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सरहद पर ‘सख्त पहरा’: श्रीगंगानगर में ड्रोन तस्करी के खिलाफ BSF और पुलिस का मेगा सर्च ऑपरेशन, हाई अलर्ट पर सुरक्षा एजेंसियां

श्रीगंगानगर। भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बना दिया गया है। पिछले कुछ समय में सीमा पार से ड्रोन (Drone) के जरिए मादक पदार्थों और हथियारों की तस्करी की बढ़ती घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। 5 जनवरी को सीमा सुरक्षा बल (BSF) और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से एक व्यापक तलाशी अभियान (Search Operation) छेड़ दिया है, जिससे तस्करों और असामाजिक तत्वों में हड़कंप मचा हुआ है।

ड्रोन तकनीक बनी बड़ी चुनौती

हाल के हफ्तों में श्रीगंगानगर के सीमावर्ती गांवों जैसे केसरीसिंहपुर, गजसिंहपुर और रायसिंहनगर सेक्टर में आधी रात को ड्रोन की गूंज सुनाई देने की घटनाएं बढ़ी हैं। पाकिस्तानी तस्कर अब पारंपरिक रास्तों के बजाय अत्याधुनिक ड्रोन का इस्तेमाल कर हेरोइन और अन्य नशीले पदार्थों की खेप भारतीय सीमा में गिरा रहे हैं। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए BSF ने न केवल अपनी गश्त बढ़ाई है, बल्कि ‘एंटी-ड्रोन सिस्टम’ और हाई-टेक कैमरों का उपयोग भी शुरू कर दिया है।

BSF और पुलिस का संयुक्त ‘कॉम्बिंग’ ऑपरेशन

आज सुबह से ही श्रीगंगानगर के जीरो लाइन से सटे गांवों में BSF के जवानों और राजस्थान पुलिस की टुकड़ियों ने संयुक्त मोर्चा संभाला। इस अभियान के तहत:

  • संदिग्ध ठिकानों की जांच: सीमा के पास स्थित पुराने ढाबों, सुनसान मकानों और खेतों में बने कोठों की सघन तलाशी ली जा रही है।

  • ग्रामीणों के साथ समन्वय: सुरक्षा बलों ने सीमावर्ती ग्रामीणों के साथ बैठकें की हैं और उन्हें निर्देश दिया है कि यदि रात के समय आसमान में कोई संदिग्ध रोशनी या उड़ती हुई वस्तु दिखाई दे, तो तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को सूचित करें।

  • नाकाबंदी और चेकिंग: जिले के सभी मुख्य मार्गों पर नाकाबंदी कर वाहनों की तलाशी ली जा रही है ताकि सीमा पार से आई किसी भी खेप को शहर के भीतर ले जाने से रोका जा सके।

नशा तस्करों के नेटवर्क पर प्रहार

श्रीगंगानगर पुलिस ने जिले के भीतर सक्रिय स्थानीय तस्करों और ‘रिसीवर्स’ के खिलाफ भी अभियान तेज कर दिया है। पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार, उन संदिग्ध व्यक्तियों की सूची तैयार की गई है जो पहले भी मादक पदार्थों की तस्करी में संलिप्त रहे हैं। पुलिस का मानना है कि सीमा पार से आने वाले नशे को ठिकाने लगाने में स्थानीय नेटवर्क की बड़ी भूमिका होती है। आज की कार्रवाई में कई संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है और उनके मोबाइल डेटा की जांच की जा रही है।

हाई अलर्ट और रणनीतिक सुरक्षा

5 जनवरी की इस बड़ी कार्रवाई का उद्देश्य तस्करों के मंसूबों को नाकाम करना और देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। घने कोहरे (Dense Fog) का फायदा उठाकर अक्सर तस्कर घुसपैठ या तस्करी की कोशिश करते हैं, इसलिए कड़कड़ाती ठंड और कोहरे के बावजूद जवान सीमा पर 24 घंटे मुस्तैद हैं। खुफिया विभाग (Intelligence Bureau) भी सक्रिय है और संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रख रहा है।

निष्कर्ष: जीरो टॉलरेंस की नीति

श्रीगंगानगर प्रशासन और सुरक्षा बलों ने साफ कर दिया है कि राष्ट्र की सुरक्षा और युवाओं के भविष्य (नशे के खिलाफ) से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। यह संयुक्त अभियान न केवल तस्करी को रोकने के लिए है, बल्कि सीमावर्ती निवासियों में सुरक्षा का भाव पैदा करने के लिए भी है।

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