
नई दिल्ली/वाशिंगटन। चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में आज एक क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिला है। दुनिया भर के लाखों थैलेसीमिया (Thalassemia) रोगियों के लिए एक ऐतिहासिक खबर आई है। स्वास्थ्य नियामक संस्था (FDA) ने ‘मिटापिवत’ (Mitapivat) नामक पहली ओरल दवा (मुंह से ली जाने वाली गोली) को मंजूरी दे दी है। यह दवा थैलेसीमिया से पीड़ित वयस्कों में एनीमिया (खून की कमी) के इलाज के लिए एक ‘गेम-चेंजर’ साबित होने वाली है।
अब तक इस बीमारी का सामना कर रहे मरीजों के पास बार-बार अस्पताल जाकर खून चढ़वाने (Blood Transfusion) के अलावा बहुत कम विकल्प मौजूद थे।
क्या है थैलेसीमिया और पुरानी चुनौतियां?
थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है जिसमें शरीर पर्याप्त मात्रा में हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता है। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) का वह हिस्सा है जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन ले जाता है। हीमोग्लोबिन की कमी से मरीज को गंभीर एनीमिया हो जाता है।
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ट्रांसफ्यूजन की निर्भरता: मरीजों को जीवित रहने के लिए हर 15-30 दिन में खून चढ़वाना पड़ता है।
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आयरन ओवरलोड: बार-बार खून चढ़वाने से शरीर में आयरन (लोहा) की मात्रा बहुत बढ़ जाती है, जिससे लिवर और हृदय को नुकसान पहुँचता है।
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जीवन की गुणवत्ता: लगातार अस्पताल के चक्कर और सुइयों का दर्द मरीजों के मानसिक और सामाजिक जीवन को प्रभावित करता है।
‘मिटापिवत’ (Mitapivat) कैसे काम करती है?
यह नई दवा पारंपरिक उपचारों से बिल्कुल अलग है। यह एक ‘पायरूवेट काइनेज’ (Pyruvate Kinase) एक्टिवेटर है। सरल शब्दों में कहें तो:
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ऊर्जा का स्तर: यह दवा लाल रक्त कोशिकाओं के भीतर एंजाइमों को सक्रिय करती है, जिससे कोशिकाओं की ऊर्जा का स्तर बढ़ता है।
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RBC की लंबी उम्र: यह लाल रक्त कोशिकाओं को जल्दी टूटने से बचाती है और उनकी उम्र बढ़ाती है।
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प्राकृतिक हीमोग्लोबिन: यह शरीर को स्वयं हीमोग्लोबिन के स्तर को बेहतर बनाने में मदद करती है, जिससे बाहर से खून चढ़वाने की आवश्यकता धीरे-धीरे कम हो जाती है।
मरीजों के लिए ‘वरदान’ क्यों है यह दवा?
क्लिनिकल ट्रायल के दौरान यह देखा गया कि जिन मरीजों ने ‘मिटापिवत’ का सेवन किया, उनके हीमोग्लोबिन के स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
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इंजेक्शन से मुक्ति: यह एक गोली (Oral Tablet) है, जिसे घर पर आसानी से लिया जा सकता है।
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अस्पताल के चक्करों में कमी: इस दवा के नियमित सेवन से ब्लड ट्रांसफ्यूजन के बोझ में 30% से 50% तक की कमी देखी गई है।
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लागत और सुलभता: हालांकि शुरुआत में नई दवाएं महंगी होती हैं, लेकिन लंबे समय में यह अस्पताल के खर्चों और ट्रांसफ्यूजन की जटिलताओं के मुकाबले सस्ती साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों की राय
रक्त रोग विशेषज्ञों (Hematologists) का कहना है कि थैलेसीमिया के क्षेत्र में पिछले कई दशकों में यह सबसे बड़ा विकास है। अब तक हम केवल लक्षणों का इलाज कर रहे थे, लेकिन यह दवा कोशिका के स्तर पर जाकर कार्य करती है। यह उन मरीजों के लिए आशा की नई किरण है जो गंभीर एनीमिया के कारण स्थायी थकान और कमजोरी महसूस करते थे।
निष्कर्ष: भविष्य की राह
‘मिटापिवत’ को मिली यह मंजूरी एनीमिया के अन्य प्रकारों के इलाज के लिए भी नए रास्ते खोलेगी। वर्तमान में यह वयस्कों के लिए स्वीकृत है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही बच्चों के लिए भी इसके ट्रायल सफल होंगे। भारत जैसे देश में, जहाँ थैलेसीमिया के मरीजों की संख्या बहुत अधिक है, इस दवा की उपलब्धता लाखों परिवारों का जीवन बदल सकती है।