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श्रीगंगानगर सनसनी: डिजिटल अरेस्ट का मायाजाल और 26 लाख की लूट

श्रीगंगानगर जिले में साइबर क्राइम का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस प्रशासन और आम जनता के होश उड़ा दिए हैं। एक तरफ जहाँ हम तकनीक की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अपराधी इसी तकनीक का सहारा लेकर लोगों की जिंदगी भर की कमाई चंद घंटों में साफ कर रहे हैं। इस बार शिकार बने हैं एक रिटायर्ड बैंक कर्मचारी, जिन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर डराकर 26 लाख रुपये की चपत लगाई गई है।


कैसे बुना गया ठगी का जाल?

घटना की शुरुआत एक साधारण फोन कॉल से हुई। पीड़ित के पास एक अनजान नंबर से कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को टेलीकॉम विभाग का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि पीड़ित के नाम पर जारी एक सिम कार्ड का उपयोग गैर-कानूनी गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग में किया जा रहा है।

जब पीड़ित ने इससे इनकार किया, तो कॉल को तुरंत एक फर्जी CBI (सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन) और ED (प्रवर्तन निदेशालय) अधिकारी को ट्रांसफर कर दिया गया। ठगों ने पीड़ित को विश्वास दिलाने के लिए बकायदा पुलिस स्टेशन जैसा बैकग्राउंड सेटअप इस्तेमाल किया और पुलिस की वर्दी पहनकर वीडियो कॉल की।

16 घंटे की ‘डिजिटल कैद’

अपराधियों ने पीड़ित पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए “डिजिटल अरेस्ट” शब्द का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि “सुप्रीम कोर्ट के आदेश” के अनुसार, जांच पूरी होने तक उन्हें वीडियो कॉल पर ही रहना होगा।

  • पीड़ित को 16-16 घंटे तक कैमरे के सामने बैठने पर मजबूर किया गया।

  • उन्हें किसी से भी बात करने या फोन काटने पर तुरंत जेल भेजने की धमकी दी गई।

  • ठगों ने पीड़ित को इतना डरा दिया कि उन्हें लगा कि उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा दांव पर है।

FD तुड़वाकर ट्रांसफर किए पैसे

ठगों ने पीड़ित से कहा कि उनके बैंक खातों की “सरकारी जांच” होनी है। जांच के नाम पर उन्होंने पीड़ित को मजबूर किया कि वह अपनी पुरानी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को समय से पहले तुड़वाएं और सारा पैसा उनके द्वारा बताए गए “सरकारी सुरक्षित खातों” में ट्रांसफर कर दें। घबराहट में आकर पीड़ित ने कुल 26 लाख रुपये अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए ठगों के हवाले कर दिए। जब पैसे ट्रांसफर हो गए, तो ठगों ने कॉल काट दिया और गायब हो गए।


पुलिस की कार्रवाई और जांच

होश में आने पर जब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ, तो उन्होंने श्रीगंगानगर के साइबर थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात ठगों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनके बैंक खातों और मोबाइल लोकेशन को ट्रेस करना शुरू कर दिया है। प्राथमिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह गैंग राजस्थान के बाहर (संभवतः जामताड़ा या मेवात क्षेत्र) से ऑपरेट कर रहा है।

बचाव के लिए जरूरी बातें (SOP)

श्रीगंगानगर पुलिस ने नागरिकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है:

  1. कानूनी तथ्य: भारत में “डिजिटल अरेस्ट” जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करती।

  2. गोपनीयता: पुलिस या ED कभी भी वीडियो कॉल पर पैसे की मांग या खातों की जांच नहीं करती।

  3. तुरंत कार्रवाई: यदि आपके साथ ऐसा कुछ होता है, तो तुरंत 1930 डायल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।


यह घटना इस बात का प्रमाण है कि ठग अब केवल अनपढ़ लोगों को ही नहीं, बल्कि बैंक अधिकारियों जैसे जानकार लोगों को भी निशाना बना रहे हैं।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️