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पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस का साया: दो नर्सों में पुष्टि के बाद हाई अलर्ट

कोलकाता/बारासात। भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में आज एक चिंताजनक खबर सामने आई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने संयुक्त रूप से पुष्टि की है कि पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में निपाह वायरस (NiV) ने दस्तक दे दी है। जिले के बारासात स्थित एक निजी अस्पताल में कार्यरत दो नर्सों के नमूनों में इस घातक वायरस की पुष्टि हुई है। इस खबर के बाद से राज्य के स्वास्थ्य विभाग और केंद्र सरकार ने प्रभावित इलाकों में कड़े प्रोटोकॉल लागू कर दिए हैं।

कैसे हुई पहचान और वर्तमान स्थिति

बताया जा रहा है कि दोनों संक्रमित नर्सें पिछले कुछ दिनों से तेज बुखार, सिरदर्द और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षणों से जूझ रही थीं। शुरुआती जांच में जब उनकी स्थिति बिगड़ने लगी, तो उनके नमूने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) भेजे गए, जहाँ रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

वर्तमान में दोनों नर्सों को आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है और उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए अब तक लगभग 200 ऐसे लोगों की पहचान की है जो इन नर्सों के सीधे संपर्क में आए थे। इन सभी ‘कॉन्टैक्ट्स’ को निगरानी में रखा गया है और उनके लक्षणों पर नजर रखी जा रही है।

क्या है निपाह वायरस?

निपाह एक ज़ूनोटिक वायरस है, जो जानवरों (मुख्य रूप से फलों खाने वाले चमगादड़ या ‘फ्रूट बैट्स’) से इंसानों में फैलता है। यह दूषित भोजन के माध्यम से या संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से भी फैल सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, निपाह वायरस की मृत्यु दर (Fatality Rate) काफी अधिक है, जो 40% से 75% तक हो सकती है, जिससे यह बेहद खतरनाक माना जाता है।

प्रशासन और पड़ोसी राज्यों की तैयारी

पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रभावित जिले में ‘कंटेनमेंट जोन’ बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। साथ ही, निम्न कदम उठाए गए हैं:

  • एयरपोर्ट स्क्रीनिंग: कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे सहित देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग दोबारा शुरू कर दी गई है।

  • पड़ोसी राज्यों का अलर्ट: ओडिशा, बिहार और असम जैसे राज्यों ने अपने सीमावर्ती जिलों में अलर्ट जारी किया है।

  • अस्पतालों को निर्देश: सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि कोई मरीज एन्सेफलाइटिस (दिमाग में सूजन) या तीव्र श्वसन संकट के लक्षणों के साथ आता है, तो तुरंत इसकी सूचना दी जाए।

बचाव के उपाय और जागरूकता

विशेषज्ञों ने जनता को घबराने के बजाय सतर्क रहने की सलाह दी है। बचाव के लिए कुछ प्रमुख सावधानियां:

  1. जमीन पर गिरे हुए फलों (विशेषकर वे जिन्हें पक्षियों या चमगादड़ों ने कुतरा हो) को न खाएं।

  2. ताजे खजूर का रस पीने से बचें, क्योंकि चमगादड़ अक्सर इसे दूषित कर देते हैं।

  3. संक्रमित व्यक्ति के करीब जाते समय मास्क और दस्ताने पहनें और नियमित रूप से हाथ धोएं।

निष्कर्ष

हालांकि प्रशासन का दावा है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन निपाह जैसे खतरनाक वायरस की मौजूदगी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। 2018 में केरल में हुए इसके प्रकोप ने पहले ही देश को इसकी गंभीरता का अहसास करा दिया था। वर्तमान में, पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग की त्वरित प्रतिक्रिया और व्यापक कांटेक्ट ट्रेसिंग ही इस वायरस को फैलने से रोकने की कुंजी है।

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