
श्रीगंगानगर। भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित राजस्थान का रणनीतिक जिला श्रीगंगानगर इन दिनों सुरक्षा के दोहरे मोर्चे पर डटा हुआ है। एक ओर जहाँ सीमा पार से होने वाली संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए बीएसएफ (BSF) और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा घेरा सख्त कर दिया है, वहीं दूसरी ओर जिला पुलिस ने ‘नशामुक्त श्रीगंगानगर’ अभियान के तहत अपराधियों और तस्करों की कमर तोड़ दी है। 8 जनवरी को जिले में सुरक्षा व्यवस्था और अपराध नियंत्रण को लेकर व्यापक स्तर पर सक्रियता देखी गई।
अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ‘हाई अलर्ट’
श्रीगंगानगर की भौगोलिक स्थिति इसे सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील बनाती है। सर्दियों के मौसम में घने कोहरे (Zero Visibility) का फायदा उठाकर सीमा पार से घुसपैठ और ड्रोन्स के जरिए मादक पदार्थों की तस्करी का खतरा बढ़ जाता है। 8 जनवरी को सीमा सुरक्षा बल ने ‘ऑपरेशन अलर्ट’ के तहत गश्त तेज कर दी।
सीमावर्ती गांवों में रहने वाले नागरिकों को भी सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत देने के निर्देश दिए गए हैं। आधुनिक निगरानी उपकरणों और थर्मल इमेजरी कैमरों की मदद से 24 घंटे बॉर्डर की निगरानी की जा रही है ताकि दुश्मन की किसी भी नापाक हरकत को समय रहते नाकाम किया जा सके।
नशे के खिलाफ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
सीमा सुरक्षा के साथ-साथ श्रीगंगानगर पुलिस ने जिले के भीतर नशे के सौदागरों के खिलाफ अपना शिकंजा कस दिया है। 8 जनवरी को पुलिस ने विभिन्न थाना क्षेत्रों में छापेमारी कर भारी मात्रा में डोडा पोस्त, अवैध अफीम और नशीली गोलियां बरामद कीं।
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तस्करों की गिरफ्तारी: पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान पंजाब और हरियाणा की सीमाओं से सटे इलाकों में विशेष चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान दो प्रमुख तस्करों को गिरफ्तार किया गया जो निजी वाहनों में छुपाकर नशीले पदार्थ ले जा रहे थे।
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हॉटस्पॉट्स पर निगरानी: जिले के उन इलाकों को चिन्हित किया गया है जहाँ नशे की खपत और बिक्री अधिक है। पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में सादा वर्दी में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है ताकि सप्लाई चेन को जड़ से खत्म किया जा सके।
अपराध पर लगाम और कानून व्यवस्था
श्रीगंगानगर पुलिस केवल नशे के खिलाफ ही नहीं, बल्कि संगठित अपराध और अवैध हथियारों के विरुद्ध भी सख्त नजर आ रही है। पुलिस द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत वांटेड अपराधियों की धरपकड़ की जा रही है। शहर के मुख्य चौराहों और बाजारों में पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई गई है ताकि आम नागरिकों में सुरक्षा का भाव पैदा हो और अपराधियों में कानून का खौफ रहे।
जन-सहभागिता: युवाओं को बचाने की मुहिम
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नशे और अपराध के खिलाफ यह लड़ाई केवल पुलिस की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है। शिक्षण संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत किया जा रहा है। खेल और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय क्लबों के साथ मिलकर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
निष्कर्ष
श्रीगंगानगर में सुरक्षा की यह मुस्तैदी दर्शाती है कि देश की सीमाओं की रक्षा और आंतरिक शांति बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। 8 जनवरी की ये कार्रवाइयां अपराधियों के लिए एक स्पष्ट संदेश हैं कि सीमावर्ती जिले में कानून तोड़ने वालों के लिए कोई जगह नहीं है।