
श्रीगंगानगर और अनूपगढ़ से सटे अंतर्राष्ट्रीय सीमावर्ती क्षेत्रों में पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हेरोइन की डिलीवरी की बढ़ती घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन की चिंता को कई गुना बढ़ा दिया है। 25 नवंबर 2025 तक के नवीनतम आंकड़ों और कार्रवाई के अनुसार, यह रूट अब अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करों के लिए एक प्रमुख कॉरिडोर बन गया है, जिसके खिलाफ पुलिस ने एक बड़ा अभियान छेड़ रखा है।
ड्रोन तस्करी: नई चुनौती और वित्तीय प्रभाव
ड्रग्स की तस्करी के लिए मानव कुरियर (Human Couriers) के बजाय मानवरहित हवाई वाहनों (UAVs) यानि ड्रोनों का उपयोग एक नया और गंभीर सुरक्षा खतरा पैदा कर रहा है। सीमा पार से, विशेष रूप से रात के अंधेरे और खराब मौसम का फायदा उठाकर, हेरोइन के पैकेट गिराए जा रहे हैं, जिन्हें बाद में सीमा के इस पार के स्थानीय तस्कर उठाकर आगे की सप्लाई चेन में भेजते हैं।
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विशाल वित्तीय मूल्य: पिछले डेढ़ साल में इस रूट से तस्करी की गई हेरोइन का अनुमानित मूल्य $3.40 अरब (लगभग ₹28,000 करोड़) से अधिक आंका गया है। यह आंकड़ा न केवल नशीले पदार्थों के कारोबार के विशाल आकार को दर्शाता है, बल्कि इस बात पर भी जोर देता है कि कैसे यह अवैध कारोबार आतंकवाद और अन्य राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों को वित्तपोषित कर सकता है।
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लक्ष्य क्षेत्र: श्रीगंगानगर, अनूपगढ़, और हनुमानगढ़ के सीमा से सटे गाँव विशेष रूप से इस तस्करी के निशाने पर हैं, जहां कम आबादी और कठिन भौगोलिक स्थिति तस्करों के लिए आसान लक्ष्य बनाती है।
🛡️ ‘ऑपरेशन क्लीन स्वीप’ की तेज कार्रवाई
इस गंभीर चुनौती का मुकाबला करने और ड्रग नेटवर्क की जड़ों को काटने के लिए, श्रीगंगानगर पुलिस द्वारा ‘ऑपरेशन क्लीन स्वीप’ के तहत लगातार और व्यापक कार्रवाई की जा रही है। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य सीमा पार से संचालित इस ड्रग चेन को पूरी तरह से नष्ट करना है, जिसमें पेडलर (छोटे विक्रेता) से लेकर बड़े तस्करों तक सभी शामिल हैं।
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व्यापक छापेमारी: अभियान के तहत पुलिस टीमों ने जिले भर में 190 ठिकानों पर सघन छापेमारी की। ये ठिकाने उन स्थानों पर केंद्रित थे जहां ड्रग्स का वितरण किया जाता था या जहां संदिग्ध तस्करों के छिपने की संभावना थी।
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संदिग्धों की हिरासत: इन छापों के परिणामस्वरूप, पुलिस ने 95 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। इन हिरासत में लिए गए लोगों से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क की विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सके।
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महिला तस्कर की गिरफ्तारी: हाल ही में मिली एक महत्वपूर्ण सफलता में, पुलिस ने एक महिला तस्कर को गिरफ्तार किया जो खुले तौर पर सड़क पर हेरोइन बेच रही थी। इस गिरफ्तारी से संकेत मिलता है कि ड्रग्स का यह धंधा अब गांवों और कस्बों की सामान्य सड़कों तक पहुँच चुका है, जिससे सामाजिक सुरक्षा पर खतरा बढ़ गया है।
आगे की चुनौतियां और सुरक्षा उपाय
ड्रोन तस्करी की बढ़ती घटनाओं से निपटने के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) और राज्य पुलिस तकनीकी निगरानी को बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। इसमें एंटी-ड्रोन तकनीक (Anti-Drone Technology) का उपयोग, सीमा पर गश्त को मजबूत करना, और स्थानीय लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना शामिल है ताकि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दे सकें। ‘ऑपरेशन क्लीन स्वीप’ न केवल तस्करों को पकड़ने पर केंद्रित है, बल्कि ड्रग्स के आदी हो चुके युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए पुनर्वास कार्यक्रमों पर भी ध्यान दे रहा है।
सीमावर्ती क्षेत्रों को ड्रग्स मुक्त करने की यह लड़ाई लगातार जारी है, जिसमें केंद्र और राज्य की एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय की आवश्यकता है।