🢀
मलयेशिया ओपन 2026: पीवी सिंधू का साहसी सफर सेमीफाइनल में थमा, भारतीय चुनौती समाप्त

कुआलालंपुर (मलयेशिया)। भारतीय बैडमिंटन प्रेमियों के लिए शनिवार का दिन निराशा लेकर आया। भारत की दो बार की ओलंपिक पदक विजेता और स्टार शटलर पीवी सिंधू का मलयेशिया ओपन सुपर 1000 टूर्नामेंट में खिताबी जीत का सपना सेमीफाइनल में टूट गया। एक कड़े और रोमांचक मुकाबले में दुनिया की पूर्व नंबर-1 खिलाड़ी को हार का सामना करना पड़ा, जिसके साथ ही इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में भारत की आखिरी उम्मीद भी समाप्त हो गई है।


मैच का आंखों देखा हाल: उतार-चढ़ाव भरी जंग

कुआलालंपुर के एज़ियाटा एरिना में खेले गए इस हाई-वोल्टेज सेमीफाइनल मुकाबले में सिंधू का सामना उनकी चिर-प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी से था। मैच की शुरुआत में सिंधू ने शानदार लय दिखाई और अपने ट्रेडमार्क क्रॉस-कोर्ट स्मैश के दम पर बढ़त बनाई।

  • पहला गेम: सिंधू ने शुरुआत में 11-8 की बढ़त बनाई थी, लेकिन ब्रेक के बाद विपक्षी खिलाड़ी ने वापसी की और लंबी रैलियों के जरिए सिंधू को थका दिया। पहला गेम सिंधू के हाथ से निकल गया।

  • दूसरा गेम: दूसरे गेम में सिंधू ने जबरदस्त आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने कोर्ट के चारों कोनों का बखूबी इस्तेमाल किया और दूसरा गेम जीतकर मैच को निर्णायक तीसरे गेम में खींच लिया।

  • निर्णायक गेम: तीसरे और अंतिम गेम में दोनों खिलाड़ियों के बीच एक-एक अंक के लिए संघर्ष देखा गया। हालांकि, अंत में कुछ अनफोर्स्ड एरर्स (Unforced Errors) और थकान सिंधू पर भारी पड़ी। विपक्षी खिलाड़ी ने नेट पर शानदार नियंत्रण दिखाते हुए निर्णायक गेम और मैच अपने नाम कर लिया।

[Image showing PV Sindhu playing a powerful smash during a high-stakes match]


पूरे टूर्नामेंट में सिंधू का प्रदर्शन: ‘विंटेज सिंधू’ की वापसी

भले ही सिंधू फाइनल में जगह नहीं बना पाईं, लेकिन मलयेशिया ओपन 2026 उनके लिए व्यक्तिगत रूप से एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। पिछले कुछ समय से फॉर्म और चोटों से जूझ रही सिंधू ने इस सुपर 1000 टूर्नामेंट में अपने पुराने अंदाज की झलक पेश की।

  1. शुरुआती दौर: उन्होंने पहले और दूसरे दौर में शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ियों को सीधे गेमों में हराकर सबको चौंका दिया।

  2. क्वार्टर फाइनल: क्वार्टर फाइनल में उन्होंने दुनिया की नंबर-5 खिलाड़ी को हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया था, जिससे यह उम्मीद जगी थी कि वह इस बार स्वर्ण पदक (Gold) जीतेंगी।

  3. मानसिक मजबूती: विशेषज्ञों का मानना है कि इस टूर्नामेंट में सिंधू की कोर्ट कवरेज और मानसिक दृढ़ता पहले से कहीं बेहतर नजर आई।


भारत की अन्य चुनौतियां: निराशाजनक रहा ओवरऑल प्रदर्शन

पीवी सिंधू की हार के साथ ही मलयेशिया ओपन में भारत का अभियान आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गया है। इस टूर्नामेंट में अन्य भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा:

  • लक्ष्य सेन और एचएस प्रणय: पुरुष एकल में भारत की मुख्य उम्मीदें शुरुआती दौर में ही बाहर हो गईं।

  • सात्विक-चिराग की जोड़ी: पुरुष युगल (Men’s Doubles) में दुनिया की पूर्व नंबर-1 जोड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी भी क्वार्टर फाइनल की बाधा पार नहीं कर सके।

  • महिला युगल: तनीषा क्रास्टो और अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी ने संघर्ष तो किया, लेकिन वे भी पदक की दौड़ से पहले ही बाहर हो गईं।


आगे की राह: चैंपियंस ट्रॉफी और ऑल इंग्लैंड पर नजरें

सिंधू के लिए यह हार एक “सीख” की तरह है। मैच के बाद उन्होंने कहा, “जाहिर है, मैं नतीजे से निराश हूं, लेकिन मुझे खुशी है कि मेरी लय वापस आ रही है। कुछ क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है, विशेष रूप से लंबी रैलियों के दौरान धैर्य बनाए रखने में।”

बैडमिंटन कैलेंडर में अब अगली बड़ी चुनौती इंडिया ओपन और उसके बाद प्रतिष्ठित ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप होगी। सिंधू का मौजूदा फॉर्म भारतीय प्रशंसकों को उम्मीद देता है कि वह आगामी बड़े टूर्नामेंटों में पोडियम फिनिश (पदक जीतना) हासिल करने में सफल रहेंगी।


निष्कर्ष

मलयेशिया ओपन 2026 भले ही भारत के लिए खाली हाथ रहा हो, लेकिन पीवी सिंधू का सेमीफाइनल तक का सफर यह बताता है कि उनमें अभी भी विश्व स्तर पर सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को चुनौती देने का माद्दा है। भारतीय बैडमिंटन प्रेमियों को अब उम्मीद होगी कि सिंधू अपनी कमियों को दूर कर अगले सप्ताह घरेलू मैदान पर होने वाले इंडिया ओपन में तिरंगा लहराएंगी।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️