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🚧 गाजर मंडी निर्माण विवाद: 40 ढाणियों के किसानों का रास्ता बंद

श्री गंगानगर, 30 नवंबर, 2025। श्री गंगानगर जिले की साधुवाली ग्राम पंचायत के चक 2-डी में प्रस्तावित नई गाजर मंडी के निर्माण ने स्थानीय किसानों के लिए एक बड़ा संकट उत्पन्न कर दिया है। पंजाब सीमा से सटे इस क्षेत्र में मंडी की करीब 3.5 किलोमीटर लंबी चारदीवारी के निर्माण का कार्य शुरू होते ही किसान संघर्ष समिति ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। किसानों का आरोप है कि यह निर्माण चक 2-डी की लगभग 40 ढाणियों (छोटे ग्रामीण आवास) में रहने वाले 100 से अधिक किसान परिवारों का उनके खेतों और घरों तक का पारंपरिक आवागमन मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध कर देगा।

संकट का मूल: आवागमन और पारंपरिक रास्ते

किसानों के अनुसार, जिस जगह पर मंडी की चारदीवारी बनाई जा रही है, वह वर्षों से इन ढाणियों में रहने वाले परिवारों द्वारा अपने कृषि कार्य के लिए उपयोग किया जाने वाला प्राथमिक रास्ता है। ट्रैक्टर, ट्रॉली और अन्य कृषि उपकरण लेकर खेतों तक पहुंचने के लिए उनके पास यही एकमात्र सुगम मार्ग है। मंडी की चारदीवारी बनने से ये रास्ते स्थायी रूप से बंद हो जाएंगे, जिससे किसानों को अपने खेतों तक पहुंचने के लिए अत्यधिक लंबा और चक्करदार मार्ग अपनाना पड़ेगा, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होगी। इसके अलावा, आपातकालीन स्थिति (जैसे मेडिकल या प्राकृतिक आपदा) में भी इन परिवारों का मुख्य सड़क से संपर्क टूट जाएगा।

किसानों ने जिला प्रशासन और मंडी समिति को कई बार अपनी चिंताओं से अवगत कराया है, लेकिन उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। किसान संघर्ष समिति का कहना है कि वे गाजर मंडी के निर्माण के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उनकी मांग है कि चारदीवारी के निर्माण में पर्याप्त कट या वैकल्पिक रास्ते छोड़े जाएं ताकि ढाणी वालों का आवागमन बाधित न हो।

आंदोलन की चेतावनी और प्रशासनिक प्रतिक्रिया

मामले को गंभीरता से लेते हुए, किसान नेताओं ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है। उन्होंने घोषणा की है कि यदि 1 दिसंबर 2025 तक इस समस्या का समाधान नहीं निकाला गया और उनके आवागमन के लिए वैकल्पिक या सुगम रास्ता सुनिश्चित नहीं किया गया, तो वे 2 दिसंबर 2025 से मंडी स्थल पर अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर देंगे।

यह मामला अब क्षेत्र की राजनीति और प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। किसान संघर्ष समिति का मानना है कि मंडी के निर्माण में स्थानीय किसानों के हितों को नजरअंदाज किया गया है, जबकि जिला प्रशासन का दावा है कि उन्होंने मंडी निर्माण की प्रक्रिया में सभी कानूनी पहलुओं का ध्यान रखा है। हालांकि, मौजूदा स्थिति में, प्रशासन को किसानों के पारंपरिक रास्तों को ध्यान में रखते हुए समाधानकारी और संवेदनशील रुख अपनाने की आवश्यकता है, ताकि क्षेत्र के किसानों को राहत मिल सके और प्रस्तावित मंडी का निर्माण कार्य भी सुचारू रूप से आगे बढ़ सके।

  1. अगला कदम: किसानों की यह चेतावनी क्षेत्र में एक बड़े विरोध प्रदर्शन का आधार बन सकती है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। प्रशासन को तुरंत किसानों से संवाद स्थापित करके इस गतिरोध को खत्म करने की दिशा में कदम उठाना चाहिए।
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