जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में आज से दुनिया के सबसे बड़े साहित्यिक उत्सव, जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) के 19वें संस्करण का भव्य शुभारंभ हुआ। होटल क्लार्क्स आमेर के विशाल प्रांगण में सुबह की मधुर स्वर लहरियों और राजस्थानी लोक संगीत के साथ इस 5 दिवसीय उत्सव (15-19 जनवरी) का आगाज हुआ। इस वर्ष का फेस्टिवल ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ और ‘वैश्विक शांति’ के संदेश को समर्पित है।
500 वक्ता और 25 से अधिक भाषाएँ
फेस्टिवल के आयोजकों, नमिता गोखले और विलियम डेलरिम्पल ने बताया कि इस बार का आयोजन अब तक का सबसे बड़ा संस्करण है। इसमें दुनिया के कोने-कोने से 500 से अधिक वक्ता, लेखक, नोबेल पुरस्कार विजेता, पत्रकार और विचारक शिरकत कर रहे हैं। इस महाकुंभ में केवल अंग्रेजी ही नहीं, बल्कि राजस्थानी, हिंदी, उर्दू, फ्रेंच और स्पेनिश सहित 25 से अधिक भाषाओं के साहित्य पर मंथन किया जा रहा है।
पहले दिन की मुख्य चर्चाएँ: साहित्य से राजनीति तक
उत्सव के पहले दिन विभिन्न सत्रों में समसामयिक विषयों पर गंभीर विमर्श हुआ:
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पर्यावरण संकट: ‘क्लाइमेट चेंज’ सत्र में वैज्ञानिकों और लेखकों ने धरती के बदलते स्वरूप और साहित्य की इसमें भूमिका पर चर्चा की।
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वैश्विक राजनीति: बदलती हुई विश्व व्यवस्था और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का लेखन पर प्रभाव जैसे विषयों ने युवाओं को अपनी ओर आकर्षित किया।
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राजस्थानी गौरव: स्थानीय लेखकों ने राजस्थान की मौखिक परंपरा और लोक कथाओं के संरक्षण पर बल दिया।
‘शौर्य और शब्दों’ का अनूठा संगम
आज का दिन जयपुर के लिए बेहद खास रहा। शहर के एक छोर पर जहाँ सेना दिवस के अवसर पर हथियारों की गड़गड़ाहट और सैन्य पराक्रम का प्रदर्शन हो रहा था, वहीं दूसरी ओर JLF में शब्दों की ताकत और वैचारिक क्रांति की गूंज सुनाई दे रही थी। जयपुर के आसमान में आज एक तरफ लड़ाकू विमानों की गर्जना थी, तो दूसरी तरफ कविताओं की कोमल स्वर लहरियाँ। इस संयोग को फेस्टिवल में आए मेहमानों ने ‘शक्ति और भक्ति’ का अद्भुत मिलन बताया।
युवाओं का हुजूम और तकनीकी नवाचार
फेस्टिवल में इस साल रिकॉर्ड संख्या में युवाओं का पंजीकरण हुआ है। स्कूल और कॉलेज के छात्रों के लिए विशेष सत्र आयोजित किए गए हैं। इसके अलावा, JLF 2026 में ‘मेटावर्स’ और ‘लाइव स्ट्रीमिंग’ के जरिए उन लाखों लोगों को भी जोड़ा गया है जो जयपुर नहीं आ सके। पुस्तक प्रेमियों के लिए यहाँ एक विशाल बुकस्टोर बनाया गया है, जहाँ वे लेखकों से उनकी किताबों पर हस्ताक्षर करवा रहे हैं।
शाम की सांस्कृतिक महफिल
दिन भर के बौद्धिक सत्रों के बाद, शाम को जयपुर के ऐतिहासिक स्मारकों पर ‘हेरिटेज इवनिंग’ का आयोजन किया जा रहा है। यहाँ शास्त्रीय संगीत और सूफी गायकी के जरिए मेहमानों को राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया जा रहा है। फेस्टिवल के भोजन स्टॉल्स पर राजस्थानी जायके (दाल-बाटी-चूरमा और प्याज की कचौड़ी) का स्वाद विदेशी मेहमानों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
निष्कर्ष: JLF 2026 केवल लेखकों का जमावड़ा नहीं है, बल्कि यह विचारों का एक ऐसा मंच है जहाँ दुनिया की जटिल समस्याओं का समाधान साहित्य के माध्यम से खोजने का प्रयास किया जाता है। अगले चार दिनों तक जयपुर पूरी दुनिया के बौद्धिक विमर्श का केंद्र बना रहेगा।