भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित वनडे टूर्नामेंट, विजय हजारे ट्रॉफी में इस बार एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसका इंतजार करोड़ों क्रिकेट प्रेमी कर रहे थे। भारतीय क्रिकेट के दो सबसे बड़े स्तंभ—विराट कोहली और रोहित शर्मा—एक बार फिर अपनी-अपनी घरेलू टीमों की जर्सी में मैदान पर उतरे। इन दोनों दिग्गजों की मौजूदगी ने न केवल टूर्नामेंट के रोमांच को दोगुना कर दिया, बल्कि युवा खिलाड़ियों के लिए सीखने का एक सुनहरा अवसर भी पेश किया।
विराट कोहली का ‘चेज मास्टर’ अवतार
दिल्ली के लिए खेलते हुए विराट कोहली ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उन्हें दुनिया का सर्वश्रेष्ठ ‘चेज मास्टर’ क्यों कहा जाता है। आंध्र प्रदेश के खिलाफ खेले गए मुकाबले में दिल्ली के सामने एक चुनौतीपूर्ण लक्ष्य था। दिल्ली की शुरुआत धीमी रही और जल्दी विकेट गिर गए, लेकिन कोहली ने एक छोर संभाले रखा।
कोहली ने अपनी पारी की शुरुआत संभलकर की, लेकिन जैसे ही वह सेट हुए, उन्होंने मैदान के चारों ओर आकर्षक शॉट्स लगाए। उन्होंने न केवल अपना शतक पूरा किया, बल्कि एक कठिन रन-चेज का सफल नेतृत्व करते हुए दिल्ली को जीत की दहलीज के पार पहुँचाया। उनकी इस पारी में क्लासिक कवर ड्राइव और फ्लिक शॉट्स का वही पुराना अंदाज़ देखने को मिला, जिसने स्टेडियम में मौजूद दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
रोहित शर्मा की कप्तानी पारी
दूसरी ओर, मुंबई के स्टार और भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने उत्तराखंड के खिलाफ अपना लोहा मनवाया। रोहित, जो अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं, ने शुरुआत से ही गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा। उन्होंने अपनी पारी में गगनचुंबी छक्के जड़े और उत्तराखंड के गेंदबाजी आक्रमण को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। रोहित का यह शतक यह दर्शाता है कि प्रारूप चाहे कोई भी हो, उनका बल्ला आग उगलना जानता है। उनकी कप्तानी पारी की बदौलत टीम ने एक विशाल स्कोर खड़ा किया, जिसका पीछा करना विपक्षी टीम के लिए असंभव साबित हुआ।
वैभव सूर्यवंशी: एक नए सितारे का जन्म (विश्व रिकॉर्ड)
जहाँ दिग्गजों ने अपनी क्लास दिखाई, वहीं 19 वर्षीय युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी ने क्रिकेट जगत को हिलाकर रख दिया। वैभव ने वह कर दिखाया जो अब तक असंभव माना जा रहा था। उन्होंने लिस्ट-ए क्रिकेट में मात्र 59 गेंदों में 150 रन बनाकर दक्षिण अफ्रीका के महान बल्लेबाज एबी डिविलियर्स का विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया।
वैभव की बल्लेबाजी में निडरता और आधुनिक क्रिकेट की झलक साफ दिखाई दी। उन्होंने अपनी पारी के दौरान रिकॉर्ड तोड़ छक्के लगाए और स्ट्राइक रेट को इतना ऊंचा रखा कि गेंदबाज असहाय नजर आए। यह रिकॉर्ड इस बात का प्रमाण है कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य सुरक्षित हाथों में है और बेंच स्ट्रेंथ अविश्वसनीय रूप से मजबूत है।
निष्कर्ष
विजय हजारे ट्रॉफी का यह सीजन भारतीय क्रिकेट के ‘अनुभव’ और ‘युवा जोश’ के सही मिश्रण का गवाह बना है। एक तरफ कोहली और रोहित की फॉर्म ने आगामी अंतरराष्ट्रीय दौरों के लिए चयनकर्ताओं को राहत दी है, तो दूसरी तरफ वैभव सूर्यवंशी जैसे युवाओं ने यह संदेश दिया है कि वे बड़ी लीग के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस तरह के प्रदर्शन न केवल घरेलू क्रिकेट की साख बढ़ाते हैं, बल्कि भारतीय टीम की विश्व क्रिकेट में बादशाहत को भी बरकरार रखते हैं।