
श्रीगंगानगर। राजस्थान के अन्न का कटोरा कहे जाने वाले श्रीगंगानगर जिले में एक बार फिर किसान और प्रशासन आमने-सामने हैं। सिंचाई पानी की कमी और आगामी प्रस्तावित नहरबंदी (Canal Closure) को लेकर जिले के अन्नदाताओं का धैर्य जवाब दे गया है। आज, 6 जनवरी 2026 को विभिन्न किसान संगठनों की हुई संयुक्त बैठक में प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए 12 जनवरी को जिला मुख्यालय के मुख्य केंद्र, महाराजा गंगा सिंह चौक पर विशाल प्रदर्शन और महापड़ाव का अल्टीमेटम दिया गया है।
विवाद की मुख्य जड़: प्रस्तावित नहरबंदी और सूचना का अभाव
किसानों की नाराजगी का सबसे बड़ा कारण सिंचाई विभाग द्वारा नहरबंदी को लेकर बरती जा रही गोपनीयता और ढुलमुल रवैया है। रबी की सीजन (विशेषकर गेहूं और सरसों) इस समय अपने सबसे महत्वपूर्ण चरण में है।
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फसलों का संकट: गेहूं की फसल को इस समय नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है। यदि इस समय पानी की कटौती की जाती है, तो दाने का आकार छोटा रह जाएगा और पैदावार में भारी गिरावट आएगी।
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भ्रम की स्थिति: किसानों का आरोप है कि प्रशासन यह स्पष्ट नहीं कर रहा है कि नहरबंदी कितने दिनों की होगी और यह कब से शुरू होगी। बिना पूर्व सूचना के पानी रोकने से खेतों में खड़ी फसलें सूखने की कगार पर पहुँच सकती हैं।
किसानों की प्रमुख माँगे
किसान संगठनों ने प्रशासन के सामने तीन प्रमुख माँगे रखी हैं:
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स्पष्ट सूचना: नहरबंदी की सही तारीख और अवधि की आधिकारिक घोषणा तुरंत की जाए।
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वैकल्पिक व्यवस्था: यदि मरम्मत कार्य के लिए नहरबंदी अनिवार्य है, तो फसलों को बचाने के लिए वैकल्पिक ‘पीने के पानी’ और ‘जीवन रक्षक सिंचाई’ (Life-saving irrigation) की गारंटी दी जाए।
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पर्याप्त पानी की बारी: वर्तमान में चल रही सिंचाई की बारी (Pary) में पानी का गेज पूरा रखा जाए ताकि अंतिम छोर (Tail) के किसानों तक पानी पहुँच सके।
12 जनवरी का अल्टीमेटम: ‘करो या मरो’ की स्थिति
किसान नेताओं का कहना है कि उन्होंने बार-बार सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपे हैं, लेकिन केवल आश्वासन ही मिले हैं। इसी के विरोध में 12 जनवरी 2026 को जिले भर से हजारों की संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ श्रीगंगानगर शहर कूच करेंगे।
महाराजा गंगा सिंह चौक पर प्रस्तावित इस प्रदर्शन को लेकर किसान संगठनों ने गांवों में जनसंपर्क अभियान शुरू कर दिया है। किसान नेताओं ने साफ कर दिया है कि यदि 12 जनवरी तक पानी की समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो यह प्रदर्शन अनिश्चितकालीन धरने में बदल सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
कृषि अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा
श्रीगंगानगर की पूरी अर्थव्यवस्था सिंचाई पानी पर टिकी है। यदि नहरबंदी का समय सही तरीके से प्रबंधित नहीं किया गया, तो न केवल किसानों का निजी नुकसान होगा, बल्कि मंडियों में आवक कम होने से व्यापारियों और मजदूरों पर भी इसका बुरा असर पड़ेगा। किसानों का कहना है कि “जब तक खेत में पानी नहीं, तब तक प्रशासन को चैन से बैठने नहीं देंगे।”
प्रशासनिक प्रतिक्रिया: दूसरी ओर, सिंचाई विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि नहरों की मरम्मत और सफाई आगामी खरीफ सीजन के लिए अनिवार्य है। प्रशासन अब किसानों के साथ बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है ताकि आंदोलन को टाला जा सके।