
श्रीगंगानगर, राजस्थान। राजस्थान का सीमावर्ती शहर श्रीगंगानगर पिछले कुछ हफ्तों से भयंकर वायु प्रदूषण की चपेट में है, जिससे यहां के निवासियों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। 3 नवंबर 2025 को जारी हुई रिपोर्टों ने इस चिंता को और बढ़ा दिया था, जब श्रीगंगानगर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 830 के चौंकाने वाले स्तर पर पहुंच गया था। यह स्तर न केवल ‘गंभीर’ (Severe) श्रेणी से बहुत ऊपर है, बल्कि यह देश के सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में श्रीगंगानगर को शीर्ष पर ला खड़ा करता है।
9 नवंबर को भी स्थिति चिंताजनक
आज, 9 नवंबर 2025 को भी, शहर में प्रदूषण का स्तर चिंताजनक बना हुआ है। हालांकि AQI 830 के चरम स्तर से कुछ कम हो सकता है, लेकिन यह अभी भी ‘बहुत खराब’ (Very Poor) या ‘गंभीर’ (Severe) श्रेणी में बना हुआ है। शहर के चारों ओर धुंध और धुएँ की मोटी चादर देखी जा सकती है, जिससे विजिबिलिटी (दृश्यता) काफी कम हो गई है और साँस लेने में तकलीफ की शिकायतें बढ़ रही हैं।
प्रदूषण के कारण और कारक
श्रीगंगानगर में प्रदूषण के उच्च स्तर के लिए कई कारक जिम्मेदार माने जाते हैं:
- पराली जलाना: पंजाब और हरियाणा के पड़ोसी राज्यों में फसल अवशेष (पराली) जलाने की घटनाएँ इस क्षेत्र में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण हैं। हवा की दिशा के कारण यह धुआँ श्रीगंगानगर में जमा हो जाता है।
- ठंड और हवा की गति: नवंबर में तापमान गिरने और हवा की गति धीमी होने के कारण प्रदूषक कण (PM2.5 और PM10) जमीन के करीब जमा हो जाते हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ जाती है।
- स्थानीय कारण: शहर में धूल, निर्माण गतिविधियाँ, और वाहनों से निकलने वाला धुआँ भी प्रदूषण को बढ़ाते हैं।
स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि AQI का यह स्तर नागरिकों, विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से ही श्वसन संबंधी बीमारियों (जैसे अस्थमा) से पीड़ित लोगों के लिए अत्यंत खतरनाक है।
उच्च प्रदूषण के संभावित स्वास्थ्य प्रभाव:
- साँस लेने में कठिनाई और खाँसी
- आँखों, गले और नाक में जलन
- फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी
- हृदय रोगों (Heart Diseases) का खतरा
प्रशासन और स्वास्थ्य अधिकारियों की अपील
प्रदूषण की विकट स्थिति को देखते हुए, स्वास्थ्य अधिकारियों और जिला प्रशासन ने लोगों से अत्यधिक सावधानी बरतने की अपील की है।
सुरक्षा उपाय:
- घर के अंदर रहें: लोगों को सलाह दी गई है कि वे अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें, खासकर सुबह और देर शाम के समय।
- मास्क का उपयोग करें: बाहर निकलने पर N-95 या P-100 मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।
- शारीरिक श्रम से बचें: आउटडोर गतिविधियों, जॉगिंग या कड़े व्यायाम से बचें।
- हाइड्रेटेड रहें: खूब पानी पिएं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
प्रशासन ने प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय सुनिश्चित करने और वाहनों के उत्सर्जन की जाँच करने जैसे कदम उठाए हैं। स्थानीय लोगों से भी अपील की गई है कि वे व्यक्तिगत रूप से प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों से बचें।