
श्रीगंगानगर। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। राजस्थान के “अन्न कटोरे” कहे जाने वाले जिले श्रीगंगानगर में तापमान में आई भारी गिरावट और भीषण शीतलहर (Cold Wave) को देखते हुए जिला प्रशासन ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़े कदम उठाए हैं। 8 जनवरी को प्रशासन ने कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों के लिए पूर्ण अवकाश की घोषणा की, जो गिरते पारे के बीच अभिभावकों और विद्यार्थियों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आई।
कड़ाके की ठंड और ‘ऑरेंज अलर्ट’
जनवरी का महीना श्रीगंगानगर के लिए हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहता है, लेकिन इस वर्ष शीतलहर का प्रभाव उम्मीद से कहीं अधिक देखा गया। मौसम विभाग द्वारा जारी ‘ऑरेंज अलर्ट’ के बीच जिले में सुबह का दृश्य घने कोहरे की चादर से ढका रहा। दृश्यता (Visibility) 50 मीटर से भी कम रह गई, जिससे सड़कों पर वाहनों की आवाजाही तो प्रभावित हुई ही, साथ ही सुबह जल्दी स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ गए।
प्रशासन का निर्णय: बच्चों की सेहत सर्वोपरि
जिला कलेक्टर और शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार, छोटे बच्चों की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रारंभिक शिक्षा (कक्षा 1 से 8) के लिए अवकाश घोषित किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक ठंड से बच्चों में श्वसन संबंधी समस्याएं, हाइपोथर्मिया और वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह आदेश जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा।
उच्च कक्षाओं के लिए समय में बदलाव
जहाँ छोटे बच्चों के लिए स्कूल बंद रखे गए, वहीं कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई का नुकसान न हो, इसके लिए बीच का रास्ता निकाला गया। प्रशासन ने इन कक्षाओं के समय में परिवर्तन कर सुबह 10:30 बजे से स्कूल शुरू करने के निर्देश दिए। समय बदलने का मुख्य उद्देश्य यह था कि छात्र उस समय घर से निकलें जब कोहरा थोड़ा छंट चुका हो और धूप निकलने से तापमान में मामूली बढ़ोतरी हो जाए।
अभिभावकों और शिक्षकों की प्रतिक्रिया
प्रशासन के इस निर्णय का अभिभावकों ने स्वागत किया है। स्थानीय निवासी और अभिभावक संघों का कहना है कि सुबह 7:00 या 8:00 बजे कड़ाके की ठंड में बच्चों को तैयार करना और उन्हें स्कूल भेजना एक बड़ी चुनौती थी। शिक्षकों ने भी माना कि ठिठुरते हुए बच्चे पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते, ऐसे में समय परिवर्तन या अवकाश ही एकमात्र विकल्प था।
खेती और पशुपालन पर प्रभाव
केवल स्कूल ही नहीं, बल्कि श्रीगंगानगर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ ‘कृषि’ पर भी इस पाले (Frost) का असर देखा जा रहा है। सरसों और चने की फसल को बचाने के लिए किसान खेतों में धुआं कर रहे हैं। प्रशासन ने किसानों को भी सलाह दी है कि वे पाले से बचाव के लिए हल्की सिंचाई करें।
निष्कर्ष और आगामी सावधानी
मौसम विभाग के अनुसार, आगामी कुछ दिनों तक सर्दी का यह सितम जारी रह सकता है। प्रशासन लगातार मौसम की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें और गर्म कपड़ों का उचित उपयोग करें। स्कूलों के खुलने या छुट्टियों के विस्तार के संबंध में आगामी आदेश मौसम की स्थिति को देखते हुए जारी किए जाएंगे।