🢀
दूध अमृत है या जहर? मकर संक्रांति पर विशेषज्ञों ने दूर किए दूध से जुड़े बड़े मिथक

नई दिल्ली/जयपुर। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर भारत भर में तिल-गुड़ के लड्डू, घेवर और दूध से बनी मिठाइयों का सेवन पारंपरिक रूप से बढ़ जाता है। त्योहार के इस मौसम में सोशल मीडिया और इंटरनेट पर दूध को लेकर फैले विरोधाभासी दावों ने आम जनता में भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। आज, 14 जनवरी 2026 को स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इन चर्चाओं पर विराम लगाते हुए दूध के संतुलित सेवन और उससे जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों को स्पष्ट किया है।


मिथक 1: “दूध बीमारियों की जड़ है”

अक्सर यह दावा किया जाता है कि दूध पीने से शरीर में सूजन (Inflammation) बढ़ती है और यह कैंसर या अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बनता है।

  • सच्चाई: विशेषज्ञों का कहना है कि दूध को सीधे तौर पर “बीमारियों की जड़” मानना पूरी तरह गलत है। वास्तव में, दूध कैल्शियम, फास्फोरस, पोटेशियम, विटामिन B12 और हाई-क्वालिटी प्रोटीन का एक उत्कृष्ट स्रोत है। यह हड्डियों के घनत्व (Bone Density) को बनाए रखने और मांसपेशियों की मरम्मत के लिए अनिवार्य है। यदि दूध शुद्ध है और व्यक्ति को कोई विशेष एलर्जी नहीं है, तो यह शरीर के लिए पोषण का आधार है।

मिथक 2: “दूध से शुगर (मधुमेह) तेजी से बढ़ती है”

डायबिटीज के मरीजों के बीच अक्सर यह डर रहता है कि दूध में मौजूद ‘लैक्टोज’ (Natural Sugar) उनके ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा देगा।

  • सच्चाई: डॉक्टरों के अनुसार, सादे दूध का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) काफी कम होता है। इसका मतलब है कि यह रक्त शर्करा को तेजी से नहीं बढ़ाता। समस्या तब होती है जब हम दूध में अतिरिक्त चीनी, फ्लेवर या चॉकलेट मिलाकर पीते हैं। संतुलित मात्रा में और बिना चीनी के लिया गया दूध मधुमेह रोगियों के लिए भी सुरक्षित हो सकता है।

मिथक 3: “सभी के लिए दूध जरूरी है”

  • सच्चाई: विशेषज्ञों ने यहाँ एक महत्वपूर्ण सावधानी दी है—लैक्टोज इंटोलरेंस (Lactose Intolerance)। दुनिया की एक बड़ी आबादी दूध में मौजूद शुगर (लैक्टोज) को पचा नहीं पाती, जिससे गैस, सूजन या पेट खराब होने जैसी समस्याएं होती हैं। ऐसे लोगों के लिए दूध फायदे की जगह नुकसानदेह हो सकता है। उन्हें दही, छाछ या प्लांट-बेस्ड मिल्क (जैसे बादाम या सोया मिल्क) का विकल्प चुनना चाहिए।


गुणवत्ता और मिलावट की चुनौती

2026 में सबसे बड़ी चिंता दूध की गुणवत्ता को लेकर है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि दूध के नाम पर बिकने वाला सिंथेटिक दूध या यूरिया युक्त दूध वास्तव में खतरनाक है। त्योहारों के सीजन में मिलावट की आशंका बढ़ जाती है, जिससे लिवर और किडनी को नुकसान पहुँच सकता है। विशेषज्ञों की सलाह है:

  1. हमेशा भरोसेमंद डेयरी या प्रमाणित ब्रांड से ही दूध खरीदें।

  2. दूध को अच्छी तरह उबालकर ही इस्तेमाल करें।

विशेषज्ञों का ‘बैलेंस्ड अप्रोच’ मंत्र

वरिष्ठ आहार विशेषज्ञों (Dietitians) का कहना है कि मकर संक्रांति पर दूध से बनी चीजों का आनंद जरूर लें, लेकिन ‘अति’ से बचें

  • मात्रा: एक स्वस्थ वयस्क के लिए दिन में 250-500 मिली दूध या उसके उत्पाद पर्याप्त हैं।

  • समय: रात को सोने से पहले हल्का गर्म दूध पीना बेहतर नींद में सहायक होता है, जबकि सुबह के समय यह ऊर्जा प्रदान करता है।


निष्कर्ष: दूध न तो जादुई दवा है और न ही धीमा जहर। यह एक पोषक आहार है जिसे व्यक्ति को अपनी शारीरिक क्षमता, पाचन शक्ति और दूध की शुद्धता को ध्यान में रखते हुए अपनाना चाहिए। मकर संक्रांति पर परंपरागत व्यंजनों का स्वाद लें, लेकिन सेहत के मानकों से समझौता न करें।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️