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श्रीगंगानगर पुलिस की बड़ी स्ट्राइक: लॉरेंस बिश्नोई गैंग का ‘मनी ट्रेल’ ध्वस्त

श्रीगंगानगर/रायसिंहनगर: राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में पुलिस ने नए साल के दूसरे ही दिन संगठित अपराध के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। रायसिंहनगर थाना पुलिस ने कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग के एक बड़े आर्थिक नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए 91 लाख रुपये की नकदी बरामद की है। यह कार्रवाई न केवल वित्तीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे गैंग के रसद और फंडिंग मॉडल का भी खुलासा हुआ है।

कैसे हुई कार्रवाई?

श्रीगंगानगर एसपी डॉ. अमृता दुहन के निर्देशानुसार, जिले में अवैध गतिविधियों और गैंगस्टरों के मूवमेंट पर नजर रखने के लिए विशेष नाकाबंदी अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान रायसिंहनगर पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि एक लग्जरी कार में संदिग्ध लोग बड़ी मात्रा में नकदी लेकर पंजाब की ओर जा रहे हैं।

पुलिस ने विजयनगर रोड पर सघन नाकाबंदी की। जब संदिग्ध कार को रोका गया, तो उसमें सवार युवक घबरा गए। तलाशी लेने पर कार के गुप्त केबिन और सीटों के नीचे छिपाकर रखे गए नोटों के बंडल बरामद हुए। मशीन से गिनती करने पर कुल राशि 91 लाख रुपये निकली, जिसके बारे में आरोपी कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सके।

जोधपुर से पंजाब का ‘क्राइम रूट’

प्रारंभिक पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पकड़े गए आरोपियों—कुलदीप, रामस्वरूप, अमन और योगेश—ने स्वीकार किया कि यह पैसा जोधपुर के व्यापारिक घरानों और रसूखदार लोगों से वसूली (Protection Money) के जरिए इकट्ठा किया गया था। यह पैसा श्रीगंगानगर के रास्ते पंजाब भेजा जाना था, जहाँ से इसे गैंग के सरगनाओं के निर्देशों पर आगे इस्तेमाल किया जाना था।

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह डिजिटल लेन-देन के बजाय भारी नकदी का उपयोग कर रहा था ताकि सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचा जा सके।

एसपी डॉ. अमृता दुहन का बयान

मीडिया को संबोधित करते हुए एसपी डॉ. अमृता दुहन ने बताया:

“यह पुलिस के लिए एक रणनीतिक जीत है। अमूमन हम गुर्गों को हथियारों के साथ पकड़ते हैं, लेकिन यह पहली बार है जब हमने गैंग के ‘मनी ट्रेल’ को सफलतापूर्वक पकड़ा है। बिना पैसे के किसी भी गिरोह का चलना मुश्किल होता है, और 91 लाख की यह बरामदगी उनके ऑपरेशन्स को बड़ा झटका देगी।”

गिरफ्तार आरोपियों का प्रोफाइल

गिरफ्तार किए गए चारों आरोपी लंबे समय से लॉरेंस बिश्नोई और उसके करीबियों के संपर्क में थे।

  • कुलदीप और रामस्वरूप: इनका काम मुख्य रूप से वसूली की रकम को एक शहर से दूसरे शहर पहुंचाना (लॉजिस्टिक्स) था।

  • अमन और योगेश: ये स्थानीय स्तर पर नेटवर्क विस्तार और रेकी करने का काम करते थे।

आगे की जांच और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि जोधपुर में किन-किन लोगों ने यह पैसा दिया है और क्या उन्हें डरा-धमकाकर यह वसूली की गई थी। इस मामले में आयकर विभाग (Income Tax) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी सूचित किया जा सकता है, क्योंकि मामला हवाला और संगठित अपराध की फंडिंग से जुड़ा है।

इस कार्रवाई के बाद श्रीगंगानगर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस अब गैंग के उन सफेदपोश मददगारों की तलाश कर रही है जो शहर में बैठकर इन अपराधियों को पनाह और सूचनाएं उपलब्ध कराते हैं।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️