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श्रीगंगानगर में कड़ाके की ठंड: स्कूलों में अवकाश और जनजीवन पर प्रभाव

श्रीगंगानगर में जनवरी की शुरुआत के साथ ही मौसम के मिजाज में जबरदस्त बदलाव देखने को मिला है। समूचे उत्तर भारत के साथ-साथ सीमावर्ती जिला श्रीगंगानगर इन दिनों भीषण शीतलहर और घने कोहरे की चपेट में है। वर्तमान परिस्थितियों और बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए जिला प्रशासन ने 6 जनवरी से स्कूलों में अवकाश की घोषणा की है।


प्रशासन का निर्णय और अवकाश की रूपरेखा

6 जनवरी को जिला कलेक्टर द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, जिले के सभी राजकीय और निजी विद्यालयों में नर्सरी से कक्षा 5 तक के विद्यार्थियों के लिए 12 जनवरी तक का अवकाश घोषित किया गया है। यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि सुबह के समय तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है, जो छोटे बच्चों के लिए स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा कर सकती है।

वहीँ, कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल पूरी तरह बंद नहीं किए गए हैं, लेकिन उनके समय में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब ये कक्षाएं सुबह 10:30 बजे से पहले शुरू नहीं होंगी, ताकि छात्र घने कोहरे और सुबह की कड़ाके की ठंड से बच सकें।


मौसम की स्थिति: हाड़ कंपाने वाली ठंड

श्रीगंगानगर अपनी विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण गर्मियों में जितना तपता है, सर्दियों में उतना ही ठंडा रहता है। 6 जनवरी के आसपास न्यूनतम तापमान 2°C से 4°C के बीच झूल रहा है। कोहरे की स्थिति ऐसी है कि दृश्यता (Visibility) शून्य से 50 मीटर तक रह गई है, जिससे न केवल स्कूली बच्चे बल्कि आम नागरिक भी प्रभावित हो रहे हैं।

ठंड का जनजीवन पर असर

  1. यातायात में बाधा: घने कोहरे के कारण श्रीगंगानगर से बीकानेर और हनुमानगढ़ जाने वाले राजमार्गों पर वाहनों की रफ्तार थम गई है। ट्रेनें अपने निर्धारित समय से कई घंटे देरी से चल रही हैं।

  2. बाजारों की रौनक गायब: अत्यधिक ठंड की वजह से बाजारों में सन्नाटा पसरा है। लोग केवल जरूरी काम के लिए ही घरों से बाहर निकल रहे हैं।

  3. स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं: अस्पतालों में सर्दी, जुकाम, अस्थमा और हृदय रोग से संबंधित मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है। डॉक्टरों ने विशेष रूप से बुजुर्गों और बच्चों को गर्म कपड़ों में रहने और गुनगुना पानी पीने की सलाह दी है।


किसानों के लिए चुनौतियां

श्रीगंगानगर एक कृषि प्रधान जिला है। यहाँ के किसानों के लिए यह ठंड दोहरी मार लेकर आई है। एक ओर कोहरा और नमी सरसों और गेहूं की फसल के लिए फायदेमंद मानी जाती है, वहीं दूसरी ओर यदि पाला (Frost) गिरता है, तो फसलों के बर्बाद होने का खतरा बढ़ जाता है। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे पाले से बचाव के लिए खेतों की मेड़ों पर धुआं करें या हल्की सिंचाई करें।

निष्कर्ष

प्रशासन का यह कदम सराहनीय है क्योंकि सुरक्षा ही बचाव है। ठंड के इस मौसम में सावधानी बरतनी अनिवार्य है। अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे अवकाश के दौरान बच्चों की पढ़ाई का ध्यान घर पर ही रखें और उन्हें ठंड से बचाकर रखें। मौसम विभाग की मानें तो आने वाले एक हफ्ते तक राहत के आसार कम हैं।

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