
नई दिल्ली। हाल ही में जारी एक स्वास्थ्य रिपोर्ट ने देश के युवाओं और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच चिंता की लहर पैदा कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में किडनी फेलियर (Chronic Kidney Disease) के मामले अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहे हैं। खराब जीवनशैली और अनजाने में की गई गलतियों के कारण अब 30 से 40 वर्ष की आयु के युवा भी तेजी से इस गंभीर बीमारी की चपेट में आ रहे हैं।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते आदतों में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले कुछ वर्षों में भारत ‘किडनी रोगों की वैश्विक राजधानी’ बन सकता है।
किडनी खराब होने के मुख्य कारण
आधुनिक जीवनशैली में कुछ ऐसी आदतें शुमार हो गई हैं जो हमारी किडनी पर सीधा प्रहार कर रही हैं:
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पेनकिलर्स का अंधाधुंध सेवन: सिरदर्द या बदन दर्द होने पर बिना डॉक्टरी सलाह के ‘ओवर-द-काउंटर’ पेनकिलर्स (NSAIDS) लेना किडनी के लिए जहर के समान है। ये दवाएं किडनी में रक्त के प्रवाह को कम करती हैं और धीरे-धीरे उसे डैमेज कर देती हैं।
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बिना सलाह हाई-प्रोटीन डाइट: जिम जाने वाले युवाओं में ‘मसल्स’ बनाने के चक्कर में अत्यधिक प्रोटीन सप्लीमेंट्स लेने का चलन बढ़ा है। बिना विशेषज्ञ की सलाह और पर्याप्त पानी के सेवन के, यह हाई-प्रोटीन लोड किडनी की फिल्टर करने की क्षमता को खत्म कर देता है।
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अत्यधिक नमक और प्रोसेस्ड फूड: जंक फूड और पैकेट बंद खाद्य पदार्थों में सोडियम की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो उच्च रक्तचाप (Hypertension) का कारण बनती है और अंततः किडनी को नुकसान पहुँचाती है।
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मधुमेह और उच्च रक्तचाप की अनदेखी: बदलती जीवनशैली के कारण युवाओं में शुगर और बीपी की समस्या बढ़ रही है। ये दोनों बीमारियां किडनी फेलियर के सबसे बड़े कारण हैं।
किडनी फेलियर के शुरुआती संकेत
किडनी की बीमारी को ‘साइलेंट किलर’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते। फिर भी, कुछ संकेतों पर गौर करना जरूरी है:
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टखनों, पैरों या आँखों के नीचे सूजन आना।
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रात के समय बार-बार पेशाब आना या पेशाब में झाग बनना।
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हर समय थकान और कमजोरी महसूस होना।
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भूख न लगना और सांस फूलना।
निवारक स्वास्थ्य जांच (Preventive Health Checkup) की अहमियत
वर्ष 2026 के लिए विशेषज्ञों ने सबसे बड़ी सलाह यह दी है कि ‘निवारक स्वास्थ्य जांच’ को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। किडनी 70-80% तक खराब होने के बाद ही गंभीर लक्षण दिखाती है। इसलिए, साल में कम से कम एक बार KFT (Kidney Function Test) और यूरिन टेस्ट जरूर करवाएं। यह जांच बेहद सस्ती है और किसी भी बड़े खतरे को पहले ही भांप सकती है।
बचाव के लिए क्या करें?
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पर्याप्त पानी पिएं: शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने के लिए दिन भर में कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं।
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स्व-उपचार (Self-Medication) से बचें: बिना डॉक्टर के पर्चे के एंटीबायोटिक्स या दर्द निवारक दवाएं न लें।
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सक्रिय रहें: नियमित व्यायाम करें ताकि रक्तचाप और वजन नियंत्रण में रहे।
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नमक कम करें: खाने में ऊपर से नमक डालने की आदत छोड़ें।
निष्कर्ष: 40 की उम्र से पहले किडनी का फेल होना न केवल व्यक्तिगत बल्कि पूरे परिवार के लिए आर्थिक और मानसिक संकट पैदा करता है। अपनी किडनी की सेहत आपके अपने हाथों में है। आज की सतर्कता ही कल का स्वस्थ जीवन सुनिश्चित करेगी।