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श्रीगंगानगर: ‘किन्नू महाकुंभ’ का भव्य समापन—सफलता, चुनौतियां और भविष्य की राह

श्रीगंगानगर के सूरतगढ़ बाईपास पर आयोजित तीन दिवसीय ‘किन्नू महाकुंभ’ का आज, 25 जनवरी 2026, को औपचारिक समापन हो गया। इस राज्य स्तरीय उत्सव ने न केवल मरूधरा के इस “कैलिफोर्निया” कहे जाने वाले जिले की मिठास को प्रदर्शित किया, बल्कि उन कड़वी सच्चाइयों को भी उजागर किया जिनसे यहाँ का बागवान पिछले कुछ समय से जूझ रहा है।


उत्सव का मुख्य उद्देश्य: वैश्विक पहचान की ओर कदम

श्रीगंगानगर का किन्नू अपनी विशेष चमक, पतले छिलके और संतुलित खटास-मिठास के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। इस महाकुंभ का आयोजन मुख्य रूप से दो उद्देश्यों के साथ किया गया था:

  1. ब्रांडिंग: ‘गंगानगरी किन्नू’ को एक वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित करना ताकि खाड़ी देशों और यूरोपीय बाजारों में इसकी मांग बढ़ सके।

  2. तकनीकी हस्तांतरण: इजराइली खेती की तकनीक, ड्रिप इरिगेशन और अत्याधुनिक ग्रेडिंग मशीनों से किसानों को रूबरू कराना।

मेले के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने सेमिनार आयोजित किए, जिसमें मिट्टी के स्वास्थ्य और ‘फ्रूट फ्लाई’ जैसी बीमारियों से बचाव के वैज्ञानिक तरीकों पर चर्चा की गई।


किसानों की दोहरी मार: गिरते दाम और पानी का संकट

जहाँ एक ओर मेले में आधुनिकता की चमक थी, वहीं दूसरी ओर मंच के पीछे किसानों का दर्द भी सुनाई दिया। समापन समारोह के दौरान कई स्थानीय किसान संगठनों ने सरकार और प्रशासन के सामने अपनी प्रमुख चिंताएं रखीं:

  • बाजार भाव में गिरावट: इस सीजन में किन्नू के दामों में भारी गिरावट देखी गई है। किसानों का कहना है कि लागत मूल्य बढ़ रहा है, जबकि मंडियों में उन्हें उचित दाम नहीं मिल रहे। व्यापारियों के सिंडिकेट और कोल्ड स्टोरेज की कमी को इसका मुख्य कारण बताया गया।

  • सिंचाई पानी की किल्लत: इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) और गंगनहर में समय पर पानी की उपलब्धता न होने से बाग सूखने की कगार पर हैं। किसानों ने मांग की है कि फलदार पौधों को बचाने के लिए विशेष ‘पीने और बागवानी’ पानी का कोटा निर्धारित किया जाए।

एक प्रगतिशील किसान के अनुसार: “महोत्सवों से पहचान तो मिलती है, लेकिन जब तक हमारे खेत में पानी नहीं होगा और हाथ में सही दाम नहीं आएगा, तब तक ये आयोजन केवल औपचारिकता बनकर रह जाएंगे।”


प्रदर्शनी और नवाचार के आकर्षण

समापन दिवस पर आयोजित प्रदर्शनी में सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र ‘वेस्ट-टू-वेल्थ’ मॉडल रहा, जिसमें किन्नू के छिलकों से आवश्यक तेल (Essential Oils) और जैविक खाद बनाने की विधि दिखाई गई। इसके अलावा:

  • उत्कृष्ट बागवान पुरस्कार: जिले के उन 15 बागवानों को सम्मानित किया गया जिन्होंने इस वर्ष प्रति एकड़ सर्वाधिक पैदावार ली है।

  • प्रोसेसिंग यूनिट्स: मेले में उद्यमियों ने जूस और जैम की नई इकाइयां लगाने के प्रस्ताव रखे, जो भविष्य में स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं।


आगे की राह: क्या होगा बदलाव?

‘किन्नू महाकुंभ’ के समापन पर प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि किसानों की मांगों को राज्य सरकार तक पहुँचाया जाएगा। आने वाले समय में जिले में ‘किन्नू बोर्ड’ के गठन की चर्चा भी जोरों पर है, जो सीधे तौर पर निर्यात और विपणन (Marketing) की निगरानी करेगा।

इस तीन दिवसीय आयोजन ने यह साफ कर दिया है कि श्रीगंगानगर का किसान नई तकनीक को अपनाने के लिए तैयार है, बशर्ते उसे मूलभूत सुविधाएं और लाभकारी मूल्य की गारंटी मिले।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️