
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के पल्मोनोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने हाल ही में एक चिंताजनक स्वास्थ्य रिपोर्ट जारी की है। इस शोध के अनुसार, दिल्ली-NCR और उत्तर भारत के कई शहरों में रहने वाले लोगों के फेफड़े उनकी वास्तविक उम्र से 10 साल ज्यादा बूढ़े हो चुके हैं। डॉक्टरों ने इसके लिए हमारी जीवनशैली की तीन सबसे घातक आदतों को जिम्मेदार ठहराया है, जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।
फेफड़ों को बर्बाद करने वाली 3 मुख्य आदतें
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वायु प्रदूषण में मॉर्निंग वॉक: आमतौर पर सुबह की सैर स्वास्थ्य के लिए अच्छी मानी जाती है, लेकिन AIIMS के डॉक्टरों का कहना है कि सर्दियों के मौसम में और उच्च प्रदूषण वाले दिनों में सुबह की सैर ‘जहर’ के समान है। सुबह के समय ‘स्मॉग’ और भारी प्रदूषक तत्व (PM 2.5) जमीन के करीब होते हैं। जब हम दौड़ते या तेज चलते हैं, तो हम गहराई से सांस लेते हैं, जिससे ये सूक्ष्म कण सीधे फेफड़ों के सबसे निचले हिस्से (Alveoli) तक पहुँचकर उन्हें स्थायी रूप से नुकसान पहुँचाते हैं।
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अत्यधिक धूम्रपान (Active and Passive Smoking): सिगरेट और बीड़ी का सेवन फेफड़ों की कार्यक्षमता को तेजी से कम करता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ‘पैसिव स्मोकिंग’ (दूसरों के धुएं में सांस लेना) भी उतना ही खतरनाक है। यह फेफड़ों की कोमलता को खत्म कर उन्हें सख्त बना देता है, जिससे ऑक्सीजन सोखने की क्षमता घट जाती है।
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खराब वेंटिलेशन में खाना पकाना: यह समस्या विशेष रूप से उन महिलाओं और रसोइयों में देखी गई है जो बंद रसोई में खाना पकाते हैं। चूल्हे, गैस या तेल के जलने से निकलने वाला धुआं और ‘वाष्प’ अगर रसोई से बाहर न निकले, तो वह फेफड़ों के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है। डॉक्टरों के अनुसार, बंद रसोई में खाना बनाना 10 सिगरेट पीने के बराबर नुकसान पहुँचा सकता है।
फेफड़ों के स्वास्थ्य का दृश्य (Visual Representation)
(ऊपर दिया गया चित्र एक स्वस्थ फेफड़े और प्रदूषण व धूम्रपान से प्रभावित फेफड़े के बीच के अंतर को दर्शाता है।)
बचाव के लिए AIIMS के डॉक्टरों के सुझाव
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योग और प्राणायाम: रोजाना 15-20 मिनट ‘डीप ब्रीदिंग’ (गहरी सांस लेना), अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम करें। यह फेफड़ों की वायु धारण करने की क्षमता (Lung Capacity) को बढ़ाता है।
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घर के अंदर के पौधे (Air Purifying Plants): अपने घर और बेडरूम में स्नेक प्लांट (Snake Plant), एलोवेरा, और मनी प्लांट जैसे पौधे लगाएं। ये पौधे रात में भी ऑक्सीजन छोड़ते हैं और हवा से विषाक्त पदार्थों को सोखते हैं।
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धूप निकलने पर ही बाहर जाएं: प्रदूषण के दिनों में सुबह 8 बजे से पहले घर से बाहर निकलने से बचें। वॉक के लिए शाम या दोपहर का समय चुनें जब धूप हो और हवा में मौजूद धूल के कण कुछ हद तक ऊपर चले गए हों।
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खान-पान: विटामिन-C युक्त फल (आंवला, संतरा) और गुड़ का सेवन करें, जो श्वसन मार्ग को साफ करने में मदद करते हैं।
निष्कर्ष: फेफड़ों का डैमेज अक्सर ‘इरिवर्सिबल’ (अपरिवर्तनीय) होता है, यानी एक बार खराब होने पर उन्हें पूरी तरह ठीक करना मुश्किल है। इसलिए, समय रहते इन आदतों को बदलना ही एकमात्र समाधान है।