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चिकित्सा जगत में क्रांति: अब मात्र एक ‘ब्लड टेस्ट’ से होगी कैंसर की पहचान

20 जनवरी 2026: कैंसर अनुसंधान के क्षेत्र में आज एक युगांतरकारी सफलता की घोषणा की गई है। स्वीडन के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय शोध के परिणामों ने यह सिद्ध कर दिया है कि अब शरीर में कैंसर की उपस्थिति का पता लगाने के लिए कष्टदायक बायोप्सी या महंगे स्कैन की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं होगी। एक सरल ब्लड टेस्ट, जिसे ‘प्लाज्मा प्रोटीन प्रोफाइलिंग’ (Plasma Protein Profiling) कहा जा रहा है, शुरुआती दौर में ही कैंसर को पकड़ने में सक्षम पाया गया है।


क्या है यह नई खोज? (Plasma Protein Profiling)

आमतौर पर कैंसर का पता तब चलता है जब ट्यूमर काफी बड़ा हो जाता है या शरीर में गंभीर लक्षण दिखने लगते हैं। लेकिन यह नया परीक्षण रक्त में मौजूद प्रोटीन के विशिष्ट पैटर्नों का विश्लेषण करता है।

  • प्रोटीन सिग्नेचर: जब शरीर में कैंसर की कोशिकाएं पनपना शुरू होती हैं, तो वे रक्त के प्लाज्मा में विशेष प्रकार के प्रोटीन छोड़ती हैं। वैज्ञानिकों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग करके हजारों प्रोटीनों के बीच उन ‘हस्ताक्षरों’ (Signatures) की पहचान की है जो कैंसर का सटीक संकेत देते हैं।

  • लक्षणों से पहले पहचान: इस परीक्षण की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह उन लोगों में भी कैंसर का पता लगा सकता है जिनमें कोई स्पष्ट लक्षण नहीं हैं। अक्सर लोग थकान, हल्का वजन कम होना या बदन दर्द जैसे सामान्य लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो वास्तव में कैंसर के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।

स्वीडिश अध्ययन के मुख्य बिंदु

हाल ही में संपन्न हुए इस क्लीनिकल ट्रायल में 5,000 से अधिक प्रतिभागियों को शामिल किया गया था। शोध के परिणाम चौंकाने वाले रहे:

  1. सटीकता: यह टेस्ट 15 से अधिक विभिन्न प्रकार के कैंसर (जैसे फेफड़े, अग्न्याशय, और अंडाशय का कैंसर) की पहचान करने में 90% से अधिक सटीक पाया गया।

  2. स्टेज-1 डिटेक्शन: परीक्षण ने पहले चरण (Stage-1) के कैंसर का पता लगाने में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है, जहाँ जीवित रहने की दर (Survival Rate) सबसे अधिक होती है।

  3. समय की बचत: रिपोर्ट प्राप्त करने में मात्र 24 से 48 घंटे का समय लगता है, जो पारंपरिक नैदानिक प्रक्रियाओं की तुलना में बहुत कम है।

भविष्य की स्वास्थ्य प्रणाली पर प्रभाव

यह तकनीक 2026 के अंत तक वैश्विक स्तर पर और भारत के प्रमुख ऑन्कोलॉजी केंद्रों (जैसे टाटा मेमोरियल और एम्स) में स्क्रीनिंग के लिए उपलब्ध होने की उम्मीद है।

  • लागत में कमी: एक बार बड़े पैमाने पर लागू होने के बाद, यह परीक्षण एमआरआई (MRI) या पीईटी (PET) स्कैन की तुलना में काफी सस्ता होगा।

  • नियमित स्क्रीनिंग: भविष्य में, लोग अपने वार्षिक स्वास्थ्य चेकअप (Annual Health Checkup) के हिस्से के रूप में इस ‘कैंसर ब्लड टेस्ट’ को करवा सकेंगे।

  • व्यक्तिगत उपचार: प्रोटीन प्रोफाइलिंग से न केवल कैंसर का पता चलेगा, बल्कि यह भी समझ में आएगा कि कौन सी दवा उस विशिष्ट प्रोटीन संरचना पर सबसे प्रभावी होगी।


विशेषज्ञों की राय

कैंसर विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज “लिक्विड बायोप्सी” के क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी छलांग है। यदि हम प्रारंभिक अवस्था में कैंसर का निदान कर लेते हैं, तो उपचार की सफलता दर 10% से बढ़कर 90% तक जा सकती है।

“यह टेस्ट चिकित्सा विज्ञान का वह ‘पवित्र प्याला’ (Holy Grail) है जिसका हम दशकों से इंतजार कर रहे थे।” – स्वीडिश रिसर्च टीम के प्रमुख

निष्कर्ष

कैंसर के खिलाफ युद्ध में ‘जल्दी पता लगाना’ (Early Detection) ही एकमात्र सबसे प्रभावी हथियार है। यह नया ब्लड टेस्ट उस भविष्य की नींव रख रहा है जहाँ कैंसर अब एक “मृत्यु दंड” (Death Sentence) नहीं, बल्कि एक उपचार योग्य बीमारी होगी।

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