
नई दिल्ली। देश में खाद्य सुरक्षा (Food Safety) और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने फूड लेबलिंग को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। FSSAI ने सख्त निर्देश जारी किए हैं कि कंपनियां अपने उत्पादों पर लोकप्रिय और संवेदनशील शब्दों, जैसे ‘ORS’ (ओरल रिहाइड्रेशन साल्ट) और ‘आइसक्रीम’, का इस्तेमाल तभी कर सकेंगी जब उनके उत्पाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और FSSAI द्वारा निर्धारित गुणवत्ता और सामग्री मानकों पर खरे उतरेंगे।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को भ्रामक लेबलिंग (Misleading Labeling) से बचाना है। अक्सर देखा गया है कि कंपनियां अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए ऐसे शब्दों का उपयोग करती हैं, जबकि उत्पाद की गुणवत्ता या सामग्री उन मानकों से मेल नहीं खाती जिसके लिए वे शब्द जाने जाते हैं।
‘ORS’ लेबलिंग पर सख्ती क्यों?
‘ओरल रिहाइड्रेशन साल्ट’ या ORS एक जीवन रक्षक फार्मूला है, जिसका इस्तेमाल गंभीर निर्जलीकरण (Dehydration) को रोकने और इलाज के लिए किया जाता है। WHO ने ORS की संरचना में नमक और चीनी की मात्रा को लेकर सटीक मानक तय किए हैं।
FSSAI ने पाया कि कई बेवरेज कंपनियां अपने मीठे और फ्लेवर्ड ड्रिंक्स को ‘ORS’ के विकल्प या ‘रिहाइड्रेशन ड्रिंक्स’ के रूप में बेच रही थीं, जबकि उनमें चीनी की मात्रा बहुत अधिक और इलेक्ट्रोलाइट्स की मात्रा बहुत कम होती थी। नए मानकों के तहत, कोई भी उत्पाद तभी ‘ORS’ लेबल का उपयोग कर सकता है जब वह WHO के अनिवार्य मानकों का सख्ती से पालन करे।
‘आइसक्रीम’ बनाम ‘फ्रोजन डेसर्ट’: स्पष्ट अंतर अनिवार्य
FSSAI ने ‘आइसक्रीम’ लेबल के उपयोग पर भी सख्ती दिखाई है। मानक यह सुनिश्चित करते हैं कि केवल उन्हीं उत्पादों को आइसक्रीम कहा जाए, जो डेयरी फैट (Dairy Fat) और दूध ठोस पदार्थों (Milk Solids) का उपयोग करके बनाए जाते हैं।
वे उत्पाद जो दूध वसा (Milk Fat) की जगह वनस्पति वसा (Vegetable Fat) या तेल का उपयोग करते हैं, उन्हें स्पष्ट रूप से ‘फ्रोजन डेसर्ट’ (Frozen Desserts) के रूप में लेबल करना अनिवार्य होगा। यह कदम उपभोक्ताओं को यह जानने में मदद करेगा कि वे डेयरी-आधारित उत्पाद खरीद रहे हैं या वनस्पति-आधारित, जिससे उन्हें गुणवत्ता और पोषण के बारे में सही जानकारी मिल सके।
कानूनी उल्लंघन और उपभोक्ताओं की सुरक्षा
FSSAI ने स्पष्ट कर दिया है कि इन नए नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस सख्ती का अंतिम लक्ष्य खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और ग्राहकों को सशक्त बनाना है ताकि वे अपने स्वास्थ्य और पोषण संबंधी जरूरतों के आधार पर सूचित निर्णय ले सकें। यह कदम न केवल बाजार में पारदर्शिता लाएगा, बल्कि गुणवत्ता वाले उत्पादों के उत्पादन को भी प्रोत्साहित करेगा।