
श्रीगंगानगर। राजस्थान के ‘धान का कटोरा’ कहे जाने वाले श्रीगंगानगर जिले में इन दिनों हवा जहरीली होती जा रही है। आज, 25 दिसंबर 2025 की सुबह शहर की वायु गुणवत्ता (Air Quality Index) ने खतरे के निशान को पार कर लिया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, शहर का AQI 235 के पार दर्ज किया गया है, जिसे स्वास्थ्य की दृष्टि से ‘गंभीर’ (Severe/Poor) श्रेणी में माना जाता है।
बढ़ते प्रदूषण और ऊपर से गिरते तापमान ने मिलकर शहर में ‘स्मॉग’ (धुंध और धुएं का मिश्रण) जैसी स्थिति पैदा कर दी है, जिससे आमजन का जीना मुहाल हो गया है।
प्रदूषण के प्रमुख कारण
श्रीगंगानगर में वायु गुणवत्ता बिगड़ने के पीछे कई स्थानीय और मौसमी कारण उत्तरदायी हैं:
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तापमान का गिरना (Inversion Effect): सर्दियों में हवा भारी हो जाती है, जिससे जमीन के पास उठने वाला धुआं और धूल के कण ऊपर नहीं जा पाते और वातावरण में ही टिके रहते हैं।
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वाहन और निर्माण कार्य: मुख्य बाजार, गोल बाजार और व्यस्त चौराहों पर वाहनों के भारी दबाव के कारण निकलने वाला धुआं प्रदूषण का मुख्य स्रोत बना हुआ है। इसके अलावा, शहर में चल रहे निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल स्थिति को और बिगाड़ रही है।
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पड़ोसी राज्यों का प्रभाव: पंजाब और हरियाणा की सीमाओं से सटा होने के कारण, वहां कृषि अवशेषों (परावली) के प्रबंधन की गतिविधियों का असर भी श्रीगंगानगर की हवा पर पड़ता है।
स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव
वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वस्थ व्यक्तियों के लिए भी हानिकारक है, लेकिन कुछ विशेष समूहों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है:
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फेफड़ों की समस्याएं: अस्थमा और ब्रोंकाइटिस से पीड़ित मरीजों को सांस लेने में भारी तकलीफ और सीने में जकड़न महसूस हो रही है।
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आंखों में जलन: स्मॉग के कारण लोगों की आंखों में पानी आना और खुजली जैसी शिकायतें बढ़ गई हैं।
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बच्चों और बुजुर्गों पर असर: कमजोर इम्यूनिटी के कारण बच्चे और बुजुर्ग इस प्रदूषण की चपेट में सबसे पहले आ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की एडवाइजरी
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जिलेवासियों के लिए एक विस्तृत गाइडलाइन जारी की है:
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आउटडोर गतिविधियों से बचें: बुजुर्गों और बच्चों को विशेष रूप से सलाह दी गई है कि वे सुबह और शाम की सैर (Morning Walk) पर न निकलें, क्योंकि इस समय प्रदूषण का स्तर सबसे ऊंचा होता है।
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मास्क का उपयोग: घर से बाहर निकलते समय N-95 मास्क का अनिवार्य रूप से प्रयोग करें।
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खिड़की-दरवाजे बंद रखें: प्रदूषण के स्तर को घर के भीतर कम रखने के लिए जितना संभव हो खिड़कियों को बंद रखें।
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तरल पदार्थों का सेवन: शरीर से विषाक्त पदार्थों (toxins) को निकालने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी और जूस का सेवन करें।
प्रशासनिक कदम
नगर परिषद और जिला प्रशासन ने शहर के मुख्य मार्गों पर ‘एंटी-स्मॉग गन’ के उपयोग और पानी के छिड़काव पर विचार करना शुरू कर दिया है ताकि धूल के कणों को जमीन पर बैठाया जा सके। इसके साथ ही, प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों के खिलाफ भी चेकिंग अभियान चलाने की तैयारी है।
निष्कर्ष: श्रीगंगानगर में वायु प्रदूषण का यह स्तर एक अलार्मिंग सिग्नल है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह एक गंभीर स्वास्थ्य आपातकाल का रूप ले सकता है। नागरिकों से अपील है कि वे कचरा न जलाएं और निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें।