
श्रीगंगानगर। राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में बुधवार को न्याय के मंदिर कहे जाने वाले न्यायालय परिसर के बाहर उस समय सनसनी फैल गई, जब सरेआम दो पक्षों के बीच जमकर लात-घूसे चले। पुराने राजकीय चिकित्सालय परिसर में स्थित NDPS (मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम) न्यायालय के बाहर हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और वकीलों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विवाद की शुरुआत और तीखी बहस
मिली जानकारी के अनुसार, विवाद की जड़ एक पुराने मामले की पैरवी और आपसी रंजिश बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि पूर्व उपमंत्री जगतार सिंह कंग के भाई करतार सिंह कंग और एक स्थानीय अधिवक्ता के बीच किसी बात को लेकर बहस शुरू हुई। देखते ही देखते शब्दों की मर्यादा टूट गई और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर चिल्लाने लगे। मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन आक्रोश इतना अधिक था कि विवाद धक्का-मुक्की और फिर हाथापाई में बदल गया।
हाथापाई और गहमागहमी का माहौल
न्यायालय जैसी संवेदनशील जगह पर सरेआम मारपीट देख वहां मौजूद अन्य अधिवक्ता, मुंशी और वादकारी हतप्रभ रह गए। मारपीट के दौरान न्यायालय परिसर के बाहर काफी भीड़ जमा हो गई, जिससे कामकाज भी कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ। घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ वकील और पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे।
करतार सिंह कंग, जो एक रसूखदार परिवार से ताल्लुक रखते हैं, और अधिवक्ता पक्ष के बीच हुई इस भिड़ंत ने सांप्रदायिक और राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा छेड़ दी है। मारपीट के दौरान दोनों पक्षों को चोटें आने की भी खबर है।
पुलिस की कार्रवाई और सुरक्षा पर सवाल
हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस थाना की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत करवाया और उन्हें थाने ले जाकर बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की। बार एसोसिएशन के सदस्यों ने इस घटना पर कड़ा रोष व्यक्त किया है। वकीलों का कहना है कि यदि न्यायालय परिसर के भीतर ही अधिवक्ता सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो वे निर्भीक होकर पैरवी कैसे कर पाएंगे?
क्या रही विवाद की मुख्य वजह?
हालांकि अभी तक पुलिस ने आधिकारिक तौर पर एफआईआर (FIR) की पुष्टि नहीं की है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह विवाद किसी केस की तारीख या पुराने पैसों के लेनदेन से जुड़ा हो सकता है। अधिवक्ता समुदाय ने इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
निष्कर्ष
श्रीगंगानगर जैसे शांत शहर में, जहां कानून व्यवस्था को बनाए रखना पुलिस के लिए हमेशा एक चुनौती रहती है, न्यायालय परिसर के बाहर ऐसी घटना कानून के इकबाल पर चोट करती है। फिलहाल परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और प्रशासन मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दोनों पक्षों के बीच सुलह या कानूनी कार्रवाई की दिशा में बढ़ रहा है। देर शाम तक अधिवक्ता संघ की बैठक भी बुलाई गई है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।