्पताल बनाने पर ही नहीं, बल्कि उपचार की प्रक्रिया को किफायती और मानवीय बनाने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है।
कैंसर की दवाओं से सीमा शुल्क हटाना भारत को स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक ‘कल्याणकारी राज्य’ (Welfare State) के रूप में मजबूती से स्थापित करता है।