
जयपुर। आज 15 जनवरी, 2026 का दिन राजस्थान के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया। देश का 78वां सेना दिवस (Army Day) इस बार दिल्ली की सीमाओं से बाहर निकलकर वीर प्रसूता भूमि राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित किया गया। जयपुर के ‘सागर शक्ति’ परेड ग्राउंड पर आयोजित इस भव्य समारोह ने न केवल भारतीय सेना की शक्ति का प्रदर्शन किया, बल्कि हर भारतीय के सीने को गर्व से चौड़ा कर दिया।
दिल्ली के बाहर आयोजन की परंपरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर सैन्य कार्यक्रमों को देश के विभिन्न हिस्सों में ले जाने की कड़ी में इस बार जयपुर को चुना गया। राजस्थान, जो अपनी वीरता और बलिदान के लिए विश्वविख्यात है, इस गौरवशाली परेड का गवाह बना। सुबह ठीक 9:00 बजे सेना प्रमुख ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिसके बाद परेड की शुरुआत हुई।
आधुनिक हथियारों और तकनीक का शक्ति प्रदर्शन
परेड में भारतीय सेना ने अपनी ‘मेक इन इंडिया’ ताकत का लोहा मनवाया। मैदानी भाग में टी-90 भीष्म टैंक, के-9 वज्र तोपें और पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर प्रणालियों ने अपनी धमक से आसमान गुंजा दिया।
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भैरव बटालियन का जोश: विशेष रूप से प्रशिक्षित ‘भैरव बटालियन’ के जवानों ने जब कदमताल करते हुए मार्च पास्ट किया, तो पूरा स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इन जवानों के अनुशासन और शारीरिक दक्षता ने आधुनिक युद्ध कौशल की नई परिभाषा प्रस्तुत की।
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कामिकाजे ड्रोन्स का प्रदर्शन: भविष्य के युद्धों को ध्यान में रखते हुए, सेना ने पहली बार सार्वजनिक रूप से कामिकाजे (स्वघाती) ड्रोन्स के सामरिक कौशल का प्रदर्शन किया। इन ड्रोन्स की सटीकता और तकनीक ने दिखाया कि भारतीय सेना अब पूरी तरह से ‘डिजिटल वॉरफेयर’ के लिए तैयार है।
आसमान से बरसा ‘तिरंगा’
सेना दिवस का सबसे मनमोहक दृश्य ‘चेतक’ और ‘ध्रुव’ हेलीकॉप्टरों का एयर-शो रहा। हेलीकॉप्टरों ने आकाश में अद्भुत कलाबाजियां दिखाईं और फिर परेड ग्राउंड पर मौजूद दर्शकों के ऊपर केसरिया, सफेद और हरे रंगों के फूलों की वर्षा की। यह पुष्प वर्षा सेना और जनता के बीच के अटूट विश्वास का प्रतीक लग रही थी।
‘शौर्य संध्या’ और वीरों का सम्मान
समारोह का दूसरा चरण शाम को ऐतिहासिक सवाई मानसिंह (SMS) स्टेडियम में आयोजित किया गया, जिसे ‘शौर्य संध्या’ नाम दिया गया। इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शिरकत की।
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा, “राजस्थान की मिट्टी के कण-कण में वीरता है। जयपुर में सेना दिवस का आयोजन उन हजारों राजस्थानियों को सम्मान है जो सीमाओं पर तैनात हैं।” मुख्यमंत्री ने भी राज्य सरकार की ओर से पूर्व सैनिकों और वीर नारियों के कल्याण के लिए कई नई घोषणाएं कीं। शाम को लेजर शो और सैन्य बैंड की मधुर धुन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
युवाओं में दिखा जबरदस्त उत्साह
इस कार्यक्रम को देखने के लिए राजस्थान के कोने-कोने से हजारों की संख्या में युवा और छात्र पहुंचे थे। सेना की इस भव्यता को देखकर कई युवाओं ने भारतीय सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने का संकल्प लिया। सेना ने यहां एक ‘हथियार प्रदर्शनी’ भी लगाई थी, जहां आम नागरिक मिसाइलों और टैंकों को करीब से देख सके।
निष्कर्ष: जयपुर में आयोजित 78वां सेना दिवस केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद और सैन्य शक्ति का एक महाकुंभ था। इसने साबित कर दिया कि भारतीय सेना दुनिया की सबसे आधुनिक और अजेय शक्तियों में से एक बनने की राह पर तेजी से अग्रसर है।