
न्यूयॉर्क/नई दिल्ली। मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में वैश्विक स्तर पर एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित हुआ है। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने वयस्क रोगियों में मध्यम से गंभीर मेजर डिपरेशिव डिसऑर्डर (MDD) के इलाज के लिए दुनिया के पहले ‘एट-होम’ (घर पर उपयोग होने वाले) ट्रांसक्रानियल डायरेक्ट करंट स्टिमुलेशन (tDCS) डिवाइस को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। यह निर्णय उन करोड़ों लोगों के लिए आशा की नई किरण लेकर आया है जो पारंपरिक दवाओं के दुष्प्रभावों से बचना चाहते हैं।
क्या है यह डिवाइस और यह कैसे काम करता है?
यह डिवाइस देखने में किसी साधारण वायरलेस हेडसेट या स्पोर्ट्स हेडबैंड जैसा लगता है। तकनीकी रूप से इसे tDCS कहा जाता है।
इसकी कार्यप्रणाली काफी अनूठी है:
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मस्तिष्क उत्तेजना: यह हेडसेट माथे पर लगाए गए इलेक्ट्रोड के माध्यम से मस्तिष्क के डॉर्सोलेटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (DLPFC) क्षेत्र को बहुत कम तीव्रता का विद्युत प्रवाह भेजता है।
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न्यूरोनल गतिविधि: डिप्रेशन के रोगियों में मस्तिष्क का यह हिस्सा अक्सर कम सक्रिय (Underactive) होता है, जो भावनाओं और निर्णय लेने की क्षमता को नियंत्रित करता है। यह डिवाइस इस हिस्से की न्यूरॉन गतिविधि को उत्तेजित कर उसे सामान्य स्तर पर लाने में मदद करता है।
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गैर-आक्रामक (Non-invasive): इसमें किसी सर्जरी या सुई की आवश्यकता नहीं होती। मरीज इसे पहनकर घर पर आराम से बैठ सकता है, पढ़ सकता है या टीवी देख सकता है।
पारंपरिक दवाओं (Antidepressants) का विकल्प
अबतक डिप्रेशन के इलाज के लिए मुख्य रूप से एंटी-डिप्रेसेंट दवाओं का सहारा लिया जाता रहा है। हालांकि ये दवाएं प्रभावी हैं, लेकिन इनके कई दुष्प्रभाव जैसे वजन बढ़ना, अनिद्रा और भावनात्मक शून्यता (Emotional Numbness) देखे जाते हैं।
यह नया डिवाइस एक ‘ड्रग-फ्री’ विकल्प प्रदान करता है। इसे दवाओं के साथ या अकेले भी उपयोग किया जा सकता है। नैदानिक परीक्षणों (Clinical Trials) में पाया गया कि 10 सप्ताह तक नियमित उपयोग करने पर लगभग 50% से अधिक रोगियों में डिप्रेशन के लक्षणों में उल्लेखनीय कमी आई और कई मरीजों में यह पूरी तरह ठीक (Remission) हो गया।
घर पर उपयोग की सुरक्षा और सुविधा
इससे पहले इस तरह की ‘ब्रेन स्टिमुलेशन’ तकनीक केवल बड़े अस्पतालों और क्लीनिकों में उपलब्ध थी, जो काफी महंगी और समय लेने वाली थी। FDA की मंजूरी मिलने के बाद, अब:
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पहुंच: मरीज डॉक्टर के परामर्श के बाद इसे घर ले जा सकते हैं।
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डिजिटल निगरानी: यह डिवाइस अक्सर एक मोबाइल ऐप से जुड़ा होता है, जो उपचार की प्रगति को ट्रैक करता है और डेटा को डॉक्टर के साथ साझा करता है।
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सत्र की अवधि: आमतौर पर दिन में 20 से 30 मिनट का एक सत्र पर्याप्त होता है।
भविष्य की राह और चुनौतियां
हालांकि यह एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह ‘जादुई छड़ी’ नहीं है। इसे केवल डॉक्टर की देखरेख में ही उपयोग किया जाना चाहिए। भारत जैसे देशों में, जहाँ मानसिक स्वास्थ्य को लेकर अभी भी सामाजिक वर्जनाएं (Taboos) हैं, इस तरह की तकनीक के आने से लोग इलाज के लिए अधिक प्रेरित हो सकते हैं क्योंकि यह निजी और सुविधाजनक है।
निष्कर्ष
मानसिक स्वास्थ्य अब केवल बातचीत और दवाओं तक सीमित नहीं रह गया है। ‘एट-होम’ tDCS डिवाइस की मंजूरी यह दर्शाती है कि भविष्य में ‘डिजिटल थेरेप्यूटिक्स’ चिकित्सा पद्धति का एक अनिवार्य हिस्सा होंगे। यह उन लाखों लोगों के लिए जीवन बदलने वाला साबित हो सकता है जो वर्षों से डिप्रेशन के अंधेरे में जी रहे हैं।