
श्रीगंगानगर: राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में 25 दिसंबर को क्रिसमस के त्योहार पर भी कड़ाके की ठंड और घने कोहरे की चादर छाई रही, जिससे सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। पिछले एक सप्ताह से जारी शीतलहर का प्रकोप इस दिन अपने चरम पर पहुंच गया। सुबह के समय विजिबिलिटी (दृश्यता) खतरनाक रूप से कम होकर मात्र 5 मीटर तक दर्ज की गई, जिसने शहर से लेकर राष्ट्रीय राजमार्गों तक यातायात की गति को लगभग रोक दिया।
यातायात और आवागमन पर प्रभाव
सर्दी और कोहरे का सबसे बुरा असर सड़क परिवहन पर पड़ा है। घने कोहरे के कारण मुख्य सड़कों और श्रीगंगानगर से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 62 पर वाहनों की आवाजाही कछुआ चाल से होती दिखाई दी। दुर्घटनाओं से बचने के लिए ट्रक ड्राइवरों और बस चालकों को दिन में भी हेडलाइट और फॉग लाइट्स का उपयोग करना पड़ा, जबकि कई भारी वाहनों को सड़कों के किनारे खड़ा कर दिया गया। जिला प्रशासन ने स्थानीय लोगों और यात्रियों से विशेष अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और यदि यात्रा आवश्यक हो तो फॉग लाइट्स का अनिवार्य रूप से उपयोग करें और सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
रेलवे सेवाएं भी इस कोहरे की मार से अछूती नहीं रहीं। घने कोहरे के कारण लंबी दूरी की कई महत्वपूर्ण ट्रेनें अपने निर्धारित समय से कई घंटों की देरी से चल रही हैं, जिससे यात्रियों को स्टेशनों पर ठंड में इंतजार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
मौसम की स्थिति और पश्चिमी विक्षोभ का असर
मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में उत्तरी भारत के मैदानी इलाकों को प्रभावित करने वाला पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) कुछ कमजोर पड़ा है। इस कारण, जिले के न्यूनतम तापमान में पिछले दिनों की तुलना में मामूली वृद्धि दर्ज की गई है, जो कुछ राहत का संकेत है। हालांकि, दिन के समय सूर्य की रोशनी धरती तक पहुंचने में कोहरे की घनी परत बाधा बन रही है। इस वजह से अधिकतम तापमान सामान्य से काफी नीचे बना हुआ है। दिन में धूप न निकलने के कारण वातावरण में गलन (Severe Chill) बनी हुई है, जिससे आम लोगों को कड़कड़ाती ठंड का सामना करना पड़ रहा है।
आम जनजीवन और स्थानीय प्रतिक्रिया
कड़ाके की ठंड और कोहरे ने बाजारों और व्यावसायिक गतिविधियों को भी धीमा कर दिया है। सुबह और देर शाम को बाजारों में सन्नाटा पसरा रहता है। स्कूली बच्चों, विशेष रूप से छोटे बच्चों, के स्वास्थ्य को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूलों के समय में परिवर्तन किया है, और कई स्थानों पर नर्सरी से 8वीं तक की कक्षाओं के लिए छुट्टियों को बढ़ाया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। हालांकि, पानी की आवक (जैसा कि अन्य खबर में बताया गया है) ने सिंचाई में मदद की है, लेकिन लगातार कम तापमान पालक, सरसों और गेहूं जैसी रबी की फसलों को पाला (Frost) पड़ने के कारण नुकसान पहुंचा सकता है। किसान रात के समय खेतों में धुआँ करके या सिंचाई करके अपनी फसलों को पाले से बचाने के लिए प्रयास कर रहे हैं।
स्थानीय निवासियों ने सर्दी से बचने के लिए अलाव का सहारा लिया है। शहर के सार्वजनिक स्थानों, चौराहों और रैन बसेरों के पास प्रशासन की ओर से लकड़ी और कंबल उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि बेघर लोगों को शीत लहर से बचाया जा सके। जिला प्रशासन ने स्थानीय अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को भी अलर्ट पर रखा है, क्योंकि सर्दी के मौसम में श्वास संबंधी और हृदय रोग के मामलों में वृद्धि देखी जाती है।
प्रशासन की अपील
जिला कलेक्टर ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर नागरिकों से अपील की है कि वे मौसम की गंभीरता को समझें और सुरक्षित रहें। उन्होंने बुजुर्गों और बच्चों का विशेष ध्यान रखने, गर्म कपड़े पहनने और पौष्टिक भोजन का सेवन करने की सलाह दी है। यातायात पुलिस ने वाहन चालकों को कोहरे के दौरान ओवरटेकिंग से बचने और धीमी गति से चलने की सख्त हिदायत दी है।
संक्षेप में, 25 दिसंबर को श्रीगंगानगर शीतलहर और घने कोहरे की चपेट में रहा, जिसने रेल, सड़क यातायात और दिन-प्रतिदिन के सामान्य क्रियाकलापों को बाधित किया, बावजूद इसके जिला प्रशासन और स्थानीय लोग इस मौसमी चुनौती का सामना कर रहे हैं।