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स्वास्थ्य क्रांति: ग्रेटर नोएडा में खुला देश का पहला ‘AI क्लीनिक’, अब मशीनी बुद्धिमत्ता करेगी सटीक इलाज

ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के ‘डिजिटल हेल्थ’ मिशन को आगे बढ़ाते हुए, नए साल 2026 की शुरुआत में ग्रेटर नोएडा स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (GIMS) ने एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। संस्थान में देश के पहले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्लीनिक का औपचारिक उद्घाटन किया गया है। यह क्लीनिक न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे भारत के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण का एक रोल मॉडल बनकर उभरा है।

चिकित्सा में AI की भूमिका: डॉक्टर का ‘स्मार्ट’ सहायक

यह क्लीनिक पारंपरिक अस्पतालों से बिल्कुल अलग है। यहाँ मरीजों के इलाज की प्रक्रिया में डॉक्टरों के साथ-साथ शक्तिशाली AI एल्गोरिदम काम करते हैं।

  • सटीक डायग्नोसिस: अक्सर इंसानी नजरों से एक्स-रे या एमआरआई स्कैन में बहुत सूक्ष्म बदलाव छूट सकते हैं, लेकिन एआई सॉफ्टवेयर उन बारीक संकेतों को भी पकड़ लेता है जो भविष्य में किसी गंभीर बीमारी का रूप ले सकते हैं।

  • त्वरित निर्णय: यह तकनीक मरीजों के पुराने मेडिकल रिकॉर्ड, जीवनशैली और आनुवंशिक डेटा का विश्लेषण करके कुछ ही सेकंड में संभावित बीमारी की रिपोर्ट तैयार कर देती है।


कैंसर और हृदय रोगों का ‘अर्ली डिटेक्शन’

जिम्स (GIMS) के निदेशक के अनुसार, इस एआई क्लीनिक का प्राथमिक ध्यान कैंसर, हृदय रोग और न्यूरोलॉजिकल विकारों पर है।

  1. कैंसर स्क्रीनिंग: एआई तकनीक बायोप्सी और इमेजिंग रिपोर्ट को स्कैन कर यह बता सकती है कि ट्यूमर घातक है या नहीं, वह भी शुरुआती चरण में जब इलाज सबसे अधिक प्रभावी होता है।

  2. कार्डियोलॉजी: हृदय रोगियों के लिए, एआई क्लीनिक उनके ईसीजी (ECG) पैटर्न का विश्लेषण कर यह अनुमान लगा सकता है कि अगले कुछ घंटों या दिनों में हार्ट अटैक आने की कितनी संभावना है। इससे ‘प्रिवेंटिव केयर’ यानी बचाव आधारित इलाज संभव हो पाएगा।

कैसे काम करेगा यह क्लीनिक?

जब कोई मरीज इस क्लीनिक में आता है, तो उसकी प्राथमिक जांच (Blood pressure, Pulse, Symptoms) एआई-इनेबल्ड डिवाइस द्वारा की जाती है। यह डेटा सीधे डॉक्टर के डैशबोर्ड पर पहुंचता है। डॉक्टर एआई द्वारा सुझाए गए संभावित उपचारों और जोखिमों की समीक्षा करते हैं। अंतिम निर्णय डॉक्टर का ही होता है, लेकिन एआई उसे एक पुख्ता और डेटा-आधारित आधार प्रदान करता है। इससे ‘मिस-डायग्नोसिस’ (गलत पहचान) की संभावना लगभग शून्य हो जाती है।


आम जनता को क्या लाभ होगा?

  • समय की बचत: लंबी कतारों और रिपोर्ट के इंतजार में लगने वाले समय में भारी कमी आएगी।

  • सस्ता इलाज: बीमारी का शुरुआती चरण में पता चलने से इलाज का खर्च कम हो जाता है, क्योंकि जटिल सर्जरी या कीमोथेरेपी की नौबत कम आती है।

  • डेटा सुरक्षा: संस्थान ने आश्वासन दिया है कि मरीजों का स्वास्थ्य डेटा पूरी तरह सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड होगा।

भविष्य की राह

उत्तर प्रदेश सरकार की योजना है कि इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेजों, जैसे केजीएमयू लखनऊ और बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में भी ऐसे ही एआई क्लीनिक खोले जाएं। यह भारत को वैश्विक ‘हेल्थ-टेक’ मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

निष्कर्ष: ग्रेटर नोएडा का यह एआई क्लीनिक भविष्य के अस्पतालों की एक झलक है। जहाँ तकनीक और मानवीय संवेदनाएं मिलकर काम करेंगी, वहां स्वास्थ्य सेवाएं न केवल अधिक कुशल होंगी, बल्कि हर नागरिक की पहुंच में भी होंगी।

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