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श्रीगंगानगर में ‘कोल्ड टॉर्चर’: घने कोहरे की चादर में लिपटा सीमावर्ती शहर, जनजीवन पूरी तरह प्रभावित

श्रीगंगानगर। राजस्थान का ‘अन्न कटोरा’ कहा जाने वाला सीमावर्ती जिला श्रीगंगानगर इन दिनों भीषण शीतलहर और घने कोहरे की चपेट में है। नए साल के आगाज के साथ ही मौसम के मिजाज में आए इस बदलाव ने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। आज, 5 जनवरी की सुबह शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में कुहासे का ऐसा मंजर देखा गया कि मानों पूरा इलाका सफेद चादर में लिपट गया हो।

विजिबिलिटी शून्य के करीब, यातायात ठप

आज सुबह दृश्यता (Visibility) इस कदर गिर गई कि 20 मीटर की दूरी पर खड़ा व्यक्ति या वाहन भी दिखाई नहीं दे रहा था। राजमार्गों पर वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है। श्रीगंगानगर-बीकानेर और श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ मार्ग पर चलने वाली गाड़ियां हेडलाइट और फॉग लाइट जलाकर रेंगती हुई नजर आईं। घने कोहरे के कारण लंबी दूरी की ट्रेनें अपने निर्धारित समय से कई घंटे देरी से चल रही हैं, जिससे यात्रियों को रेलवे स्टेशनों पर भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

तापमान में भारी गिरावट और ‘कोल्ड डे’ की स्थिति

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, श्रीगंगानगर का न्यूनतम तापमान गिरकर 7°C के आसपास पहुंच गया है। बर्फीली उत्तरी हवाओं ने ठिठुरन को और बढ़ा दिया है। दिन के समय भी सूरज के दर्शन नहीं होने से अधिकतम तापमान में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे दिन भर लोग ठिठुरते नजर आए। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले 48 से 72 घंटों तक ‘कोल्ड डे’ (Cold Day) की स्थिति बनी रहेगी और शीतलहर का प्रकोप और गहरा सकता है।

आम जनजीवन और स्वास्थ्य पर असर

कड़ाके की ठंड ने सबसे ज्यादा दिहाड़ी मजदूरों, रेहड़ी-पटरी वालों और बेघर लोगों को प्रभावित किया है। शहर के सार्वजनिक चौराहों पर लोग अलाव जलाकर ठंड से बचने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। वहीं, डॉक्टरों ने सलाह दी है कि इस मौसम में बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ख्याल रखा जाए। कोहरे और ठंड के कारण सांस की बीमारी और हृदय रोगियों के लिए जोखिम बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग ने अनावश्यक रूप से सुबह और देर रात घर से बाहर न निकलने की हिदायत दी है।

खेती-किसानी के लिए मिला-जुला असर

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह कोहरा और ठंड रबी की फसलों, विशेषकर गेहूं और सरसों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। नमी और कम तापमान से गेहूं के दानों में भराव अच्छा होता है। हालांकि, यदि पाला (Frost) पड़ता है, तो सब्जियों की फसलों को नुकसान होने की आशंका भी बनी हुई है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे पाले से बचाव के लिए खेतों की मेड़ों पर धुआं करें या हल्की सिंचाई करें।

प्रशासनिक सतर्कता

जिला प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रैन बसेरों में पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने अपील की है कि लोग कोहरे के दौरान वाहन चलाते समय सावधानी बरतें और गति सीमा का पालन करें।

निष्कर्ष: श्रीगंगानगर फिलहाल ‘डीप फ्रीज’ वाली स्थिति में है। जब तक धूप नहीं निकलती, तब तक राहत की उम्मीद कम ही है। प्रशासन और मौसम विभाग दोनों ही आगामी कुछ दिनों के लिए हाई अलर्ट पर हैं।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️