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श्रीगंगानगर: राज्य स्तरीय ‘किन्नू महाकुंभ’ की तैयारी और किसानों का असंतोष

श्रीगंगानगर, 20 जनवरी 2026: राजस्थान के ‘फलों के कटोरे’ कहे जाने वाले श्रीगंगानगर जिले में आगामी 23 से 25 जनवरी तक आयोजित होने वाले तीन दिवसीय राज्य स्तरीय किन्नू महाकुंभ को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। महाराजा गंगासिंह स्टेडियम और स्थानीय कृषि मंडियों को सजाया जा रहा है, लेकिन इस चमक-धमक के बीच जिले के अन्नदाता यानी किन्नू उत्पादक किसानों के चेहरों पर मायूसी और आक्रोश की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं।


महाकुंभ का स्वरूप और उद्देश्य

प्रशासन का दावा है कि इस महोत्सव का उद्देश्य श्रीगंगानगर के किन्नू को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना और किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है।

  • प्रदर्शनी और वर्कशॉप: मेले में देशभर के कृषि वैज्ञानिक आएंगे जो किसानों को किन्नू की गुणवत्ता सुधारने और बीमारी मुक्त फसल उगाने के गुर सिखाएंगे।

  • निर्यात की संभावनाएं: सरकार का लक्ष्य है कि खाड़ी देशों और बांग्लादेश जैसे बाजारों में श्रीगंगानगर के किन्नू की सीधी पहुंच बनाई जाए, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम हो सके।

  • प्रोसेसिंग यूनिट्स: महोत्सव में नई प्रोसेसिंग और ग्रेडिंग मशीनों का प्रदर्शन किया जाएगा ताकि किसान अपनी उपज का मूल्य संवर्धन (Value Addition) कर सकें।

किसानों की मिश्रित प्रतिक्रिया: “मेला नहीं, नीति चाहिए”

जहाँ एक तरफ सरकार इसे उत्सव के रूप में देख रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय किसान संगठनों ने आज कलेक्ट्रेट के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। किसानों का तर्क है कि दिखावे के आयोजनों से उनके घरों की आर्थिक स्थिति नहीं सुधरेगी। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

1. सिंचाई के पानी का संकट

श्रीगंगानगर की खेती पूरी तरह से नहरों पर निर्भर है। किसानों का कहना है कि किन्नू के बागों को तैयार करने में सालों की मेहनत लगती है, लेकिन सिंचाई के पानी की अनिश्चितता के कारण पौधे सूख रहे हैं। गंगनहर और इंदिरा गांधी नहर परियोजना में पानी की कटौती ने बागवानी को खतरे में डाल दिया है।

2. मूल्य की अनिश्चितता और एमएसपी (MSP)

किसानों की सबसे बड़ी पीड़ा बाजार भाव को लेकर है। वर्तमान में, लागत बढ़ने के बावजूद किसानों को अपनी फसल औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ रही है। किसानों की मांग है कि किन्नू के लिए भी एक ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ (MSP) या एक फ्लोर प्राइस तय किया जाए ताकि उन्हें घाटे से बचाया जा सके।

3. कोल्ड स्टोरेज और फूड पार्क का अभाव

जिले में पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं की कमी के कारण, फसल तैयार होते ही किसानों को उसे तुरंत बेचना पड़ता है। भंडारण क्षमता न होने की वजह से वे बाजार में कीमतों के बढ़ने का इंतजार नहीं कर पाते। किसानों का कहना है कि सरकार को मेलों के बजाय ‘फूड पार्क’ बनाने पर पैसा खर्च करना चाहिए।

भविष्य की राह और सरकारी आश्वासन

कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि महाकुंभ के दौरान ही नई नीतियों और सब्सिडी योजनाओं की घोषणा की जाएगी। सरकार का तर्क है कि इस आयोजन से बड़े व्यापारी और निर्यातक सीधे किसानों से जुड़ेंगे, जिससे भविष्य में बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है।


निष्कर्ष

किन्नू महाकुंभ निस्संदेह श्रीगंगानगर की ब्रांडिंग के लिए एक बड़ा कदम है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार किसानों की बुनियादी समस्याओं—जैसे पानी, बिजली और सही दाम—पर कितना गंभीर रुख अपनाती है। यदि किसान खुशहाल नहीं होगा, तो ‘किन्नू का कटोरा’ खाली होने में देर नहीं लगेगी।

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