
नई दिल्ली, 20 जनवरी 2026: उत्तर भारत में जारी भीषण शीतलहर और वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के ‘गंभीर’ श्रेणी में बने रहने के कारण स्वास्थ्य संकट गहरा गया है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), दिल्ली ने आज एक आपातकालीन स्वास्थ्य चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि पिछले सात दिनों में हृदय और श्वसन संबंधी बीमारियों के मामलों में 20% से 25% का उछाल दर्ज किया गया है। अस्पतालों के इमरजेंसी वार्डों में हार्ट अटैक और सांस फूलने की समस्या वाले मरीजों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं।
ठंड और दिल का रिश्ता: शरीर के अंदर क्या होता है?
डॉक्टरों के अनुसार, कड़ाके की ठंड हमारे परिसंचरण तंत्र (Circulatory System) पर सीधा और प्रतिकूल प्रभाव डालती है।
-
रक्त वाहिकाओं का सिकुड़ना (Vasoconstriction): जब शरीर ठंडी हवा के संपर्क में आता है, तो शरीर के तापमान को बनाए रखने के लिए रक्त वाहिकाएं प्राकृतिक रूप से सिकुड़ जाती हैं। इससे रक्त का मार्ग संकरा हो जाता है।
-
ब्लड प्रेशर में वृद्धि: वाहिकाओं के सिकुड़ने के कारण हृदय को शरीर के अंगों तक रक्त पहुँचाने के लिए अधिक बल लगाना पड़ता है, जिससे ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ जाता है।
-
रक्त का थक्का जमना: ठंड के मौसम में रक्त में फाइब्रिनोजेन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे खून गाढ़ा होने लगता है और नसों में थक्के (Clots) जमने की संभावना बढ़ जाती है, जो हार्ट अटैक का मुख्य कारण है।
प्रदूषण: जले पर नमक का काम
केवल ठंड ही नहीं, बल्कि हवा में मौजूद PM 2.5 के सूक्ष्म कण हृदय और फेफड़ों के लिए जहर के समान साबित हो रहे हैं।
-
सूजन (Inflammation): प्रदूषण के कण फेफड़ों के माध्यम से खून में मिलकर धमनियों में सूजन पैदा करते हैं।
-
ऑक्सीजन की कमी: प्रदूषित हवा के कारण फेफड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे हृदय को अपनी गति (Heart Rate) बढ़ानी पड़ती है।
-
COPD और अस्थमा: ‘क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज’ (COPD) के मरीजों के लिए यह मौसम जानलेवा साबित हो रहा है, क्योंकि ठंड और धुआं मिलकर ‘स्मॉग’ बनाते हैं जो सांस की नलियों को जाम कर देता है।
विशेषज्ञों की सलाह: बचाव के तरीके
एम्स के कार्डियोलॉजी विभाग ने विशेष रूप से बुजुर्गों और पहले से हृदय रोग से जूझ रहे लोगों के लिए निम्नलिखित दिशानिर्देश जारी किए हैं:
-
समय का चुनाव: सुबह 11 बजे से पहले और शाम को सूरज ढलने के बाद घर से बाहर न निकलें। सैर के लिए दोपहर का समय चुनें जब धूप निकली हो।
-
परतों में कपड़े पहनें: एक भारी कोट के बजाय तीन पतली परतें पहनें। यह शरीर की गर्मी को बेहतर तरीके से रोकती हैं। सिर, कान और पैरों को हमेशा ढंक कर रखें।
-
नियमित जांच: हाई बीपी के मरीज अपनी दवाओं में बदलाव के लिए डॉक्टर से परामर्श लें, क्योंकि सर्दियों में अक्सर खुराक बढ़ाने की जरूरत पड़ती है।
-
खान-पान: तले-भुने और भारी भोजन से बचें। गर्म तरल पदार्थ और गुनगुने पानी का अधिक सेवन करें।
निष्कर्ष
यह मौसम केवल ‘सुहाना’ नहीं बल्कि जोखिम भरा भी है। शरीर के संकेतों (जैसे सीने में भारीपन, सांस फूलना या अत्यधिक पसीना आना) को नजरअंदाज न करें। याद रखें, ठंड और प्रदूषण का यह संयोजन एक ‘साइलेंट किलर’ की तरह काम करता है। सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।