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ऐतिहासिक उपलब्धि: देश की 50,000 स्वास्थ्य सुविधाओं को मिला NQAS प्रमाणन, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में आया बड़ा बदलाव

भारतीय स्वास्थ्य सेवा के इतिहास में आज का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने घोषणा की है कि भारत की 50,000 सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं ने प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक’ (NQAS) प्रमाणन प्राप्त कर लिया है।

यह उपलब्धि केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि देश के दूर-दराज के गांवों से लेकर शहरों तक, सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली सुविधाओं का स्तर अब वैश्विक मानकों के बराबर पहुँच रहा है।


क्या है NQAS प्रमाणन और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

NQAS (National Quality Assurance Standards) सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए तैयार किए गए मानकों का एक समूह है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सेवाएं सुरक्षित, प्रभावी और उच्च गुणवत्ता वाली हों।

जब किसी अस्पताल को NQAS प्रमाणन मिलता है, तो इसका मतलब है कि उसने निम्नलिखित 8 प्रमुख क्षेत्रों में कड़े परीक्षणों को पास किया है:

  1. मरीज की देखभाल और अधिकार: क्या मरीजों के साथ सम्मानजनक व्यवहार हो रहा है?

  2. साफ-सफाई और संक्रमण नियंत्रण: अस्पताल परिसर कितना स्वच्छ है?

  3. नैदानिक सेवाएँ: लैब और एक्स-रे जैसी सुविधाएं कितनी सटीक हैं?

  4. गुणवत्ता प्रबंधन: अस्पताल का प्रशासन कितना चुस्त-दुरुस्त है?

  5. उपकरण और दवाइयां: क्या जीवन रक्षक दवाएं और मशीनें उपलब्ध और चालू हालत में हैं?


आयुष्मान आरोग्य मंदिर और सामुदायिक केंद्रों की बड़ी भूमिका

इस उपलब्धि में सबसे महत्वपूर्ण योगदान आयुष्मान आरोग्य मंदिर (पूर्व में AB-HWCs), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHCs) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) का रहा है।

  • जमीनी स्तर पर सुधार: 50,000 की इस संख्या में एक बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों का है। इसका सीधा मतलब है कि अब ग्रामीण आबादी को शहर के निजी अस्पतालों जैसी गुणवत्तापूर्ण सेवा अपने गांव के पास ही मिल रही है।

  • मरीजों का बढ़ता भरोसा: NQAS प्रमाणन के बाद सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या में 20-30% की वृद्धि देखी गई है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर जनता के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।


प्रमाणन की प्रक्रिया: एक कड़ी अग्निपरीक्षा

NQAS प्रमाणन प्राप्त करना कोई आसान काम नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य केंद्र को तीन स्तरों पर मूल्यांकन से गुजरना पड़ता है:

  1. स्व-मूल्यांकन (Self-Assessment): अस्पताल स्वयं अपनी कमियों को सुधारता है।

  2. राज्य स्तरीय जांच: राज्य की टीम मानकों की पुष्टि करती है।

  3. राष्ट्रीय स्तरीय बाहरी मूल्यांकन: केंद्र द्वारा भेजी गई स्वतंत्र टीम बिना किसी पूर्व सूचना के अस्पताल का दौरा करती है और मरीजों से फीडबैक लेती है।

जब कोई केंद्र 70% से अधिक अंक प्राप्त करता है, तभी उसे यह प्रमाण पत्र दिया जाता है।


भविष्य की राह: ‘क्वालिटी हेल्थकेयर फॉर ऑल’

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का लक्ष्य अब 2026 के अंत तक देश की सभी 1.5 लाख से अधिक उप-स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक केंद्रों को NQAS के दायरे में लाना है। सरकार का मानना है कि बुनियादी ढांचे के साथ-साथ ‘सेवा की गुणवत्ता’ (Quality of Service) पर ध्यान देने से ही भारत का ‘यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज’ का सपना पूरा होगा।

50,000 केंद्रों का प्रमाणित होना इस बात का संकेत है कि अब सरकारी अस्पताल केवल ‘मजबूरी’ का ठिकाना नहीं, बल्कि ‘भरोसे’ का केंद्र बन रहे हैं।

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