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श्रीगंगानगर में ‘ग्रे-इमरजेंसी’: AQI 316 के पार, कोहरे और स्मॉग के घातक मेल से सांसों पर संकट

श्रीगंगानगर: राजस्थान का ‘अन्न कटोरा’ कहा जाने वाला श्रीगंगानगर शहर आज एक गंभीर स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति से गुजर रहा है। भीषण ठंड और कोहरे के बीच शहर की वायु गुणवत्ता (Air Quality) खतरनाक स्तर तक गिर गई है। आज दर्ज किया गया वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 316 रहा, जो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के अनुसार ‘बेहद खराब’ (Very Poor) श्रेणी में आता है। यह स्थिति न केवल सामान्य जनजीवन को प्रभावित कर रही है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बन गई है।

स्मॉग का कहर: कोहरा बना जानलेवा

श्रीगंगानगर में इस समय साधारण कोहरा नहीं, बल्कि ‘स्मॉग’ (Smog) छाया हुआ है। स्मॉग तब बनता है जब हवा में मौजूद प्रदूषक कण (जैसे धूल, धुआं और रसायनों के बारीक कण) कोहरे की नमी के साथ मिल जाते हैं। कम तापमान और हवा की धीमी गति के कारण ये प्रदूषक जमीन के करीब ही जम जाते हैं, जिससे एक जहरीली चादर बन जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि हवा में PM 2.5 और PM 10 का स्तर सामान्य से कई गुना अधिक है। ये सूक्ष्म कण सांस के जरिए फेफड़ों और रक्तप्रवाह तक पहुँच जाते हैं, जो दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनते हैं।

स्वास्थ्य पर प्रभाव: अस्पताल में बढ़ रही भीड़

वायु प्रदूषण की इस गंभीर स्थिति का असर अब अस्पतालों में भी दिखने लगा है। जिला अस्पताल और निजी क्लीनिकों में सांस की तकलीफ, लगातार खांसी, सीने में जकड़न और आंखों में जलन की शिकायतों वाले मरीजों की संख्या में 30-40% की बढ़ोतरी हुई है।

स्वास्थ्य विभाग की एडवायजरी: मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने एक विशेष स्वास्थ्य परामर्श जारी किया है:

  • बुजुर्ग और बच्चे: सबसे अधिक जोखिम वाले समूहों (बुजुर्ग, बच्चे और गर्भवती महिलाएं) को सुबह और देर शाम घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है।

  • आउटडोर गतिविधियाँ: जब तक सूर्य की रोशनी से स्मॉग कम न हो जाए, तब तक मॉर्निंग वॉक या भारी व्यायाम से बचें।

  • मास्क का उपयोग: बाहर निकलते समय N-95 मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।

प्रदूषण के मुख्य कारण

श्रीगंगानगर में प्रदूषण के इस स्तर के पीछे कई स्थानीय और मौसमी कारण जिम्मेदार हैं:

  1. तापमान का गिरना: ठंड के कारण हवा भारी हो जाती है, जिससे प्रदूषक ऊपर नहीं जा पाते (Inversion Layer)।

  2. वाहनों का धुआं: शहर की सड़कों पर बढ़ते वाहनों और ट्रैफिक जाम के कारण निकलने वाला धुआं इस जहरीली हवा में इजाफा कर रहा है।

  3. निर्माण कार्य: शहर और आसपास के क्षेत्रों में चल रहे निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल भी एक बड़ा कारक है।

  4. कृषि अपशिष्ट: पड़ोसी राज्यों और स्थानीय क्षेत्रों में कचरा या कृषि अवशेष जलाने की छिटपुट घटनाएं हवा को और दूषित कर रही हैं।

प्रशासनिक कदम और सुझाव

प्रदूषण के इस बढ़ते स्तर को देखते हुए नागरिक समाज और पर्यावरणविदों ने प्रशासन से कड़े कदम उठाने की मांग की है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि नगर परिषद को सड़कों पर पानी का छिड़काव करना चाहिए ताकि धूल के कण बैठ सकें। साथ ही, प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों और अवैध औद्योगिक इकाइयों पर सख्ती बरतने की आवश्यकता है।

निष्कर्ष

श्रीगंगानगर की हवा का ‘बेहद खराब’ होना एक चेतावनी है। यह न केवल मौसम की मार है, बल्कि मानवीय गतिविधियों का भी परिणाम है। जब तक हवा की गति तेज नहीं होती या बारिश नहीं होती, तब तक राहत की उम्मीद कम है। तब तक, खुद को सुरक्षित रखना ही एकमात्र उपाय है।

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