
रायसिंहनगर (श्रीगंगानगर)। राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के रायसिंहनगर इलाके से एक अत्यंत विचलित करने वाली घटना सामने आई है। यहाँ स्थित भोमपुरा गौशाला में पिछले कुछ दिनों के भीतर 100 से अधिक गायों की दर्दनाक मौत हो गई है। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में गोवंश की मृत्यु की खबर फैलते ही पूरे जिले में हड़कंप मच गया है और प्रशासन से लेकर आम जन तक स्तब्ध हैं।
हृदयविदारक दृश्य और ग्रामीणों का आक्रोश
घटना का खुलासा तब हुआ जब ग्रामीणों ने गौशाला के आसपास असामान्य हलचल और बदबू महसूस की। जब गौशाला के भीतर जाकर देखा गया, तो वहाँ का दृश्य रूह कंपा देने वाला था। गौशाला परिसर में जगह-जगह गायों के शव बिखरे पड़े थे। ग्रामीणों का आरोप है कि गौशाला प्रबंधन ने इस मामले को दबाने की कोशिश की और समय रहते बीमार गायों का उपचार नहीं कराया।
जैसे ही यह खबर सोशल मीडिया और स्थानीय समाचारों में फैली, बड़ी संख्या में हिंदू संगठन और गौ-सेवक मौके पर जमा हो गए। लोगों ने गौशाला प्रबंधन और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और इस “नरसंहार” के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
गौशाला अध्यक्ष का इस्तीफा और प्रबंधन पर सवाल
मामला जैसे ही तूल पकड़ने लगा और जनाक्रोश बढ़ा, गौशाला अध्यक्ष ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि केवल इस्तीफा देना काफी नहीं है, बल्कि इस लापरवाही की गहन जांच होनी चाहिए। प्रारंभिक तौर पर यह सामने आया है कि गौशाला में क्षमता से अधिक गायों को रखा गया था और उनकी देखभाल के लिए पर्याप्त कर्मचारी या संसाधन उपलब्ध नहीं थे।
प्रशासन की कार्रवाई: जेसीबी से खोदे गए गहरे गड्ढे
सूचना मिलते ही जिला प्रशासन सक्रिय हुआ। रायसिंहनगर के प्रशासनिक अधिकारी और पशुपालन विभाग की एक संयुक्त टीम ने मौके का मुआयना किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने मृत गायों के शवों को सम्मानजनक तरीके से निस्तारित करने के लिए जेसीबी की मदद से बड़े-बड़े गड्ढे खुदवाए और शवों को दफनाया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पूरे परिसर को सैनिटाइज किया है ताकि किसी संभावित संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
मौत के कारणों पर सस्पेंस: बीमारी या जहरीला चारा?
पशुपालन विभाग के डॉक्टरों ने मृत गायों के विसरा के सैंपल लिए हैं और उन्हें जांच के लिए लैब भेजा गया है। मौत के स्पष्ट कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है, लेकिन इसके पीछे तीन मुख्य संभावनाएं जताई जा रही हैं:
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दूषित चारा या पानी: अंदेशा है कि गायों को दिया गया चारा जहरीला हो सकता था।
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ठंड और कुप्रबंधन: कड़ाके की ठंड और खुले में रहने के कारण गायों की हालत बिगड़ी।
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संक्रामक बीमारी: किसी अज्ञात बीमारी या संक्रमण का फैलना।
‘जांच के आदेश, दोषी बख्शे नहीं जाएंगे’
जिला कलेक्टर ने इस मामले में एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित की है। प्रशासन का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी। यदि इस मामले में गौशाला प्रबंधन या किसी अधिकारी की लापरवाही पाई जाती है, तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष: भोमपुरा गौशाला की यह घटना गौशालाओं के प्रबंधन और वहां मिलने वाले सरकारी अनुदान के सदुपयोग पर बड़े सवालिया निशान लगाती है। जहाँ एक ओर गाय को पूजनीय माना जाता है, वहीं दूसरी ओर इस तरह की लापरवाही समाज के लिए शर्मनाक है। जिले के लोग अब निष्पक्ष जांच और दोषियों को सजा मिलने का इंतजार कर रहे हैं।