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श्रीगंगानगर-सूरतगढ़ हाईवे का कायाकल्प: 1022 करोड़ रुपये से बनेगा ‘सुपर एक्सप्रेसवे’, जिले को मिलेगी जाम और हादसों से मुक्ति

श्रीगंगानगर। सरहदी जिले श्रीगंगानगर के विकास की रफ्तार को एक नई गति मिलने वाली है। लंबे समय से प्रतीक्षित श्रीगंगानगर-सूरतगढ़ नेशनल हाईवे (NH-62) को फोरलेन बनाने की राह अब पूरी तरह साफ हो गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 1022 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को वित्तीय स्वीकृति दे दी है। यह घोषणा न केवल जिले की कनेक्टिविटी में सुधार करेगी, बल्कि आर्थिक विकास के नए द्वार भी खोलेगी।

दो-लेन से फोरलेन: क्यों थी इसकी आवश्यकता?

वर्तमान में श्रीगंगानगर से सूरतगढ़ तक का मार्ग टू-लेन (दो लेन) है। भारी वाहनों, विशेष रूप से कृषि उत्पादों और मालगाड़ी के सामान ढोने वाले ट्रकों के बढ़ते दबाव के कारण इस हाईवे पर अक्सर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती थी। इसके अलावा, संकरी सड़क होने के कारण यहाँ दुर्घटनाओं का ग्राफ भी काफी ऊंचा था।

इस प्रोजेक्ट के तहत मौजूदा सड़क को चौड़ा कर फोरलेन में बदला जाएगा, जिससे वाहनों की गति बढ़ेगी और यात्रा के समय में करीब 30 से 40 मिनट की बचत होगी।

प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं और बजट का आवंटन

केंद्र सरकार द्वारा मंजूर किए गए 1022 करोड़ रुपये का उपयोग सड़क निर्माण, पुलियाओं के सुदृढ़ीकरण और सुरक्षा उपायों के लिए किया जाएगा। प्रोजेक्ट के मुख्य आकर्षण इस प्रकार हैं:

  • आधुनिक डिवाइडर और लाइटिंग: पूरी सड़क के बीच में ऊंचे डिवाइडर और रात के समय बेहतर विजिबिलिटी के लिए एलईडी लाइट्स लगाई जाएंगी।

  • बायपास और ओवरब्रिज: घनी आबादी वाले क्षेत्रों और रेलवे फाटकों पर ओवरब्रिज (Flyovers) का निर्माण किया जाएगा ताकि हाईवे का ट्रैफिक निर्बाध रूप से चलता रहे।

  • जमीन अधिग्रहण: हाईवे को चौड़ा करने के लिए आवश्यक भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। इसके लिए मुआवजे का प्रावधान भी इसी बजट में शामिल है।

कनेक्टिविटी और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

श्रीगंगानगर एक प्रमुख कृषि प्रधान जिला है। यहाँ की मंडियों से अनाज और फल (विशेषकर किन्नू) देश के अन्य हिस्सों में भेजे जाते हैं। फोरलेन बनने से:

  1. परिवहन लागत में कमी: बेहतर सड़क से वाहनों का ईंधन बचेगा और मेंटेनेंस का खर्च कम होगा।

  2. सूरतगढ़ थर्मल और एयरफोर्स स्टेशन: सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सूरतगढ़ एयरफोर्स स्टेशन और थर्मल पावर प्लांट तक रसद और भारी मशीनों को पहुँचाना आसान हो जाएगा।

  3. बीकानेर-जोधपुर संपर्क: यह हाईवे श्रीगंगानगर को बीकानेर और आगे जोधपुर-जैसलमेर से जोड़ने वाली मुख्य कड़ी है, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

सड़क सुरक्षा: ‘ब्लैक स्पॉट्स’ का होगा खात्मा

इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सड़क सुरक्षा है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने इस मार्ग पर कई ऐसे ‘ब्लैक स्पॉट्स’ चिन्हित किए थे जहाँ बार-बार हादसे होते हैं। फोरलेन निर्माण के दौरान इन खतरनाक मोड़ों को सीधा किया जाएगा और उचित साइनबोर्ड व फुटपाथ बनाए जाएंगे। इससे जिले में सड़क दुर्घटनाओं के कारण होने वाली जनहानि में भारी कमी आने की उम्मीद है।

कब शुरू होगा काम?

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद अब टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अगले कुछ महीनों में जमीन अधिग्रहण और बिजली की लाइनों को शिफ्ट करने का काम पूरा कर लिया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले वर्ष के मध्य तक धरातल पर निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।

निष्कर्ष: 1022 करोड़ रुपये की यह सौगात श्रीगंगानगर के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यह प्रोजेक्ट न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। जिलेवासियों के लिए अब सूरतगढ़ और बीकानेर की राह आसान, सुरक्षित और तेज होने वाली है।

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