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फैशन की दुनिया में ‘शांति का शोर’: 2026 में छा गया ‘क्लाउड डांसर’ और ‘शांत सुंदरता’ का जादू

मुंबई। भारतीय फैशन जगत ने साल 2026 के आगमन के साथ ही एक नई और परिपक्व दिशा की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। पिछले कुछ सालों से चल रहे ‘लाउड लोगो’ (Loud Logos) और भड़कीले रंगों के दौर को पीछे छोड़ते हुए अब भारतीय उपभोक्ता और डिजाइनर्स ‘शांत सुंदरता’ (Quiet Elegance) के दीवाने हो रहे हैं। इस साल का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब कपड़े आपके स्टेटस का दिखावा नहीं, बल्कि आपकी आंतरिक शांति और शालीनता का प्रतिबिंब बन रहे हैं।

विशेषज्ञों ने साल 2026 के लिए ‘क्लाउड डांसर’ (Cloud Dancer) को ‘कलर ऑफ द ईयर’ घोषित किया है, जो इस पूरे बदलाव का मुख्य केंद्र है।


क्या है ‘क्लाउड डांसर’ और इसका महत्व?

‘क्लाउड डांसर’ सफ़ेद रंग का एक बहुत ही नरम और मलाईदार (Creamy White) शेड है। यह न तो पूरी तरह से सफेद है और न ही ऑफ-वाइट; यह बादलों की उस कोमलता जैसा है जो शांति और स्थिरता का अहसास कराता है।

  • मनोवैज्ञानिक प्रभाव: विशेषज्ञों का मानना है कि भागदौड़ भरी और शोर-शराबे वाली डिजिटल दुनिया में, ‘क्लाउड डांसर’ जैसे शांत रंग मानसिक राहत प्रदान करते हैं।

  • वैश्विक अपील: इस रंग की खूबी यह है कि यह हर स्किन टोन पर जमता है और इसे सोने (Gold) या चांदी (Silver) के गहनों के साथ आसानी से स्टाइल किया जा सकता है।

‘रीस्ट्रेंट एंड ग्रेस’: संयम ही नया स्टाइल है

भारतीय डिजाइनर्स, जिनमें सब्यसाची से लेकर उभरते हुए नए कलाकार शामिल हैं, अब ‘संयम और शालीनता’ (Restraint & Grace) पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

  1. भारी काम से दूरी: अब कपड़ों पर भारी जदोर्ज़ी या चमकीले सितारों के बजाय ‘टोन-ऑन-टोन’ एम्ब्रॉयडरी और महीन हाथ की बुनाई को पसंद किया जा रहा है।

  2. ब्रांडिंग की कमी: कपड़ों पर बड़े-बड़े ब्रांड लोगो के बजाय अब ‘साइलेंट लग्जरी’ का बोलबाला है। यानी कपड़ा और उसकी फिटिंग इतनी बेहतरीन होती है कि उसे किसी ब्रांड के ठप्पे की जरूरत नहीं पड़ती।

  3. नेचुरल फैब्रिक: इस साल लिनन, ऑर्गेनिक कॉटन, और हाथ से बुनी सिल्क (Handloom Silk) की मांग में 40% की बढ़ोतरी देखी गई है।

मल्टीपर्पज क्लोदिंग: ‘सस्टेनेबल’ है नया फैशन

2026 में उपभोक्ता अब ‘फास्ट फैशन’ से ऊबकर ‘लॉन्ग-लास्टिंग’ कपड़ों की ओर बढ़ रहे हैं। मल्टीपर्पज क्लोदिंग (बहुउद्देशीय कपड़े) इस साल का सबसे व्यावहारिक ट्रेंड है।

  • वर्सेटाइल स्टाइल: अब ऐसे लहंगे डिजाइन किए जा रहे हैं जिन्हें शादी के बाद भारी ब्लाउज के बजाय शर्ट या क्रॉप टॉप के साथ साधारण पार्टी में पहना जा सके।

  • यूनिसेक्स और ओवरसाइज्ड: जैकेट और ओवरकोट्स को इस तरह बनाया जा रहा है कि उन्हें परिवार का कोई भी सदस्य पहन सके।

  • किफायती और पर्यावरण के अनुकूल: एक ही कपड़े को अलग-अलग तरीके से पहनकर लोग न केवल पैसे बचा रहे हैं, बल्कि पर्यावरण को भी होने वाले नुकसान को कम कर रहे हैं।

निष्कर्ष: दिखावे से व्यक्तित्व की ओर

फैशन जगत का यह बदलाव यह दर्शाता है कि 2026 का भारतीय युवा अब बाहरी दिखावे के बजाय अपने व्यक्तित्व की गहराई को महत्व दे रहा है। ‘शांत सुंदरता’ और ‘क्लाउड डांसर’ रंग मिलकर एक ऐसे समाज का निर्माण कर रहे हैं जो सादगी में ही सबसे बड़ा सौंदर्य देखता है।

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