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शतरंज की बिसात पर अर्जुन का पराक्रम: वर्ल्ड ब्लिट्ज चैंपियनशिप में जीता कांस्य पदक

दोहा (कतर)। भारतीय शतरंज के ‘गोल्डन जनरेशन’ के प्रमुख सदस्य अर्जुन इरिगेसी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे दुनिया के सबसे तेज और सटीक दिमाग वाले खिलाड़ियों में से एक हैं। कतर की राजधानी दोहा में संपन्न हुई ‘फिडे वर्ल्ड ब्लिट्ज शतरंज चैंपियनशिप’ के बेहद कठिन मुकाबलों के बाद अर्जुन इरिगेसी ने तीसरा स्थान हासिल कर कांस्य पदक अपने नाम किया।

टूर्नामेंट का सफर: रफ्तार और रणनीति का संगम

ब्लिट्ज शतरंज, खेल का वह प्रारूप है जहाँ खिलाड़ियों के पास सोचने के लिए चंद सेकंड्स होते हैं। अर्जुन ने टूर्नामेंट के शुरुआती दौर से ही अपना दबदबा बनाए रखा। उन्होंने दुनिया के कई दिग्गज ग्रैंडमास्टर्स को मात दी और अंतिम दौर (सेमीफाइनल) तक का सफर तय किया।

  • सेमीफाइनल की जंग: सेमीफाइनल मुकाबले में अर्जुन का सामना उज्बेकिस्तान के युवा सनसनी नोदिरबेक अब्दुसत्तोरोव से हुआ। दोनों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली, लेकिन समय के दबाव और एक छोटी सी चूक के कारण अर्जुन को हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, इस हार के बावजूद उनके पूरे टूर्नामेंट के प्रदर्शन ने उन्हें कांस्य पदक का हकदार बनाया।

मैग्नस कार्लसन का दबदबा बरकरार

जहाँ अर्जुन ने कांस्य जीतकर भारत को गौरवान्वित किया, वहीं दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन ने एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित की। कार्लसन ने फाइनल में नोदिरबेक को हराकर एक बार फिर वर्ल्ड ब्लिट्ज चैंपियन का खिताब अपने नाम किया। कार्लसन की यह जीत दर्शाती है कि अनुभव और मानसिक मजबूती के मामले में वे अभी भी शीर्ष पर हैं।

अर्जुन इरिगेसी: भारतीय शतरंज का नया चेहरा

22 वर्षीय अर्जुन इरिगेसी के लिए साल 2025 असाधारण रहा है। वे न केवल लाइव रेटिंग में 2800 का आंकड़ा पार करने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हुए, बल्कि उन्होंने लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है। अर्जुन की खेल शैली को उनके ‘निडर आक्रमण’ और ‘अंतिम समय की एकाग्रता’ के लिए जाना जाता है।

भारतीय शतरंज जगत के दिग्गजों, जिनमें विश्वनाथन आनंद भी शामिल हैं, ने अर्जुन की इस सफलता की सराहना की है। आनंद ने कहा कि अर्जुन की यह उपलब्धि आने वाले समय में उन्हें विश्व चैंपियन की रेस में और मजबूती से खड़ा करेगी।

भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?

विश्वनाथन आनंद के बाद, अर्जुन इरिगेसी, डी. गुकेश और आर. प्रज्ञानंदा जैसे खिलाड़ियों ने भारत को शतरंज की ‘सुपरपावर’ बना दिया है। वर्ल्ड ब्लिट्ज चैंपियनशिप में पदक जीतना यह दर्शाता है कि भारतीय खिलाड़ी अब न केवल क्लासिकल (धीमे) प्रारूप में बल्कि ब्लिट्ज (तेज) प्रारूप में भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को टक्कर दे रहे हैं।

निष्कर्ष अर्जुन इरिगेसी का यह कांस्य पदक केवल एक पदक नहीं, बल्कि उनकी कड़ी मेहनत और भारतीय शतरंज के बढ़ते प्रभाव का प्रतीक है। दोहा की इस चैंपियनशिप ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शतरंज की दुनिया का भविष्य अब भारतीय युवाओं के हाथों में सुरक्षित है।

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