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गांधीनगर में भारत की पहली राज्य-वित्त पोषित BSL-4 लैब: देश की स्वास्थ्य सुरक्षा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर

गांधीनगर, 20 जनवरी 2026: भारत के चिकित्सा अनुसंधान और राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के गांधीनगर में देश की पहली राज्य-वित्त पोषित (State-Funded) बायो-सेफ्टी लेवल-4 (BSL-4) प्रयोगशाला की आधारशिला रखी। यह लैब न केवल गुजरात के लिए, बल्कि पूरे भारत के लिए एक ऐसी ‘स्वास्थ्य ढाल’ (Health Shield) साबित होगी, जो भविष्य में किसी भी जैविक खतरे या वैश्विक महामारी का सामना करने में सक्षम होगी।


BSL-4 लैब क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

बायो-सेफ्टी लेवल्स (BSL) प्रयोगशालाओं की वह श्रेणियां हैं जो संक्रामक एजेंटों के साथ काम करने के लिए सुरक्षा मानकों को निर्धारित करती हैं। BSL-4 दुनिया का उच्चतम स्तर है।

  • अत्यधिक खतरनाक वायरस पर शोध: इस लैब में उन वायरस और बैक्टीरिया पर शोध किया जा सकेगा जिनका कोई ज्ञात इलाज या टीका उपलब्ध नहीं है, जैसे इबोला, मारबर्ग, लासा बुखार और अत्यधिक संक्रामक क्रिमियन-कांगो हेमोरेजिक फीवर (CCHF)

  • हवा से फैलने वाले रोग: यह लैब उन सूक्ष्मजीवों को सुरक्षित रूप से संभालने के लिए डिज़ाइन की गई है जो हवा के माध्यम से फैलते हैं और घातक श्वसन रोग पैदा करते हैं।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम

अभी तक भारत में इस स्तर की बहुत कम प्रयोगशालाएँ थीं (जैसे पुणे में ICMR-NIV), जो मुख्य रूप से केंद्र सरकार द्वारा संचालित थीं। यह पहली बार है जब किसी राज्य सरकार ने अपने स्वयं के बजट और पहल से इतनी उन्नत लैब स्थापित करने का निर्णय लिया है।

  • स्वदेशी वैक्सीन विकास: इस लैब की मदद से भारत नए उभरते वायरस के लिए बहुत तेजी से स्वदेशी वैक्सीन और दवाएं विकसित कर सकेगा। अब नमूनों को जांच के लिए विदेशों में भेजने की निर्भरता पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

  • बायो-टेररिज्म से सुरक्षा: आज के युग में जैविक युद्ध (Biological Warfare) का खतरा बढ़ रहा है। यह लैब सुरक्षा एजेंसियों को अज्ञात जैविक खतरों की पहचान करने और उनका मुकाबला करने के लिए तैयार करेगी।

अत्याधुनिक तकनीक और सुरक्षा मानक

गांधीनगर में बनने वाली यह प्रयोगशाला विज्ञान का एक चमत्कार होगी। इसकी सुरक्षा प्रणाली को ‘फैल-सेफ’ (Fail-safe) बनाया गया है:

  1. प्रेशर सूट और एयरलॉक: यहाँ काम करने वाले वैज्ञानिक विशेष प्रकार के ‘पॉजिटिव प्रेशर सूट’ पहनेंगे और उन्हें कई एयरलॉक कक्षों से गुजरना होगा।

  2. HEPA फिल्ट्रेशन: लैब से बाहर निकलने वाली हवा को शक्तिशाली HEPA फिल्टर के माध्यम से कई बार साफ किया जाएगा ताकि बाहर के वातावरण में कोई भी सूक्ष्मजीव न जा सके।

  3. कठोर कचरा प्रबंधन: यहाँ से निकलने वाले तरल और ठोस कचरे को उच्च तापमान और दबाव (Autoclave) पर पूरी तरह कीटाणुमुक्त किया जाएगा।

भविष्य की स्वास्थ्य ढाल

आधारशिला रखने के दौरान गृह मंत्री ने कहा कि यह लैब भारत को ‘वन हेल्थ’ (One Health) दृष्टिकोण की ओर ले जाएगी, जहाँ मनुष्य, पशु और पर्यावरण तीनों के स्वास्थ्य पर एक साथ शोध होगा। चूंकि गुजरात एक प्रमुख औद्योगिक और फार्मास्युटिकल हब है, इसलिए यहाँ इस लैब का होना दवाओं के अनुसंधान को एक नई गति प्रदान करेगा।


निष्कर्ष

गांधीनगर की यह BSL-4 लैब आने वाली पीढ़ियों को अज्ञात महामारियों के डर से मुक्त करेगी। यह विज्ञान, तकनीक और सरकार की दूरगामी सोच का परिणाम है, जो भारत को वैश्विक स्वास्थ्य मानचित्र पर एक अग्रणी शक्ति के रूप में स्थापित करेगी।

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