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श्रीगंगानगर के ‘साइट्रस किंग’ किन्नू की चमक बढ़ी: देश-विदेश में बढ़ी मांग, बागवानों के चेहरे खिले

श्रीगंगानगर। राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर, जिसे ‘राजस्थान का अन्न कटोरा’ कहा जाता है, इन दिनों अपनी एक और खास पहचान ‘किन्नू’ (Kinnow) के कारण सुर्खियों में है। दिसंबर के महीने में जैसे-जैसे उत्तर भारत में ठंड और पाले का असर बढ़ रहा है, श्रीगंगानगर के प्रसिद्ध किन्नू की मिठास और इसकी सुनहरी चमक में भी इजाफा हो रहा है। इस साल न केवल स्थानीय मंडियों में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी श्रीगंगानगर के किन्नू की भारी मांग देखी जा रही है।


ठंड का असर: मिठास में वृद्धि और ‘वैक्सिंग’ का जादू

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, किन्नू की फसल के लिए गिरता हुआ तापमान एक वरदान की तरह होता है। रात के समय पड़ने वाली ठंड फल के भीतर एसिड की मात्रा को कम करती है और शर्करा (Sugar content) को बढ़ाती है। इसी वजह से दिसंबर के दूसरे सप्ताह तक आते-आते किन्नू का स्वाद खट्टा-मीठा होने के बजाय शहद जैसा मीठा होने लगता है।

इसके साथ ही, इस समय फल का रंग गहरा नारंगी (Deep Orange) हो जाता है। व्यापारी अब ‘वैक्सिंग प्लांट’ के जरिए इन फलों की चमक को और बढ़ा रहे हैं, जिससे यह फल लंबी दूरी की यात्रा के दौरान भी ताजा बना रहता है।


उत्पादन का आंकड़ा: 3 लाख मीट्रिक टन का अनुमान

इस सीजन में श्रीगंगानगर जिले में किन्नू का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर रहने की उम्मीद है। उद्यान विभाग के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष लगभग 3 लाख मीट्रिक टन किन्नू के उत्पादन का अनुमान लगाया गया है। जिले के अबोहर मार्ग, सादुलशहर, और पदमपुर बेल्ट में किन्नू के बागों में तुड़ाई का काम युद्ध स्तर पर शुरू हो चुका है।

भारी उत्पादन के बावजूद मांग इतनी अधिक है कि बागवानों को अच्छे दाम मिलने की उम्मीद बंधी है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार फल की गुणवत्ता बेहतर बताई जा रही है, क्योंकि कीटों का प्रभाव कम रहा है।


बाजार विस्तार: सात समंदर पार तक धाक

श्रीगंगानगर का किन्नू अब केवल स्थानीय मंडियों तक सीमित नहीं है। इसकी मांग के मुख्य केंद्र इस प्रकार हैं:

  • घरेलू बाजार: दिल्ली की आजादपुर मंडी, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दक्षिण भारत के राज्यों जैसे कर्नाटक और तमिलनाडु में श्रीगंगानगर के किन्नू की भारी खपत हो रही है।

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार: भारत का यह रसीला फल बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल और खाड़ी देशों (दुबई, सऊदी अरब) में निर्यात किया जा रहा है। विशेष रूप से रूस और यूक्रेन के बाजारों में भी इसके निर्यात की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।


आर्थिक प्रभाव और भाव में उछाल

वर्तमान में मंडी में किन्नू के भावों में स्थिरता बनी हुई है, लेकिन व्यापारियों और विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में, विशेष रूप से जनवरी की शुरुआत में, भावों में 20% से 30% तक की तेजी आ सकती है।

श्रेणी वर्तमान भाव (प्रति क्विंटल) अपेक्षित भाव (जनवरी)
उत्तम श्रेणी (Grade A) ₹2,500 – ₹3,200 ₹3,800+
मध्यम श्रेणी (Grade B) ₹1,500 – ₹2,200 ₹2,600+

इस उछाल से जिले की अर्थव्यवस्था को करोड़ों रुपये का लाभ होने की उम्मीद है। हजारों मजदूरों को तुड़ाई, पैकिंग और लोडिंग के काम में रोजगार मिल रहा है।


निष्कर्ष

श्रीगंगानगर का किन्नू न केवल एक फल है, बल्कि यह जिले की जीवनरेखा और किसानों की मेहनत का प्रतीक है। यदि सरकार प्रसंस्करण (Processing) इकाइयों और जूस फैक्ट्रियों को बढ़ावा दे, तो श्रीगंगानगर विश्व स्तर पर ‘ऑरेंज सिटी’ नागपुर को कड़ी टक्कर दे सकता है। फिलहाल, बागवान और व्यापारी दोनों ही इस सुनहरी फसल से अपनी तकदीर चमकते देख रहे हैं।

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