
श्रीगंगानगर। राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर से साइबर अपराध का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया है। तकनीकी रूप से जागरूक माने जाने वाले बैंकिंग क्षेत्र के एक सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) अधिकारी को शातिर ठगों ने अपनी बातों के जाल में फंसाकर 25 लाख रुपये का चूना लगा दिया। यह घटना न केवल वित्तीय नुकसान की कहानी है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि साइबर अपराधी किस तरह मनोवैज्ञानिक दबाव और डर का उपयोग कर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं।
घटना का घटनाक्रम: कैसे बुना गया जाल?
पीड़ित की पहचान श्रीगंगानगर निवासी परमजीत सिंह तनेजा के रूप में हुई है, जो पंजाब नेशनल बैंक (PNB) से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। घटना की शुरुआत एक अनजान व्हाट्सएप वीडियो कॉल से हुई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को मुंबई पुलिस और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का वरिष्ठ अधिकारी बताया।
ठगों ने तनेजा को बताया कि उनके नाम से जारी एक बैंक खाते का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) और आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया गया है। उन्होंने तनेजा पर दबाव बनाने के लिए कुछ फर्जी दस्तावेज और वारंट भी दिखाए, जो देखने में बिल्कुल असली लग रहे थे।
‘डिजिटल अरेस्ट’ और मनोवैज्ञानिक दबाव
इस ठगी की सबसे खतरनाक कड़ी ‘डिजिटल अरेस्ट’ रही। ठगों ने परमजीत सिंह को चेतावनी दी कि वे कैमरे के सामने से नहीं हट सकते और न ही इस बारे में किसी को बता सकते हैं। उन्हें डराया गया कि यदि उन्होंने फोन काटा या किसी को सूचित किया, तो उनके पूरे परिवार को जेल में डाल दिया जाएगा और उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज होगा।
सेवानिवृत्त अधिकारी, जो सामान्यतः कानून का पालन करने वाले नागरिक हैं, इस अचानक आए संकट और ‘पुलिस’ की वर्दी पहने लोगों को देखकर घबरा गए। अपराधियों ने उनके मानसिक तनाव का फायदा उठाते हुए उन्हें ‘जांच के नाम पर’ अपने जीवन की पूरी जमापूंजी एक सुरक्षित खाते (जो वास्तव में ठगों का खाता था) में स्थानांतरित करने के लिए मजबूर कर दिया।
लाखों की ठगी और अहसास
डर के मारे परमजीत सिंह ने किस्तों में कुल 25 लाख रुपये ठगों द्वारा बताए गए खातों में ट्रांसफर कर दिए। ठगों ने भरोसा दिलाया था कि जांच पूरी होने के बाद यह पैसा वापस लौटा दिया जाएगा। हालांकि, जैसे ही पैसे ट्रांसफर हुए, ठगों ने संपर्क तोड़ दिया और फोन बंद कर लिया। काफी समय बीत जाने और कोई जवाब न मिलने पर तनेजा को ठगी का एहसास हुआ। उन्होंने तुरंत अपने परिजनों को इसकी जानकारी दी और पुलिस से संपर्क किया।
पुलिस की कार्रवाई और चेतावनी
श्रीगंगानगर पुलिस ने साइबर क्राइम की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस की विशेष टीम (Cyber Cell) उन बैंक खातों और फोन नंबरों को ट्रेस कर रही है जिनका उपयोग इस वारदात में किया गया।
पुलिस प्रशासन ने नागरिकों को आगाह किया है कि:
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कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती है।
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CBI, पुलिस या ED कभी भी फोन पर आपसे पैसे ट्रांसफर करने की मांग नहीं करती।
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यदि कोई आपको इस तरह डराने की कोशिश करे, तो तुरंत फोन काटें और स्थानीय पुलिस या 1930 (साइबर हेल्पलाइन) पर कॉल करें।
नोट: यह घटना हमें याद दिलाती है कि सतर्कता ही बचाव है। अपराधी आपकी घबराहट का फायदा उठाते हैं, इसलिए किसी भी अनजान कॉल पर विश्वास करने से पहले उसकी पुष्टि जरूर करें।