
राजस्थान सरकार ने शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव नियमों में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक परिवर्तन किया है। अब राज्य के नगर निगमों में मेयर और नगरपालिकाओं में चेयरमैन का चुनाव सीधे जनता के वोटों से नहीं होगा, बल्कि उनका चयन पार्षदों के मतों के आधार पर होगा। इस बदलाव से निकाय चुनाव की पूरी राजनीतिक गतिशीलता बदल जाएगी।
नए बदलाव का स्वरूप (Indirect Election)
यह नया नियम निकाय प्रमुखों के चुनाव को अप्रत्यक्ष प्रणाली की ओर ले जाता है। इसका मतलब है:
- वोटर का बदलाव: पहले मेयर और चेयरमैन के लिए शहरी क्षेत्र के आम मतदाता सीधे मतदान करते थे। अब, मतदाता केवल अपने वार्ड के पार्षद का चुनाव करेंगे।
- मेयर/चेयरमैन का चयन: चुने गए ये पार्षद ही बाद में अपने बीच से नगर निगम के लिए मेयर और नगर पालिका के लिए चेयरमैन का चुनाव करेंगे।
बदलाव के पीछे की मुख्य वजहें
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बदलाव के पीछे मुख्य रूप से दो कारण हैं:
- दल-बदल (Defection) पर नियंत्रण: अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली में, मेयर या चेयरमैन का चुनाव जीतने के बाद भी, पार्षद अपने दल के प्रति अधिक वफादार बने रहते हैं। सीधी प्रणाली में, चुने गए मेयर पर दल-बदल या अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से नियंत्रण करना मुश्किल होता है।
- पार्षदों की महत्ता में वृद्धि: यह प्रणाली पार्षदों की भूमिका को अधिक महत्वपूर्ण बनाती है, क्योंकि वे अब केवल गली-मोहल्ले के प्रतिनिधि नहीं, बल्कि शहर के मुखिया को चुनने वाले निर्णायक मतधारक बन जाते हैं।
- पिछले अनुभवों से सीख: पूर्व में प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली के तहत कई बार सत्तारूढ़ दल को उन शहरों में भी मेयर/चेयरमैन पद गंवाना पड़ा था, जहां उनके पास पार्षदों का बहुमत था। अप्रत्यक्ष प्रणाली से पार्टी को पार्षदों पर अधिक नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी।
सरकार की आगामी कार्रवाई
राज्य सरकार ने इस महत्वपूर्ण बदलाव को लागू करने और इसकी कानूनी व प्रशासनिक पहलुओं की समीक्षा के लिए एक कैबिनेट उप-समिति (Cabinet Sub-Committee) का गठन किया है। यह उप-समिति चुनाव प्रक्रिया को औपचारिक रूप देने और नए नियमों को अधिसूचित करने का काम करेगी।
इस बदलाव का सीधा असर आगामी शहरी निकाय चुनावों पर देखने को मिलेगा, जहां अब राजनीतिक दल मेयर या चेयरमैन के पद के लिए जनता को लुभाने के बजाय अपने पार्षदों को एकजुट रखने और विरोधी दलों के पार्षदों को तोड़ने पर अधिक ध्यान केंद्रित करेंगे।