
राजस्थान का उत्तरी जिला श्रीगंगानगर वर्तमान में भीषण शीतलहर और कड़ाके की ठंड की चपेट में है। सीमावर्ती क्षेत्र होने और हिमालय की ओर से आने वाली बर्फीली हवाओं के सीधे प्रभाव के कारण यहाँ जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। इसी गंभीर स्थिति और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
जिला कलेक्टर का आदेश और अवकाश का विस्तार
श्रीगंगानगर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने संयुक्त रूप से निर्णय लेते हुए जिले के कक्षा 5वीं तक के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में 12 जनवरी 2026 तक छुट्टियां बढ़ाने का आदेश जारी किया है। इससे पहले शीतकालीन अवकाश समाप्त होने वाले थे, लेकिन तापमान में लगातार आ रही गिरावट और सुबह के समय घने कोहरे को देखते हुए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था।
प्रशासन का मानना है कि छोटे बच्चों के लिए सुबह के समय स्कूल जाना न केवल मुश्किल है, बल्कि यह उनके स्वास्थ्य के लिए भी जोखिम भरा हो सकता है। अत्यधिक ठंड के कारण निमोनिया और सर्दी-जुकाम जैसे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, कक्षा 6 से 12वीं तक की कक्षाओं के लिए समय में बदलाव किया गया है ताकि बड़े छात्रों की पढ़ाई का अधिक नुकसान न हो।
मौसम का मिजाज: $8.6^\circ\text{C}$ तक गिरा पारा
मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, आज श्रीगंगानगर का न्यूनतम तापमान $8.6^\circ\text{C}$ दर्ज किया गया। पिछले कुछ दिनों से रात और सुबह के समय पारा लगातार नीचे जा रहा है।
ठंड का असर केवल तापमान तक सीमित नहीं है:
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घना कोहरा: सुबह के समय दृश्यता (Visibility) घटकर 50 मीटर से भी कम रह गई है, जिससे श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ हाईवे और अन्य संपर्क सड़कों पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।
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शीतलहर: ‘कोल्ड वेव’ के कारण घरों के अंदर भी ठिठुरन महसूस की जा रही है।
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आगामी पूर्वानुमान: मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले 4-5 दिनों तक राहत मिलने के आसार कम हैं। पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने से पारा और गिर सकता है।
जनजीवन पर प्रभाव
कड़ाके की इस ठंड ने जिले की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।
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बाजारों की स्थिति: सुबह 10-11 बजे तक बाजारों में सन्नाटा पसरा रहता है। लोग केवल जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं।
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मजदूरों की समस्या: दैनिक मजदूरी करने वाले लोगों के लिए यह मौसम सबसे कठिन साबित हो रहा है। प्रशासन ने प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर अलाव (Bonfires) की व्यवस्था की है।
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रैन बसेरे: जिला प्रशासन ने बेघर लोगों के लिए रैन बसेरों में पुख्ता इंतजाम किए हैं, जहाँ कंबल और गर्म पानी की सुविधा सुनिश्चित की गई है।
स्वास्थ्य विभाग की सलाह
डॉक्टरों ने स्थानीय नागरिकों, विशेषकर बुजुर्गों और बच्चों को सलाह दी है कि वे सुबह और शाम की ठंड से बचें।
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बाहर निकलते समय परतों वाले गर्म कपड़े पहनें।
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सिर और कान को ढककर रखें।
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गुनगुने पानी का सेवन करें और आहार में विटामिन-सी युक्त चीजों को शामिल करें।
श्रीगंगानगर में सर्दी का यह दौर फिलहाल थमने वाला नहीं है। ऐसे में प्रशासन की ओर से दी गई यह राहत छोटे बच्चों के परिवारों के लिए काफी सुकून भरी है।