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श्रीगंगानगर रोडवेज बस स्टैंड: बदहाली के आंसू रोती बुनियादी सुविधाएं, सुलभ कॉम्प्लेक्स बंद होने से यात्री बेहाल

श्रीगंगानगर का मुख्य रोडवेज बस स्टैंड, जो जिले की परिवहन व्यवस्था की जीवनरेखा माना जाता है, इन दिनों अव्यवस्थाओं का केंद्र बना हुआ है। सबसे बड़ी समस्या बस स्टैंड परिसर में स्थित सुलभ कॉम्प्लेक्स (सार्वजनिक शौचालय) का बंद होना है। कड़ाके की ठंड के बीच दूर-दराज से आने वाले हजारों यात्रियों के लिए यह स्थिति किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है।

महिलाओं और बुजुर्गों की बढ़ी मुश्किलें

बस स्टैंड पर प्रतिदिन जयपुर, बीकानेर, दिल्ली और पंजाब के विभिन्न शहरों से सैकड़ों बसों का आवागमन होता है।

  • महिलाओं की गरिमा: सुलभ कॉम्प्लेक्स पर ताला लटका होने के कारण महिला यात्रियों को सबसे अधिक शर्मिंदगी और परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्हें आसपास के निजी होटलों या असुरक्षित स्थानों की तलाश करनी पड़ती है।

  • बुजुर्गों और बीमारों का हाल: मधुमेह (Diabetes) और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे बुजुर्ग यात्रियों के लिए लंबे सफर के बाद शौचालय की सुविधा न मिलना उनके स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर रहा है।

भीषण ठंड और स्वच्छता का अभाव

वर्तमान में श्रीगंगानगर में तापमान 4 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। ऐसे में यात्री, विशेषकर बच्चे, ठिठुरती ठंड में बुनियादी सुविधाओं के अभाव में भटकने को मजबूर हैं।

  • गंदगी का अंबार: शौचालय बंद होने के कारण कुछ लोग परिसर के पीछे या खुले में निवृत्त होने को मजबूर हैं, जिससे पूरे बस स्टैंड पर दुर्गंध फैल रही है। यह न केवल स्वच्छता अभियान की धज्जियां उड़ा रहा है, बल्कि बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ा रहा है।

  • पेयजल की समस्या: यात्रियों का कहना है कि सुलभ कॉम्प्लेक्स बंद होने के साथ-साथ परिसर में सफाई व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा गई है।

प्रशासन और ठेकेदार के बीच अनबन की आशंका?

सूत्रों के अनुसार, सुलभ कॉम्प्लेक्स के बंद होने के पीछे रखरखाव के ठेके का नवीनीकरण न होना या भुगतान संबंधी विवाद बताया जा रहा है। हालांकि, विभागीय स्तर पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि पिछले कई दिनों से इसकी सफाई नहीं हुई थी और अब इसे पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

यात्रियों और स्थानीय नागरिकों का आक्रोश

बस स्टैंड पर मौजूद यात्री रमेश कुमार (हनुमानगढ़ निवासी) ने बताया, “हम पिछले 3 घंटे से बस का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन यहाँ हाथ धोने तक की सुविधा नहीं है। प्रशासन को यात्रियों की सुविधाओं से कोई सरोकार नहीं है।” सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस मुद्दे पर प्रशासन को चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि अगले 24 घंटों के भीतर वैकल्पिक व्यवस्था या सुलभ कॉम्प्लेक्स को नहीं खोला गया, तो वे बस स्टैंड के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

प्रमुख मांगें:

  1. तत्काल समाधान: सुलभ कॉम्प्लेक्स का ताला तुरंत खोला जाए और इसकी सफाई के लिए अतिरिक्त कर्मचारी नियुक्त किए जाएं।

  2. मोबाइल टॉयलेट: जब तक स्थायी समाधान नहीं होता, प्रशासन को बस स्टैंड परिसर में ‘मोबाइल टॉयलेट’ (चलते-फिरते शौचालय) की व्यवस्था करनी चाहिए।

  3. रोडवेज प्रबंधन की जवाबदेही: रोडवेज डिपो मैनेजर को इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए।

निष्कर्ष

एक ओर जहां सरकार ‘स्वच्छ भारत मिशन’ पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं श्रीगंगानगर जैसे प्रमुख शहर के बस स्टैंड पर बुनियादी सुविधाओं का यह हाल चिंताजनक है। यात्रियों की सुविधाओं को प्राथमिकता देना रोडवेज विभाग और नगर परिषद की संयुक्त जिम्मेदारी है।

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