
श्रीगंगानगर। राजस्थान का उत्तरी जिला, श्रीगंगानगर, अपनी चरम मौसमी परिस्थितियों के लिए जाना जाता है। जहाँ गर्मियों में यहाँ का पारा 50 डिग्री सेल्सियस को छूने लगता है, वहीं सर्दियों में यहाँ की हाड़ कंपा देने वाली ठंड जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर देती है। हाल ही में जिले में जारी शीतलहर (Cold Wave) और गिरते तापमान को देखते हुए जिला प्रशासन ने एक अत्यंत संवेदनशील और सराहनीय निर्णय लिया है।
जिला कलेक्टर ने आदेश जारी करते हुए जिले के समस्त आंगनबाड़ी केंद्रों में 2 जनवरी से 10 जनवरी 2026 तक अवकाश घोषित कर दिया है। यह निर्णय मुख्य रूप से उन छोटे बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर लिया गया है जो प्रतिदिन इन केंद्रों पर पोषण और प्रारंभिक शिक्षा के लिए आते हैं।
निर्णय की पृष्ठभूमि और आवश्यकता
दिसंबर के अंतिम सप्ताह से ही संपूर्ण उत्तर भारत सहित राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में घने कोहरे और बर्फीली हवाओं का दौर शुरू हो गया था। 31 दिसंबर को हुई हल्की मावट (शीतकालीन वर्षा) ने वातावरण में नमी बढ़ा दी, जिससे ‘कनकनी’ वाली ठंड का अहसास होने लगा।
न्यूनतम तापमान 3 से 5 डिग्री सेल्सियस के बीच झूल रहा है। ऐसी स्थिति में, सुबह के समय छोटे बच्चों का घरों से बाहर निकलना उनके स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता था। शीतलहर के कारण बच्चों में निमोनिया, सर्दी-जुकाम और वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। चूँकि आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चे अक्सर 3 से 6 वर्ष की आयु के होते हैं, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) वयस्कों की तुलना में कम होती है।
प्रशासन का रुख और आदेश का प्रभाव
जिला कलेक्टर ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यह अवकाश केवल बच्चों के लिए है। हालांकि, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं इस दौरान केंद्र से संबंधित अपने प्रशासनिक और रिपोर्टिंग कार्यों को पूरा करेंगी, लेकिन बच्चों की उपस्थिति अनिवार्य नहीं होगी।
प्रशासन का मानना है कि शिक्षा और पोषण आवश्यक है, लेकिन जीवन की सुरक्षा सर्वोपरि है। 10 जनवरी तक की इस राहत से अभिभावकों ने भी संतोष व्यक्त किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में, जहाँ आवागमन के साधन सीमित हैं, बच्चों को कड़कड़ाती ठंड में केंद्र तक ले जाना एक बड़ी चुनौती थी।
स्थानीय जनजीवन पर ठंड का असर
श्रीगंगानगर में वर्तमान में ‘ऑरेंज अलर्ट’ की स्थिति है। दृश्यता (Visibility) शून्य से 50 मीटर तक रह जाने के कारण सड़कों पर वाहनों की रफ्तार थम गई है। कोहरे के साथ-साथ ओस की बूंदें पाले (Frost) का रूप ले रही हैं, जो न केवल इंसानों बल्कि फसलों के लिए भी चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों के समय में बदलाव या छुट्टियों का निर्णय एक आवश्यक निवारक कदम है।
आगे की राह
मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले एक सप्ताह तक मौसम के मिजाज में बड़े बदलाव की उम्मीद कम है। यदि 10 जनवरी के बाद भी तापमान में सुधार नहीं होता है, तो प्रशासन इस अवकाश को आगे बढ़ाने पर विचार कर सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों को सलाह दी है कि वे बच्चों और बुजुर्गों को गर्म कपड़ों में रखें और अनावश्यक रूप से सुबह-शाम बाहर न निकलें।
निष्कर्ष: प्रशासन का यह निर्णय दर्शाता है कि सरकारी तंत्र स्थानीय परिस्थितियों के प्रति सजग है। 2 से 10 जनवरी तक का यह अवकाश न केवल बच्चों को शारीरिक कष्ट से बचाएगा, बल्कि मौसमी बीमारियों के प्रसार को रोकने में भी सहायक सिद्ध होगा।