
श्रीगंगानगर। सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में आज सोमवार, 29 दिसंबर को रेलवे भूमि पर काबिज परिवारों का गुस्सा फूट पड़ा। शहर के आजाद सिनेमा के पीछे और करनी मार्ग क्षेत्र में रेलवे लाइन के किनारे दशकों से रह रहे सैकड़ों लोगों ने जिला कलेक्ट्रेट का घेराव किया और रेलवे प्रशासन व सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यह प्रदर्शन रेलवे बोर्ड द्वारा अतिक्रमण हटाने के लिए जारी किए गए नोटिसों और संभावित ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के विरोध में किया गया।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
पिछले कुछ समय से उत्तर पश्चिम रेलवे (NWR) द्वारा अपनी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त करने का अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में श्रीगंगानगर के वार्डों में रेलवे ट्रैक के आसपास बनी बस्तियों को चिन्हित कर वहां ‘लाल निशान’ लगाए गए थे और निवासियों को जगह खाली करने के अंतिम नोटिस थमा दिए गए थे। इन बस्तियों में रहने वाले अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के हैं, जो पिछले 30 से 40 वर्षों से वहां छोटे-छोटे पक्के और कच्चे मकान बनाकर रह रहे हैं।
प्रदर्शन का मुख्य घटनाक्रम
आज सुबह भारी संख्या में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे स्थानीय नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के कड़ाके की इस ठंड में लोगों के घरों को उजाड़ना अमानवीय है।
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महिलाओं का रोष: प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने भावुक होते हुए कहा, “हमने पाई-पाई जोड़कर ये घर बनाए हैं। अब जब हम बूढ़े हो गए हैं और हमारे बच्चे बड़े हो रहे हैं, तो हमें बेघर किया जा रहा है। हम इस सर्दी में अपने बच्चों को लेकर कहां जाएंगे?”
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प्रशासन को ज्ञापन: प्रदर्शनकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि या तो रेलवे की इस कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाई जाए, या फिर उजाड़े जाने वाले परिवारों को प्रशासन द्वारा अन्यत्र कहीं पुनर्वास (Resettlement) किया जाए और उन्हें पट्टे दिए जाएं।
रेलवे और प्रशासन का पक्ष
दूसरी ओर, रेलवे प्रशासन का तर्क है कि सुरक्षा और रेलवे के विस्तार प्रोजेक्ट्स के लिए ट्रैक के आसपास की भूमि का खाली होना अनिवार्य है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा मानकों के तहत ट्रैक के एक निश्चित दायरे में कोई भी निर्माण नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे हादसों का डर बना रहता है। जिला प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया है कि उनकी मांगों को राज्य सरकार और रेलवे बोर्ड के उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा, ताकि कोई मानवीय समाधान निकाला जा सके।
कड़ाके की ठंड और मानवीय संकट
वर्तमान में श्रीगंगानगर भीषण शीतलहर की चपेट में है। न्यूनतम तापमान 8 डिग्री के आसपास बना हुआ है। ऐसे में यदि रेलवे का पीला पंजा (बुलडोजर) चलता है, तो सैकड़ों परिवार खुले आसमान के नीचे आ जाएंगे। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया, तो वे रेल पटरियों पर बैठकर ‘चक्का जाम’ करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
शाम होने तक प्रदर्शनकारी इस शर्त पर वापस लौटे कि जब तक प्रशासन से कोई ठोस वार्ता नहीं होती, वे अपना संघर्ष जारी रखेंगे। फिलहाल पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और पुलिस बल को एहतियातन तैनात किया गया है।