
नई दिल्ली। जैसे-जैसे उत्तर भारत में सर्दी का प्रकोप बढ़ रहा है, वैसे-वैसे श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। एक हालिया लैंसेट (The Lancet) अध्ययन ने एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य चेतावनी जारी की है, जिसमें कहा गया है कि खांसी, जुकाम और बुखार जैसे सामान्य और अक्सर अनदेखे किए जाने वाले लक्षणों को अब बच्चों और वयस्कों, विशेषकर कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में, गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यह सामान्य दिखने वाले लक्षण ह्यूमन मेटाप्न्यूमोवायरस (HMPV) नामक एक खतरनाक वायरस का संकेत हो सकते हैं।
ह्यूमन मेटाप्न्यूमोवायरस (HMPV) क्या है?
HMPV, या Human Metapneumovirus, एक श्वसन वायरस है जिसे पहली बार 2001 में पहचाना गया था। यह वायरस अक्सर इन्फ्लूएंजा (Flu) और रेस्पिरेटरी सिंकिटियल वायरस (RSV) के साथ भ्रमित होता है, क्योंकि इसके लक्षण काफी मिलते-जुलते हैं।
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संक्रमण के लक्षण: HMPV के कारण आमतौर पर हल्की से मध्यम श्रेणी की ऊपरी श्वसन संबंधी बीमारियाँ होती हैं, जिनमें शामिल हैं:
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खांसी
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बुखार
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गले में खराश
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बहती नाक
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सांस लेने में कठिनाई
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अधिकांश स्वस्थ वयस्कों में, HMPV संक्रमण एक साधारण सर्दी-जुकाम की तरह ही ठीक हो जाता है।
मासूमों और बुजुर्गों पर बड़ा खतरा
लैंसेट स्टडी और अन्य विशेषज्ञों की चेतावनी का मुख्य कारण यह है कि HMPV कुछ संवेदनशील समूहों में गंभीर श्वसन संबंधी बीमारियों का कारण बन सकता है:
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छोटे बच्चे और शिशु: 5 साल से कम उम्र के बच्चों में, HMPV ब्रोंकियोलाइटिस (Bronchiolitis) या निमोनिया (Pneumonia) जैसी गंभीर निचली श्वसन पथ की बीमारियाँ पैदा कर सकता है। इन बीमारियों के कारण बच्चों को सांस लेने में गंभीर तकलीफ हो सकती है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की आवश्यकता पड़ सकती है।
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बुजुर्ग और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोग: 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोग, और कैंसर या अन्य गंभीर बीमारियों के कारण कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले वयस्कों में भी यह वायरस जानलेवा साबित हो सकता है।
सर्दियों के महीनों में, जब RSV और इन्फ्लूएंजा जैसे अन्य श्वसन वायरस भी सक्रिय होते हैं, HMPV का संक्रमण स्थिति को और अधिक जटिल बना देता है।
डॉक्टर की स्पष्ट सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और बाल रोग विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि वे अब मामूली सर्दी जुकाम को भी गंभीरता से लें और स्व-उपचार (Self-Medication) से बचें।
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तुरंत परामर्श: यदि खांसी या बुखार जैसे लक्षण लगातार बने रहते हैं, या यदि सांस लेने में तकलीफ हो रही है, तो बिना देर किए डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
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विशेष ध्यान: बच्चों, बुजुर्गों और पुरानी बीमारियों (जैसे अस्थमा या COPD) से पीड़ित लोगों के लिए विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है।
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रोकथाम के उपाय: संक्रमण से बचने के लिए, लोगों को नियमित रूप से हाथ धोने, खांसते या छींकते समय मुंह को ढकने और बीमार लोगों से दूरी बनाए रखने जैसे बुनियादी स्वच्छता प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए।
HMPV की यह चेतावनी इस बात को रेखांकित करती है कि श्वसन संबंधी स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना और किसी भी लगातार लक्षण को अनदेखा न करना कितना महत्वपूर्ण है, खासकर मौसमी संक्रमणों के दौरान।