
मुंबई। टीम इंडिया से बाहर चल रहे युवा सलामी बल्लेबाज पृथ्वी शॉ ने आखिरकार बल्ला थामकर अपने आलोचकों और चयनकर्ताओं को करारा जवाब दे दिया है। रणजी ट्रॉफी के मौजूदा सत्र में महाराष्ट्र के खिलाफ खेलते हुए, मुंबई के इस विस्फोटक बल्लेबाज ने क्रिकेट जगत में तहलका मचा दिया है। शॉ ने महज 141 गेंदों में तूफानी दोहरा शतक जड़कर न सिर्फ अपनी फॉर्म में वापसी का ऐलान किया, बल्कि रणजी ट्रॉफी के इतिहास का तीसरा सबसे तेज दोहरा शतक लगाने का कीर्तिमान भी अपने नाम कर लिया।
वानखेड़े स्टेडियम में खेले जा रहे इस मुकाबले में, टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी मुंबई की शुरुआत अच्छी रही, लेकिन जल्द ही यह मैच पूरी तरह से शॉ के नाम हो गया। अपनी चिर-परिचित आक्रामक शैली में बल्लेबाजी करते हुए, शॉ ने महाराष्ट्र के गेंदबाजों को कोई मौका नहीं दिया। उन्होंने बाउंड्री पर भरोसा दिखाया और चौकों-छक्कों की झड़ी लगा दी।
शॉ ने अपना शतक केवल 72 गेंदों में पूरा किया, जिसके बाद उन्होंने और भी तेज गति से रन बनाए। 150 के आंकड़े को पार करने के बाद शॉ ने गियर बदला और 200 रन तक पहुंचने के लिए केवल 39 गेंदें लीं। उनका यह दोहरा शतक गति और आक्रामकता का एक अद्भुत मिश्रण था, जिसमें उनके ट्रेडमार्क पंच और कट शॉट्स देखने को मिले। शॉ ने अपनी पारी में कुल 29 चौके और 5 गगनचुंबी छक्के लगाए।
इस रिकॉर्ड-तोड़ पारी के साथ, पृथ्वी शॉ ने रणजी ट्रॉफी में सबसे तेज दोहरे शतक के मामले में कई दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि वह रवि शास्त्री के रिकॉर्ड को तोड़ने से चूक गए, लेकिन उनकी यह पारी भारतीय घरेलू क्रिकेट के इतिहास की सबसे यादगार पारियों में से एक बन गई है।
पिछले कुछ समय से शॉ खराब फॉर्म, फिटनेस के मुद्दों और मैदान के बाहर के विवादों के कारण राष्ट्रीय टीम से बाहर चल रहे थे। उनका हालिया प्रदर्शन उनकी मानसिक दृढ़ता और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाता है। यह दोहरा शतक ऐसे समय में आया है जब भारतीय क्रिकेट टीम में सलामी बल्लेबाजों के स्थानों को लेकर प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई है।
मैच के बाद, क्रिकेट एक्सपर्ट्स और कमेंटेटरों ने शॉ की पारी की जमकर तारीफ की। उनका मानना है कि इस तरह की विध्वंसक पारी ही वह जवाब है, जो एक खिलाड़ी चयनकर्ताओं को दे सकता है। आलोचकों ने भी माना कि शॉ के पास जो नैसर्गिक प्रतिभा है, वह किसी भी फॉर्मेट में मैच का रुख पलटने की क्षमता रखती है।
पृथ्वी शॉ का यह प्रदर्शन उनके लिए टीम इंडिया में वापसी का दरवाजा खटखटाने का काम कर सकता है। घरेलू क्रिकेट में इस धमाकेदार शुरुआत के बाद, अब सभी की निगाहें उन पर टिकी हैं कि क्या वह अपनी फॉर्म को पूरे सीजन में बरकरार रख पाते हैं और क्या चयन समिति उनके इस ‘वॉर ऑफ वर्ड्स’ का नोटिस लेती है। फिलहाल, शॉ ने मैदान पर अपनी बात साबित कर दी है—कि जब वह फॉर्म में होते हैं, तो उन्हें रोकना लगभग असंभव होता है।