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🌐 डिजिटल स्वास्थ्य में भारत बनेगा वैश्विक पथप्रदर्शक: WEF रिपोर्ट ने की पहल की सराहना

नई दिल्ली। विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum – WEF) द्वारा जारी एक हालिया रिपोर्ट में यह भविष्यवाणी की गई है कि भारत अपनी महत्वाकांक्षी डिजिटल स्वास्थ्य पहलों के कारण वैश्विक स्वास्थ्य देखभाल के मानचित्र पर एक अग्रणी शक्ति के रूप में उभर सकता है। रिपोर्ट में विशेष रूप से आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) और डिजिटल स्वास्थ्य प्रोत्साहन योजना (DHIS) की सराहना की गई है, जिन्हें देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच, सामर्थ्य और गुणवत्ता में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखने वाला बताया गया है।

डिजिटल मिशनों का प्रभाव

 

WEF की रिपोर्ट इस बात पर प्रकाश डालती है कि भारत सरकार के ये प्रमुख मिशन किस तरह एक अरब से अधिक नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के वितरण के तरीके को मौलिक रूप से बदल रहे हैं:

  • आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM): ABDM का लक्ष्य देश के नागरिकों के लिए एक डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है। इसके तहत प्रत्येक नागरिक को एक आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (ABHA) प्रदान किया जा रहा है। यह खाता व्यक्तियों के इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड (EHR) को सुरक्षित और सुलभ तरीके से जोड़ने में मदद करता है। यह प्रणाली कागजी कार्रवाई को कम करती है, डॉक्टरों को मरीज का पूरा इतिहास तुरंत जानने में मदद करती है, जिससे उपचार अधिक सटीक और कुशल हो जाता है।

  • डिजिटल स्वास्थ्य प्रोत्साहन योजना (DHIS): DHIS का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं (जैसे डॉक्टर, अस्पताल और क्लीनिक) को डिजिटल तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। वित्तीय और तकनीकी प्रोत्साहन देकर, यह योजना सुनिश्चित करती है कि निजी और सरकारी दोनों क्षेत्र डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड और टेलीमेडिसिन जैसी सेवाओं को अपनी दैनिक कार्यप्रणाली में एकीकृत करें।

तकनीक का अभिनव उपयोग

 

रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि भारत में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार केवल रिकॉर्ड डिजिटलीकरण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह नवीनतम तकनीकों के अभिनव उपयोग पर आधारित है:

  1. टेलीमेडिसिन (ई-संजीवनी): भारत की टेलीमेडिसिन पहल, विशेष रूप से ‘ई-संजीवनी’ प्लेटफॉर्म, दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेषज्ञ डॉक्टरों से ऑनलाइन परामर्श करने की सुविधा प्रदान कर रहा है। इससे विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच उन स्थानों तक सुनिश्चित हो रही है जहां भौतिक बुनियादी ढांचा सीमित है।

  2. इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड (EHR): EHR का व्यापक उपयोग डेटा की सटीकता और सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है, साथ ही अनावश्यक परीक्षणों और दोहराव को कम करके स्वास्थ्य देखभाल की लागत को भी कम कर रहा है।

  3. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग: भारत AI का उपयोग रोगों के निदान (विशेष रूप से इमेजिंग और स्क्रीनिंग में), सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी और व्यक्तिगत उपचार योजनाओं को विकसित करने में कर रहा है। यह तकनीक स्वास्थ्य सेवाओं की दक्षता और सटीकता को कई गुना बढ़ा रही है।

वैश्विक स्वास्थ्य समानता को बढ़ावा

 

WEF की रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह भारत के मॉडल को केवल एक राष्ट्रीय सफलता की कहानी नहीं मानती, बल्कि इसे वैश्विक महत्व का बताती है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने यह दिखा दिया है कि एक बड़े, विविधतापूर्ण और संसाधन-सीमित देश में भी सस्ती और प्रभावी डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली को कैसे सफलतापूर्वक लागू किया जा सकता है। भारत का यह मॉडल अन्य विकासशील देशों, विशेष रूप से अफ्रीका और एशिया में, जहां स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच और सामर्थ्य एक बड़ी चुनौती है, के लिए एक व्यवहारिक टेम्पलेट (Blueprint) के रूप में काम कर सकता है। भारत द्वारा साझा किए गए अनुभव और तकनीकें वैश्विक स्वास्थ्य समानता (Global Health Equity) को बढ़ावा देने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।

निष्कर्ष यह है कि डिजिटल स्वास्थ्य में भारत का नेतृत्व न केवल इसके नागरिकों को बेहतर सेवाएँ प्रदान करेगा, बल्कि इसे वैश्विक स्वास्थ्य नवाचार का एक केंद्र भी बनाएगा।

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